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इस बच्ची की दास्तां सुनकर छलक आएंगे आंसू

Sat, 10 Sep 2016 01:56 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 10 Sep 2016 01:56 PM IST
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Hearing the stories of the child will tear spilled
झाड़ियों में मिली नवजात बच्ची - फोटो : अमर उजाला
सरकार बेटी बचाओ के लिए तमाम अभियान चला रही हो लेकिन इस कुप्रथा पर लगाम नहीं लग पा रहा है। आज भी कई घर ऐसे हैं जहां बेटी के जन्म लेते ही या तो कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है या किसी सड़क के किनारे। ऐसा ही एक शर्मनाक मामला कन्नौज के तालग्राम से सामने आया है। यहां एक नवजात बच्ची को किसी ने शनिवार तड़के झाड़ियों में फेंक दिया। जिस महिला ने बच्ची काे पाया उसने पहले ताे बच्ची काे अपनाने की बात कही, लेकिन जैसे ही उसे मेडिकल परीक्षण  के बाद बच्ची की विकलांगता का मालूम चला उसने भी ठुकरा दिया। फिलहाल बच्ची को सरकारी अस्पताल में रखा गया है। यहां से उसे अनाथाश्रम भेजा जाएगा। 
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शांति ने बच्ची को गोद लेने से किया इंकार
डॉक्टरी चेकअप के बाद जब शांति को यह पता चला कि नवजात बच्ची के दोनों पैर खराब हैं वह गंभीर विकलांगता की शिकार है तो उसने भी बच्ची को अपनाने से मना कर दिया। शांति के दो बेटे और एक बेटी है। उसने कहा कि वह पहले से गरीबी झेल रही है इस विकलांग बच्ची को अपनाने के बाद उसका महंगा इलाज कराने पड़ेगा जो उसके परिवार के लिए नामुमकिन है। पुलिस ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती करा दिया है। हालत सुधरने के बाद उसे अनाथाश्रम भेजने की तैयारी की जा रही है। 
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थम नहीं रहीं नवजात बच्ची मिलने की घटनाएं
नवजात बच्चियों के लावारिस हालत में मिलने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कानपुर, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हदरोई, कानपुर देहात में हर दूसरे दिन किसी न किसी नवजात के मिलने की सूचनाएं आती हैं। ऐसे में शर्म की बात यह है कि सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद बेटी बचाओ के अभियान फेल साबित क्यों हो रहे हैं, निर्मोही लोग जो बच्चों को लावारिस हालत में फेंक जाते हैं उनके खिलाफ कोई ऐक्शन क्यों नहीं होता। शर्म आनी चाहिए ऐसे माओं को जो नौ महीनों तक बच्ची को पालने के बाद उसे इस कदर दर-दर की ठोकरें खाने को फेंक देते हैं।
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