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कहीं आप भी ताे नहीं है इन चाेरी करने वाली कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले सामान के खरीददार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 06 Mar 2018 09:56 PM IST
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यूपी के कानपुर शहर में जीएसटी की आड़ में शहर की तीन बड़ी कंपनियों ने पिछले वर्षों की तुलना में कम टैक्स जमा किया है। तीनों कंपनियों की ओर से दाखिल टैक्स में 40 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इनकी बिक्री में कोई कमी नहीं आई है।
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स्टेट जीएसटी मुख्यालय अपने स्तर पर भी प्रदेश की बड़ी कंपनियों के रिटर्न की जांच करवा रही है। रैंडम जांच में सामने आया है कि शहर में पारले जी बिस्कुट, कोलगेट पामोलिव और जेके सीमेंट बनाने वाली कंपनियों ने इन उत्पादों के मद में बहुत कम टैक्स जमा किया है। ये तीनों कंपनियां स्टेट जीएसटी के कानपुर कार्यालय में रजिस्टर्ड हैं। जेके सीमेंट कारपोरेट विंग में रजिस्टर्ड है जबकि पारले जी और कोलगेट पामोलिव खंड कार्यालयों में रजिस्टर्ड हैं।
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इन कंपनियों के रिटर्न की समय पर जांच न हो पाने पर कमिश्नर ने शहर के अफसरों को फटकार लगाई है। कमिश्नर ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कानपुर जोनल कार्यालय में बड़ी कंपनियों के रिटर्न की मॉनीटरिंग में निष्क्रियता बरती जा रही है। कमिश्नर ने तीनों कंपनियों के रिटर्न की जांच के साथ ही शहर की अन्य बड़ी फर्मों और कंपनियों के रिटर्न की समीक्षा के आदेश दिए हैं।
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एडिशनल कमिश्नर पीके मिश्र का कहना है कि इन तीनों बड़ी कंपनियों के रिटर्न की जांच के अलावा अन्य फर्मों और कंपनियों के रिटर्न की भी समीक्षा शुरू की गई है। मुख्यालय के निर्देशानुसार देखा जाएगा कि इन कंपनियों के कारोबार में ऐसा क्या बदलाव हुआ जिसकी वजह से रिटर्न में इतनी भारी गिरावट हुई। यदि कोई खास तथ्य नहीं मिले तो टैक्स चोरी मानकर कार्रवाई की जाएगी। जीएसटी की आड़ में इन दिनों टैक्स चोरी चरम पर है।
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बाजार में मंदी का हवाला देकर उद्यमी उत्पादन और बिक्री का आंकड़ा कम दिखा रहे हैं। हकीकत ये है कि बाजार में मांग यथावत है। बिक्री भरपूर है। बावजूद इसके बीते वित्तीय वर्ष के मुकाबले इस बार टैक्स जमा नहीं हो रहा है। जीएसटी आधारित बिलिंग का प्रतिशत भी बहुत कम है। सरकार का मानना है कि जीएसटी की पेचीदगियों को समझने के लिए दी गई राहत का कुछ लोग नाजायज फायदा उठा रहे हैं। न तो पब्लिक को राहत मिल रही है न ही सरकार को राजस्व।