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पुलिस का खेल: कुछ पैसाें के लिए महिला की हत्या काे अात्महत्या में बदला
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 09 May 2018 10:49 AM IST
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उन्नाव मेें हत्या के दर्ज मुकदमें में मृतका के मृत्युपूर्व दिए गए बयान को छिपाकर पुलिस ने आत्महत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया। सुनवाई के दौरान मृतका के पिता ने विवेचक रुपये लेकर साक्ष्यों को छिपाने का आरोप लगाया। जिला जज ने विवेचना करने वाले दोनों दरोगा को 17 मई को न्यायालय में तलब किया है।
मामला बीघापुर थाने का है। बीघापुर थानाक्षेत्र के कर्ण गांव निवासी माधुरी पत्नी बिंद्रा प्रसाद की अगस्त 2016 को सुराल में आग से जल गई थी। घटना के बाद पति उसे छोड़कर भाग गया। जानकारी होने पर उन्नाव सदर कोतवाली के गांव सरोसी निवासी मृतका के पिता गोकुल ने बेटी की ससुराल पहुंचा और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पिता ने पुलिस को दहेज के लिए जलाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी।
लेकिन पुलिस ने आत्महत्या की बात कहते हुए पहरे इलाज कराने की बात कहकर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इलाज के दौरान ही सितंबर 2016 में माधुरी की मौत हो गई। दरोगा ने मृतका के मौत से पहले बयान भी लिए जिसमें उसने पति तेल डालकर उसे जलाने की बात कही थी। लेकिन बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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इसपर पिता ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय के निर्देश पर बीघापुर थाना पुलिस ने मृतका के पति बिंदा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। विवेचक अरुण कुमार मिश्रा ने मुकदमे की विवेचना में माधुरी के मृत्यु पूर्व दिए गए बयान को विवेचना में शामिल नहीं किया। इसी दौरान अरुण कुमार मिश्रा का लखनऊ तबादला हो गया और विवेचना दरोगा प्रशांत कुमार भदौरिया को दी गई।
प्रशांत ने विवेचना में हत्या के मामले को आत्महत्या में तरमीम करके आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला जज विकार अहमद अंसारी कर रहे हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान मृतका के पिता गोकुल ने न्यायलय में आरोप लगाया कि विवेचक दरोगा ने आरोपियों से रुपये लेकर साक्ष्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। न्यायाधीश ने विवेचना करने वाले दोनों दरोगाओं को 17 मई को न्यायालय में तलब किया है। न्यायाधीश ने दोनों के उपस्थित न होने पर दोनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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मामला बीघापुर थाने का है। बीघापुर थानाक्षेत्र के कर्ण गांव निवासी माधुरी पत्नी बिंद्रा प्रसाद की अगस्त 2016 को सुराल में आग से जल गई थी। घटना के बाद पति उसे छोड़कर भाग गया। जानकारी होने पर उन्नाव सदर कोतवाली के गांव सरोसी निवासी मृतका के पिता गोकुल ने बेटी की ससुराल पहुंचा और उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पिता ने पुलिस को दहेज के लिए जलाने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी।
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लेकिन पुलिस ने आत्महत्या की बात कहते हुए पहरे इलाज कराने की बात कहकर मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इलाज के दौरान ही सितंबर 2016 में माधुरी की मौत हो गई। दरोगा ने मृतका के मौत से पहले बयान भी लिए जिसमें उसने पति तेल डालकर उसे जलाने की बात कही थी। लेकिन बार-बार चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
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इसपर पिता ने न्यायालय की शरण ली और न्यायालय के निर्देश पर बीघापुर थाना पुलिस ने मृतका के पति बिंदा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया। विवेचक अरुण कुमार मिश्रा ने मुकदमे की विवेचना में माधुरी के मृत्यु पूर्व दिए गए बयान को विवेचना में शामिल नहीं किया। इसी दौरान अरुण कुमार मिश्रा का लखनऊ तबादला हो गया और विवेचना दरोगा प्रशांत कुमार भदौरिया को दी गई।
प्रशांत ने विवेचना में हत्या के मामले को आत्महत्या में तरमीम करके आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। मुकदमे की सुनवाई करते हुए जिला जज विकार अहमद अंसारी कर रहे हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान मृतका के पिता गोकुल ने न्यायलय में आरोप लगाया कि विवेचक दरोगा ने आरोपियों से रुपये लेकर साक्ष्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। न्यायाधीश ने विवेचना करने वाले दोनों दरोगाओं को 17 मई को न्यायालय में तलब किया है। न्यायाधीश ने दोनों के उपस्थित न होने पर दोनों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी है।