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कानपुर: ऑनलाइन गेम अनलॉक कराने में गंवाए पांच लाख, ये गेम खेलता था छात्र, हो जाएं सतर्क
Thu, 02 Sep 2021 08:36 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 02 Sep 2021 08:36 PM IST
सार
छात्र फ्री फायर गेम ऑनलाइन खेलता था। करीब तीन सप्ताह पहले दो स्टेज पार करने के बाद उसका गेम लॉक हो गया। छात्र के मुताबिक गेम को कैसे अनलॉक किया जाए इसके लिए उसने यूट्यूब पर सर्च किया। एक वीडियो के माध्यम से हेल्पलाइन नंबर मिला। उससे उसने संपर्क किया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कानपुर के नवाबगंज में 9वीं के छात्र ने ऑनलाइन गेम के फेर में पिता के खाते से पांच लाख रुपये गंवा दिए। जब उसके परिजनों को पता चला तो छात्र ने सच्चाई बता दी। बुधवार को छात्र के पिता ने केस दर्ज कराया। क्राइम ब्रांच व साइबर सेल की टीम ने मामले की जांच शुरू की है।
फिलहाल जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई है उनको फ्रीज कराया गया है। नवाबगंज के श्रीराम कृष्ण एस्टेट निवासी चंद्रशेखर लेबर डिपार्टमेंट में स्टेनो हैं। उनका बेटा 9वीं कक्षा में है। छात्र फ्री फायर गेम ऑनलाइन खेलता था। करीब तीन सप्ताह पहले दो स्टेज पार करने के बाद उसका गेम लॉक हो गया।
छात्र के मुताबिक गेम को कैसे अनलॉक किया जाए इसके लिए उसने यूट्यूब पर सर्च किया। एक वीडियो के माध्यम से हेल्पलाइन नंबर मिला। उससे उसने संपर्क किया। जिस शख्स ने फोन पर बात की उसने दावा किया वह गेम अनलॉक कर देगा।
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फिलहाल जिन खातों में रकम ट्रांसफर की गई है उनको फ्रीज कराया गया है। नवाबगंज के श्रीराम कृष्ण एस्टेट निवासी चंद्रशेखर लेबर डिपार्टमेंट में स्टेनो हैं। उनका बेटा 9वीं कक्षा में है। छात्र फ्री फायर गेम ऑनलाइन खेलता था। करीब तीन सप्ताह पहले दो स्टेज पार करने के बाद उसका गेम लॉक हो गया।
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छात्र के मुताबिक गेम को कैसे अनलॉक किया जाए इसके लिए उसने यूट्यूब पर सर्च किया। एक वीडियो के माध्यम से हेल्पलाइन नंबर मिला। उससे उसने संपर्क किया। जिस शख्स ने फोन पर बात की उसने दावा किया वह गेम अनलॉक कर देगा।
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इसके लिए 750 रुपये लगेंगे। छात्र ने पिता के मोबाइल से रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद दूसरी बार में भी इतनी रकम ट्रांसफर की। बाद में साइबर ठग ने 20 दिनों के भीतर एक के बाद एक ट्रांजेक्शन कर कुल पांच लाख रुपये खाते से उड़ा दिए।
पिता के मोबाइल से डिलीट कर देता था मैसेज
जितनी बार भी पेमेंट किया जाता था उसका एक मैसेज छात्र के पिता के मोबाइल पर आता था। पिता को न पता चले इसलिए छात्र वह मैसेज डिलीट कर देता था। यही वजह है कि चंद्रशेखर को पैसे निकलने की जानकारी ही नहीं हो सकी। जब पता चला कि उन्होंने बेटे को फटकार लगाई और पुलिस को सूचना दी।
पिता के मोबाइल से डिलीट कर देता था मैसेज
जितनी बार भी पेमेंट किया जाता था उसका एक मैसेज छात्र के पिता के मोबाइल पर आता था। पिता को न पता चले इसलिए छात्र वह मैसेज डिलीट कर देता था। यही वजह है कि चंद्रशेखर को पैसे निकलने की जानकारी ही नहीं हो सकी। जब पता चला कि उन्होंने बेटे को फटकार लगाई और पुलिस को सूचना दी।
सावधानी बरतें
- गेम के लती होने से बचें
- अभिभावक बच्चों की निगरानी करें, जिससे वह गेम के लती न हों
- गेम खेलने के दौरान कोई पेमेंट को कहा जाए तो कतई न करें
- गूगल या यूट्यूब की मदद से किसी भी कंपनी, गेम्स आदि संबंधी हेल्पलाइन नंबर न तलाशें
- गेमिंग में पैसों के लालच में आकर किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- गेमिंग में अगर कोई स्टेज पार करने के लिए शर्त रखी जाए तो उसको बिल्कुल भी न करें
- गेम के लती होने से बचें
- अभिभावक बच्चों की निगरानी करें, जिससे वह गेम के लती न हों
- गेम खेलने के दौरान कोई पेमेंट को कहा जाए तो कतई न करें
- गूगल या यूट्यूब की मदद से किसी भी कंपनी, गेम्स आदि संबंधी हेल्पलाइन नंबर न तलाशें
- गेमिंग में पैसों के लालच में आकर किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- गेमिंग में अगर कोई स्टेज पार करने के लिए शर्त रखी जाए तो उसको बिल्कुल भी न करें
क्राइम ब्रांच तफ्तीश कर रही है। कुछ अहम जानकारी मिली है। उम्मीद है कि साइबर ठग जल्द गिरफ्त में होगा। अभिभावक को सतर्क रहने की जरूरत है। जिससे बच्चे इस तरह के जाल में न फंसें। - आनंद प्रकाश तिवारी, एडिशनल सीपी