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सिपाही की मौत पर अफसरों से हाथापाई
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Tue, 22 Sep 2015 02:43 AM IST
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वीआईपी ड्यूटी से लौटते समय ललिलपुर के ताल बेहट के एक ढाबे में अपनी ही कारबाइन से गोली चलने से हुई मौत के बाद सोमवार को सीओ लाइन जगदीश सिंह के गनर अरुण कुमार यादव का शव पुलिस लाइन लाया गया तो परिजनों ने बवाल कर दिया। परिजनों और साथी सिपाहियों ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर सीओ को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर नारेबाजी की।
पुलिस अफसरों से हाथापाई आैर शव रखकर सड़क जाम करने का प्रयास किया। आईजी, एसएसपी समेत सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंचे और किसी तरह उत्तेजित लोगों को शांत कराया। करीब छह घंटे तक चले हंगामे के बाद शव अरुण के गृह जनपद औरैया भेज दिया गया। आरोपी सीओ को लाइन से हटा दिया गया है।
रविवार को ललितपुर के चिगलौआ गांव में पॉवर प्लांट परियोजना के शिलान्यास समारोह में कानपुर पुलिस लाइन के सीओ जगदीश सिंह की ड्यूटी लगी थी। सीओ ड्यूटी के बाद अपने गनर सिपाही बाबरपुर औरैया के असेंडा गांव निवासी अरुण कुमार यादव (25) के साथ देर शाम कानपुर लौट रहे थे। ललितपुर के ताल बेहट के पास ढाबे में सीओ ने गाड़ी रुकवाई और अरुण को चाय लेने भेजा। अरुण चाय का आर्डर देकर ढाबे के बाथरूम में चला गया। वहां गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
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देर रात परिजनों ने झांसी पोस्टमार्टम हाउस में सीओ जगदीश सिंह से हाथापाई की। झांसी में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार सुबह करीब आठ बजे अरुण का शव कानपुर पुलिस लाइन लाया गया तो परिजनों और साथी सिपाहियों ने सीओ पर अरुण को प्रताड़ित करने और उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए हंगामा, नारेबाजी की। अफसरों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया तो वे और भड़क गए और अफसरों से हाथापाई की।
कर्नलगंज सीओ विवेक त्रिपाठी की कैप और चश्मा गिर गया। कई पुलिस वालों की वर्दी खिंच गई तो कई के बैज खुल गए। हालात बेकाबू होने पर आईजी, एसएसपी सभी एसपी और भारी फोर्स मौके पर पहुंची। सपा विधायक सतीश निगम भी आए और सबको समझाया। एसपी की अगुवाई में कमेटी गठित कर प्रकरण की जांच कराने और कमेटी में परिवार के लोगों को शामिल करने का आश्वासन दिया। फिर भी लोग नहीं माने।
आक्रोशित लोगों ने दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस लाइन के सामने शव रखकर जाम लगाने की कोशिश की तो एसएसपी और फोर्स ने बमुश्किल रोका। फिर डीआईजी और एसएसपी ने परिजनों से बात करके उन्हें मना लिया। इसके बाद पुलिस अफसरों ने सिपाही को सलामी और पुष्पाजंलि दी। फिर शव को आईजी, डीआईजी, एसएसपी समेत सभी पुलिस अफसरों ने कंधा देकर पुलिस गाड़ी में रखवा कर औरैया भेज दिया। वहां मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार होगा।
हादसा मान रही पुलिस
सीओ के गनर अरुण की मौत के मामले को ललितपुर जिले की पुलिस प्रथम दृष्टया हादसा मानकर चल रही है। हालांकि, जांच के मद्देनजर घटनास्थल को सील कर दिया गया है। घटनास्थल का अध्ययन करने के बाद पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अचानक कार्बाइन के चलने से मौत का है, क्योंकि गोलियां चलने का डायरेक्शन नीचे से ऊपर की ओर है। माना जा रहा है कि धक्का लगने अथवा गिरने की वजह से कारबाइन चली होगी, क्योंकि यदि सुसाइड के लिए कारबाइन को चलाने के लिए ट्रिगर दबाया होता तो एक गोली चलने के बाद ही उसका हाथ ट्रिगर से छूट गया होता। जबकि इस मामले में गनर की सरकारी कारबाइन से चली पांच गोलियां उसके पेट से आरपार निकल गईं।
कहा था बेटा ड्यूटी छोड़कर घर आ जा, नहीं आया
बेटे अरुण की मौत ने पिता रिटायर्ड नायब सूबेदार लक्ष्मी नारायण यादव को तोड़ कर रख दिया। इकलौते कमाऊ बेटे के शव से लिपटकर वे फफक पड़े। बोले, बेटा कहा था सीओ ज्यादा परेशान कर रहे हैं तो ड्यूटी छोड़कर घर आ जा। पर, तू नहीं आया। अब हम कैसे जिएंगे। लक्ष्मी नारायण के साथ उनकी पत्नी कुसुमा देवी, बहू (सिपाही की पत्नी) संगीता और बड़े भाई राजू को रोता-बिलखता देख वहां मौजूद लोगों की आंखे छलक उठीं। औरैया के बाबरपुर थानाक्षेत्र के असेनडा गांव निवासी लक्ष्मी नारायण सपा नेता हैं।
वह बाबरपुर नगर पंचायत के सभासद और सपा के इटावा लोकसभा प्रभारी रहे हैं। लक्ष्मी नारायण के मुताबिक अरुण ने उन्हें फोन करके बताया था कि सीओ जगदीश सिंह शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। व्यक्तिगत काम कराते हैं। शनिवार को अरुण को फोन आया तो उन्होंने सपा विधायक प्रदीप यादव को पूरा वाकया बताया था। विधायक ने आईजी से बात करने का भरोसा दिया था। रविवार दोपहर अरुण ने फिर फोन कर अपनी परेशानी बताई। दोपहर में करीब तीन बजे बहू संगीता ने अरुण को फोन किया तो अरुण ने कहकर फोन काट दिया था कि सीओ सामने खड़े हैं, फोन करते देख लेंगे तो डांटेंगे।
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पुलिस अफसरों से हाथापाई आैर शव रखकर सड़क जाम करने का प्रयास किया। आईजी, एसएसपी समेत सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहुंचे और किसी तरह उत्तेजित लोगों को शांत कराया। करीब छह घंटे तक चले हंगामे के बाद शव अरुण के गृह जनपद औरैया भेज दिया गया। आरोपी सीओ को लाइन से हटा दिया गया है।
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रविवार को ललितपुर के चिगलौआ गांव में पॉवर प्लांट परियोजना के शिलान्यास समारोह में कानपुर पुलिस लाइन के सीओ जगदीश सिंह की ड्यूटी लगी थी। सीओ ड्यूटी के बाद अपने गनर सिपाही बाबरपुर औरैया के असेंडा गांव निवासी अरुण कुमार यादव (25) के साथ देर शाम कानपुर लौट रहे थे। ललितपुर के ताल बेहट के पास ढाबे में सीओ ने गाड़ी रुकवाई और अरुण को चाय लेने भेजा। अरुण चाय का आर्डर देकर ढाबे के बाथरूम में चला गया। वहां गोली लगने से उसकी मौत हो गई।
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देर रात परिजनों ने झांसी पोस्टमार्टम हाउस में सीओ जगदीश सिंह से हाथापाई की। झांसी में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार सुबह करीब आठ बजे अरुण का शव कानपुर पुलिस लाइन लाया गया तो परिजनों और साथी सिपाहियों ने सीओ पर अरुण को प्रताड़ित करने और उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए हंगामा, नारेबाजी की। अफसरों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया तो वे और भड़क गए और अफसरों से हाथापाई की।
कर्नलगंज सीओ विवेक त्रिपाठी की कैप और चश्मा गिर गया। कई पुलिस वालों की वर्दी खिंच गई तो कई के बैज खुल गए। हालात बेकाबू होने पर आईजी, एसएसपी सभी एसपी और भारी फोर्स मौके पर पहुंची। सपा विधायक सतीश निगम भी आए और सबको समझाया। एसपी की अगुवाई में कमेटी गठित कर प्रकरण की जांच कराने और कमेटी में परिवार के लोगों को शामिल करने का आश्वासन दिया। फिर भी लोग नहीं माने।
आक्रोशित लोगों ने दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस लाइन के सामने शव रखकर जाम लगाने की कोशिश की तो एसएसपी और फोर्स ने बमुश्किल रोका। फिर डीआईजी और एसएसपी ने परिजनों से बात करके उन्हें मना लिया। इसके बाद पुलिस अफसरों ने सिपाही को सलामी और पुष्पाजंलि दी। फिर शव को आईजी, डीआईजी, एसएसपी समेत सभी पुलिस अफसरों ने कंधा देकर पुलिस गाड़ी में रखवा कर औरैया भेज दिया। वहां मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार होगा।
हादसा मान रही पुलिस
सीओ के गनर अरुण की मौत के मामले को ललितपुर जिले की पुलिस प्रथम दृष्टया हादसा मानकर चल रही है। हालांकि, जांच के मद्देनजर घटनास्थल को सील कर दिया गया है। घटनास्थल का अध्ययन करने के बाद पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला अचानक कार्बाइन के चलने से मौत का है, क्योंकि गोलियां चलने का डायरेक्शन नीचे से ऊपर की ओर है। माना जा रहा है कि धक्का लगने अथवा गिरने की वजह से कारबाइन चली होगी, क्योंकि यदि सुसाइड के लिए कारबाइन को चलाने के लिए ट्रिगर दबाया होता तो एक गोली चलने के बाद ही उसका हाथ ट्रिगर से छूट गया होता। जबकि इस मामले में गनर की सरकारी कारबाइन से चली पांच गोलियां उसके पेट से आरपार निकल गईं।
कहा था बेटा ड्यूटी छोड़कर घर आ जा, नहीं आया
बेटे अरुण की मौत ने पिता रिटायर्ड नायब सूबेदार लक्ष्मी नारायण यादव को तोड़ कर रख दिया। इकलौते कमाऊ बेटे के शव से लिपटकर वे फफक पड़े। बोले, बेटा कहा था सीओ ज्यादा परेशान कर रहे हैं तो ड्यूटी छोड़कर घर आ जा। पर, तू नहीं आया। अब हम कैसे जिएंगे। लक्ष्मी नारायण के साथ उनकी पत्नी कुसुमा देवी, बहू (सिपाही की पत्नी) संगीता और बड़े भाई राजू को रोता-बिलखता देख वहां मौजूद लोगों की आंखे छलक उठीं। औरैया के बाबरपुर थानाक्षेत्र के असेनडा गांव निवासी लक्ष्मी नारायण सपा नेता हैं।
वह बाबरपुर नगर पंचायत के सभासद और सपा के इटावा लोकसभा प्रभारी रहे हैं। लक्ष्मी नारायण के मुताबिक अरुण ने उन्हें फोन करके बताया था कि सीओ जगदीश सिंह शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। व्यक्तिगत काम कराते हैं। शनिवार को अरुण को फोन आया तो उन्होंने सपा विधायक प्रदीप यादव को पूरा वाकया बताया था। विधायक ने आईजी से बात करने का भरोसा दिया था। रविवार दोपहर अरुण ने फिर फोन कर अपनी परेशानी बताई। दोपहर में करीब तीन बजे बहू संगीता ने अरुण को फोन किया तो अरुण ने कहकर फोन काट दिया था कि सीओ सामने खड़े हैं, फोन करते देख लेंगे तो डांटेंगे।