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शर्मनाक: पुलिस की लीपापोती में बच गए मां-बेटे की मौत के गुनहगार, नो एंट्री में घुसे ट्रक से कुचलकर गई थी जान

Tue, 10 Aug 2021 02:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Tue, 10 Aug 2021 02:35 PM IST
सार

एफआईआर, ट्रैफिक इंस्पेक्टर की जांच और कंट्रोलरूम में हादसे का समय अलग-अलग मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे फाइल बंद कर दी गई।

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culprits of the death of mother-son who were saved in the police cover
यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर के नरौना चौराहे पर नो एंट्री में घुसे ट्रक से कुचलकर मां-बेटे की मौत की जांच में पुलिस की लीपापोती से गुनहगार बच निकले। पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान यह साक्ष्य नहीं मिला कि जिस समय हादसा हुआ, उस दौरान नो एंट्री लागू थी।
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एफआईआर, ट्रैफिक इंस्पेक्टर की जांच और कंट्रोलरूम में हादसे का समय अलग-अलग मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी, जिससे फाइल बंद कर दी गई। इधर, एडीसीपी ट्रैफिक निखिल पाठक ने जांच अफसरों के सुपुर्द कर दी है। सोमवार को उनका तबादला भी हो गया।
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14 जुलाई को ट्रक से कुचलकर शिक्षिका ऊषा देवी और उनके बेटे सौरभ की मौत हो गई थी। एफआईआर के मुताबिक हादसा शाम 5:15 बजे हुआ था। ये समय बेहद अहम था, क्योंकि नो एंट्री में दौड़ रहे ट्रक का जो पास था, उसकी समयावधि शाम पांच बजे तक की थी।
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डीसीपी ट्रैफिक ने मामले की जांच एडीसीपी ट्रैफिक को दी। जांच में ट्रैफिक इंस्पेक्टर पूर्वी की रिपोर्ट भी शामिल की गई। आसपास के लोगों के बयान लिए गए। कंट्रोलरूम से सूचना का समय मांगा गया। ये समय शाम 4:20 से 5:20 बजे तक का आया। इससे हादसे का वास्तविक समय नहीं पता चला। इस वजह से फाइल बंद कर दी गई है।

बाल की खाल उधेड़ती रही पुलिस
हादसे के दिन आईटीएमएस और स्मार्ट सिटी के तहत नरौना चौराहे पर लगाए गए कैमरे बंद थे। इससे हादसे की फुटेज नहीं मिली। अगर सीसीटीवी फुटेज मिल जाती तो हादसे का समय स्पष्ट हो जाता। उधर, पुलिस की जांच में सामने आया कि बाइक चला रहे सौरभ के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था। यह बताकर भी पुलिस में मामले को कमजोर करने की कोशिश की।

जांच में हादसे का समय स्पष्ट नहीं हो सका। इसलिए जांच परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। दो बार तथ्यों को जुटाया गया। अब फाइल बंद कर दी गई है। जांच रिपोर्ट अफसरों को भेज दी गई है।
निखिल पाठक, पूर्व एडीसीपी ट्रैफिक 

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