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नोट के चक्कर में भगवान को भूले लोग, सिद्धपीठों में लगने वाली भीड़ गायब
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 12 Nov 2016 04:51 PM IST
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मंदिरों में सन्नाटा
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पुराने नोट बदलने और नए नोट हासिल करने के चक्कर में लोग भगवान को भूल बैठे हैं। अर्थ के फेर में आस्था में कमी नजर आ रही है। सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाले मंदिरों में सन्नाटे सा माहौल है। फतेहपुर के मंदिरों में शीश नवाने वालों की संख्या में काफी कमी आई है। मंदिरों में उमड़ने वाला भक्तों का हुजूम बैंक और डाकघर मेें नजर आ रहा है। फतेहपुर के सिद्धपीठ तांबेश्वर मंदिर में जुटने वाले भक्तों की संख्या में कमी देखने को मिल रही है।
सोमवार को यहां पर हजारों भक्तों का रेला जुटा रहा, मंगलवार की आधी रात से पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद हर एक शख्स का ध्यान बैंक और डाकखाने पर लगने की वजह से यहां भक्तों की संख्या लगातार गिरती जा रही है।
मंदिर के मुख्य पुजारी पं. राघवेंद्र पांडेय कहते हैं कि इन दिनों भक्त बहुत कम आ रहे हैं। पहले तो चढ़ावा भी चढ़ता था लेकिन इस दौरान इसमें भी कमी आई है। खुल्ला न होने की वजह से दानपात्र में रुपया तो दूर प्रसाद तक नहीं चढ़ पा रहा है। ऐसा ही हाल सिद्धपीठ कालिकन मंदिर का है। लगभग हर दिन यहां 300 से 400 लोग शीश नवाने पहुंचते हैं।
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जारी पं. अशोक दीक्षित कहते हैं कि शुक्रवार और सोमवार को कम से कम 600 भक्त दर्शन को आते रहे हैं। गुरुवार को महज 50 से 60 भक्त ही पहुंचे।
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सोमवार को यहां पर हजारों भक्तों का रेला जुटा रहा, मंगलवार की आधी रात से पांच सौ और हजार के नोट बंद होने के बाद हर एक शख्स का ध्यान बैंक और डाकखाने पर लगने की वजह से यहां भक्तों की संख्या लगातार गिरती जा रही है।
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मंदिर के मुख्य पुजारी पं. राघवेंद्र पांडेय कहते हैं कि इन दिनों भक्त बहुत कम आ रहे हैं। पहले तो चढ़ावा भी चढ़ता था लेकिन इस दौरान इसमें भी कमी आई है। खुल्ला न होने की वजह से दानपात्र में रुपया तो दूर प्रसाद तक नहीं चढ़ पा रहा है। ऐसा ही हाल सिद्धपीठ कालिकन मंदिर का है। लगभग हर दिन यहां 300 से 400 लोग शीश नवाने पहुंचते हैं।
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जारी पं. अशोक दीक्षित कहते हैं कि शुक्रवार और सोमवार को कम से कम 600 भक्त दर्शन को आते रहे हैं। गुरुवार को महज 50 से 60 भक्त ही पहुंचे।