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साहब! बातों से नहीं निर्मल होगी गंगा, अफसरशाही फेर रही उम्मीदों पर पानी

Mon, 13 Aug 2018 06:24 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 13 Aug 2018 06:24 PM IST
सार

- प्रदूषण दूर करने को लेकर सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही, हकीकत बिल्कुल उलट
- जाजमऊ ट्रीटमेंट प्लांट से कई गुना प्रदूषित पानी गंगा में किया जा रहा प्रवाहित
- प्लांट के मॉनीटर पर बीओडी 30 की जगह 104 मिलीग्राम प्रतिलीटर पाई गई
 

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day by day pollution increased in the Ganges
प्लांट में यहां पर पानी शोधित किया जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर शहर में निर्मल गंगा अभियान में जुटी केंद्र और प्रदेश सरकार की मंशा पर स्थानीय अधिकारी ही पानी फेर रहे हैं। दो दिन पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फरमान जारी किया है कि गंगा में ट्रीटमेंट प्लांट से जो पानी जाएगा, उसमें बीओडी (पानी में ऑक्सीजन की घुलनशील मात्रा) की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति लीटर की जगह 20 होगी।
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जब इसकी पड़ताल की गई तो स्थिति बिल्कुल उलट मिली। गंगा में जाने वाले पानी में बीओडी की मात्रा 104 मिलीग्राम पाई गई। प्रदूषण के कारक अन्य तत्वों की स्थिति भी काफी खराब मिली।
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जाजमऊ स्थित ट्रीटमेंट प्लांट की पड़ताल में सामने आया कि शोधित होने के बाद भी गंगा में जो पानी जा रहा है, उसमें भी काफी हानिकारक तत्व हैं। इनसे गंगा में प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ रहा है। इस प्लांट से रोजाना 13 करोड़ लीटर पानी गंगा में जा रहा है। शनिवार की स्थिति के अनुसार, एक लीटर पानी में 104 मिलीग्राम बीओडी की मात्रा के हिसाब से देखें तो कई टन प्रदूषित तत्व रोज गंगा में जानबूझकर प्रवाहित किए जा रहे हैं।
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day by day pollution increased in the Ganges
डेमो पिक
सिर्फ बीओडी ही नहीं, बाकी हानिकारक तत्वों की स्थिति भी शोधित पानी में मानक से ज्यादा है, जो प्लांट के मानीटर पर दिखी। यही नहीं, इस ट्रीटमेंट प्लांट में एक मानीटर पर यह भी दिखता है कि शोधित पानी में क्रोमियम (खतरनाक प्रदूषित तत्व, जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है) कितना जा रहा है।

चौंकाने वाली बात है कि क्रोमियम की मात्रा बताने वाली मशीन ही गायब है। इससे जाहिर है कि गंगा को लेकर सरकारें जितने जोरशोर से अभियान चला रही हैं, जमीनी स्तर पर काम करने वाली एजेंसियां उतनी ही लापरवाह हैं।

50 हजार का लग चुका जुर्माना
ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन करने वाली एजेंसी जल निगम पर टेनरियों और दूसरी औद्योगिक इकाइयों के प्रदूषित पानी को शोधित करने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लग चुका है। कुछ समय पहले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह जुर्माना लगाया था। उनके अफसरों के निरीक्षण में पाया गया था कि प्लांट में जल शोधन की प्रक्रिया मानकों के अनुकूल नहीं है। इसके बाद इसे ऑनलाइन सिस्टम से भी जोड़ा गया।

day by day pollution increased in the Ganges
डेमो पिक
मानीटर पर यह स्थिति
- बीओडी 104, मानक 30
- सीओडी 617 मानक 300
- टीएसएस 192 मानक 50
नोट : मात्रा मिलीग्राम प्रति लीटर में।

सीईटीपी का डिजाइन ही ऐसा है कि उसमें 100 से अधिक बीओडी आएगा। इस पर बीओडी को 30 तक लाना मुश्किल है। इसमें नालों के साथ टेनरियों का प्रदूषित कचरा भी आता है। इसे कम करने की व्यवस्था की जा रही है। उसके बाद ही यह संभव होगा। इसी तरह घरेलू ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित पानी में बीओडी की मात्रा कम की जाएगी। - आरके अग्रवाल, महाप्रबंधक, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई

नया एसटीपी प्राइवेट हाथों में 
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक आरके अग्रवाल ने बताया कि पनका में 6 करोड़ लीटर क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) के निर्माण और जाजमऊ, बिनगवां, सजारी एसटीपी के 15 साल तक संचालन एवं रखरखाव के लिए कोलकाता की कंपनी का नाम लगभग तय हो गया है।
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