{"_id":"597cb53f4f1c1b24468b487f","slug":"dacoit-goppa-wants-to-overtake-guru-gauri","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"बिना फायरिंग आखिर कैसे पकड़ा गया ये कुख्यात डकैत, ये रही पीछे की असल सच्चाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना फायरिंग आखिर कैसे पकड़ा गया ये कुख्यात डकैत, ये रही पीछे की असल सच्चाई
सुधीर अग्रवाल, अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Sun, 30 Jul 2017 09:20 PM IST
विज्ञापन
डेमो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में डाकू गोप्पा को गुरु एक लाख के ईनामी डाकू गौरी यादव से आगे बढ़ने की चाहत ही उसके लिए घातक साबित हो गई। सूत्र बताते हैं डाकू गौरी के इशारे पर ही गोप्पा की गिरफ्तारी हुई है। इसमें गोप्पा के गैंग के एक सदस्य की भी भूमिका बताई जा रही है। एसटीएफ ने रणनीति के तहत गोप्पा को जाल में फंसाकर आसानी से दबोच लिया।
विज्ञापन
डकैत गोप्पा
कुख्यात डाकू के इतनी आसानी से एसटीएफ और पुलिस के हत्थे चढ़ने की घटना हर किसी को हैरान कर रही थी। हर व्यक्ति उसके जिंदा बचने की उम्मीद नहीं कर रहा था।
बिना फायरिंग पकड़े जाने से पूरी सच्चाई जानने को लोग बेताब थे। खंडेहा, हनुमानगंज, लालता रोड़ से लेकर सरधुआ के खरियारीपुरवा के कुछेक लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 19 जून को जब गोप्पा ने मुख्यालय के बोरिंग कराने गए दो युवकों मिथलेश और संदीप सिंह को पकड़कर फिरौती मांगी तो गौरी ने मध्यस्थता कर दोनों को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन शागिर्द से गुरु बनने की चाह के कारण गोप्पा ने गुरु गौरी को भी भला बुरा कह दिया था।
बिना फायरिंग पकड़े जाने से पूरी सच्चाई जानने को लोग बेताब थे। खंडेहा, हनुमानगंज, लालता रोड़ से लेकर सरधुआ के खरियारीपुरवा के कुछेक लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 19 जून को जब गोप्पा ने मुख्यालय के बोरिंग कराने गए दो युवकों मिथलेश और संदीप सिंह को पकड़कर फिरौती मांगी तो गौरी ने मध्यस्थता कर दोनों को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन शागिर्द से गुरु बनने की चाह के कारण गोप्पा ने गुरु गौरी को भी भला बुरा कह दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
डेमो
इसके बाद से ही गौरी ने गोप्पा गैंग के सदस्य धोनी उर्फ महेंद्र से मिलकर पूरी कहानी रची और इसका फायदा एसटीएफ को मिला। इस मामले में एसटीएफ के किसी भी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की। सब यही कहते रहे कि गोप्पा भागने की फिराक में था। उसे मुखबिर की सूचना पर बंदूक समेत पकड़ा गया है। गैंग के बाकी सदस्य भागने में सफल रहे।