कानपुर: कोरोना कमजोर पर स्कूलों में एहतियात पर पूरा जोर, मास्क के पीछे छिपी छात्रों की हंसी
कोरोना की तीसरी लहर के कमजोर पड़ने के बाद जब स्कूल खोले गए तो प्रबंधन ने कोविड गाइडलाइन का पूरा पालन किया। स्कूलों में अब बच्चों को हर हाल में मास्क लगाना पड़ता है। अभिभावक, स्टॉफ आदि भी मास्क लगाए रहते हैं।
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स्कूल गेट पर थर्मल स्कैनिंग और बैग में सैनिटाइजर अनिवार्य है। अब खेलकूद की एक्टिविटी भी नहीं होती है। बीते तीन वर्षों से कोरोना महामारी के चलते शिक्षण व्यवस्था काफी डगमगा गई है। पहले साल तो शिक्षण व्यवस्था पूरी तरह से चौपट रही।
इसके बाद ऑनलाइन शिक्षा के सहारे डगमगाती व्यवस्था को संभालने की कोशिश की गई। कोरोना की तीसरी लहर के कमजोर पड़ने के बाद जब स्कूल खोले गए तो प्रबंधन ने कोविड गाइडलाइन का पूरा पालन किया। स्कूलों में अब बच्चों को हर हाल में मास्क लगाना पड़ता है। अभिभावक, स्टॉफ आदि भी मास्क लगाए रहते हैं। जुकाम होने पर छात्रों को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाता है। इस दौरान छुट्टी पर रहने पर उनकी उपस्थिति दर्ज होती है।
विद्यालयों के नाम: सर पदमपत सिंहानिया स्कूल, कमला नगर और ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन
| महामारी से पहले | महामारी के बाद |
| प्रार्थना: सभी क्लास के छात्र ग्राउंड में आते और उसके बाद एसेंबली और प्रार्थना होती। | क्लासरूम में ही प्रार्थना होती है, केवल विशेष एसेंबली के दौरान ही छात्र एकत्र होते हैं। |
| लंच: छात्रों के लिए कैंटीन की व्यवस्था। ग्राउंड में जाकर भोजन कर सकते थे। | अब कक्षा में ही भोजन, खाना शेयर नहीं करना |
| स्पोर्ट्स: छात्रों के लिए गेम्स के अलग-अलग पीरियड। कई स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं भी होती थीं। | स्पोर्ट्स पूरी तरह से बंद। |
| एक्टिविटी: सांस्कृतिक, साहित्यिक एक्टिविटी। साइंस फेयर समेत कई प्रतियोगिताओं का आयोजन होता था। | ये सब एक्टिविटी पूरी तरह से बंद। |
कोरोना महामारी को लेकर विद्यालय पूरी तरह से सचेत है। अब धीरे-धीरे बंदिशें कम करने की कोशिश की जा रही है। 9वीं से 12वीं के सभी छात्रों को वैक्सीन लग चुकी है। नए सत्र से अगर सब कुछ ठीक रहता है तो सभी गतिविधियां पुन: शुरू की जाएंगी। -भावना गुप्ता, प्रिंसिपल, सर पदमपत सिंहानिया स्कूल
तीसरी लहर के बाद जब स्कूल खुले तो अभिभावकों, छात्रों का सकारात्मक रुख दिखा। अब अभिभावक बच्चों को दबाव में स्कूल नहीं भेजते। कई छात्रों को वैक्सीन लग चुकी है। 12 से 14 साल तक बच्चों के लिए भी कैंप लगाया जाएगा। सभी एहतियात बरते जा रहे हैं। -पूजा अवस्थी, एमडी, ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन, जवाहर नगर
छात्र-छात्राएं बोले...
कोरोना के बाद से डर तो बैठ गया है। पूरे दिन मास्क लगाना किसी चुनौती से कम नहीं है। स्कूल में दोस्तों से दूर से बात करना खराब लगता है। -वैष्णवी पांडेय, कक्षा 10, सर पदमपत सिंहानिया स्कूल
महामारी के बाद स्कूल आकर बहुत अच्छा लगा। किसी भी समस्या का समाधान अब शिक्षकों से बेहतर ढंग से समझ में आता है। व्हाट्सएप ग्रुप भी बने हुए हैं, ग्रुप में आसानी से शंका का समाधान कर सकते हैं। -रेवांत खन्ना, कक्षा 12, सर पदमपत सिंहानिया स्कूल
मास्क, सैनिटाइजर के साथ स्कूल आना जरूरी है। चश्मा लगाने वाले छात्रों के लिए मास्क लगाना और मुश्किल है, लेकिन सुरक्षा को देखते हुए इसे नकारा नहीं जा सकता। हालांकि अब शिक्षण व्यवस्था भी पटरी पर आने लगी है। -अंजलि तिवारी, कक्षा 12, ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन
कोरोना ने फिजिकल एक्सरसाइज, खेलकूद समेत अन्य एक्टिविटी को बंद करा दिया है। पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है। बंदिशें धीरे-धीरे कम की जाएं तो बेहतर है। -प्रिया त्रिवेदी, कक्षा 10, ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन