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करंट लगाया, भूखा रखकर मारा

Sun, 07 Aug 2016 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ कानपुर Updated Sun, 07 Aug 2016 12:44 AM IST
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Current installed, hit by starvation
जाजमऊ हिंदू कब्रिस्तान में दफनाने से पहले मृतक कमल के पिता किशन लाल को 3.90 लाख रुपये का चेक देते एडीएम सिटी अविनाश सिंह। - फोटो : amarujala
अहिरवां पुलिस चौकी में गुरुवार को कमल बाल्मीकि ने पुलिस की यातना से त्रस्त होकर फांसी लगाई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुलिस की हैवानियत सामने आई है। पूरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ें तो समझ में आता है कि पुलिस की थर्ड डिग्री ऐसी होती है कि कोई भी फांसी लगा लेगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत से पहले कमल को बहुत यातनाएं दी गईं।
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दोनों कानों के पीछे मिले बड़े घाव बता रहे थे कि कमल के कानों में करंट लगाने के लिए क्लिप लगाई गई होगी। करंट दौड़ने पर जब कमल छटपटाता होगा तो क्लिप से ये घाव हुए होंगे। चकेरी की अहिरवां चौकी में चोरी के आरोप में पकड़ कर लाए गए कमल बाल्मीकि (26) का शव गुरुवार सुबह आरक्षी बैरक में पंखे से लटका मिला था। इसके बाद भारी बवाल हुआ था।
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एसओ चकेरी जीवाराम यादव, अहिरवां चौकी इंचार्ज समेत पूरी चौकी सस्पेंड की गई। चकेरी थाने की स्पेशल टीम के एक सिपाही जनार्दन को भी सस्पेंड किया गया है। गुरुवार देर रात ढाई बजे के बाद तक कमल के शव का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार कमल के दाहिने पुट्ठे पर एक बड़ा घाव मिला है।

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यह पुलिस की पिटाई से हुआ है। कानों में करंट लगाने का पता चला है। इन घावों से भी ज्यादा दुख देता है कि कमल के पेट में सिर्फ 12 एमएल तरल पदार्थ मिला है। जिससे स्पष्ट है कि टार्चर के 12 घंटे पहले से कमल को सिर्फ पानी दिया गया था, खाने को कुछ भी नहीं दिया गया। कमल के शरीर पर सभी चोटें मृत्यु पूर्व की थीं। 


पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक लूट कबूलवाने के लिए कमल को खाली पेट रखा गया और बुरी तरह पीटा गया। बुधवार रात 12 और गुरुवार दिन में 12 बजे के बीच कमल की मौत हुई। गले में रस्सी का तिरछा निशान साबित करता है कि कमल फंदे पर लटका था। अब सवाल ये है कि अहिरवां चौकी मेें रस्सी कहां से आई। कमल जब फंदा लगा रहा था तो चौकी के पुलिसकर्मी कहां थे। 

‘पानी में मुंह डुबो-डुबो कर तड़पाया’
कानपुर (ब्यूरो)। कमल बाल्मीकि के भाई निर्मल ने पुलिसिया टार्चर की पूरी कहानी खोलकर रख दी। जाजमऊ की टेनरी में लेबर का काम करने वाले निर्मल ने बताया कि चकेरी पुलिस की स्पेशल टीम ने उसे और उसके बड़े भाई कमल को मंगलवार को उनके घर के पास से उठाया था। 

निर्मल के मुताबिक पहली रात उन्हें कोयलानगर चौकी में रखा गया था। चौकी में सिपाहियों ने एक ड्रम में पानी भरकर रखा था और करंट वाली मशीन रखी थी। एक बार पानी में मुंह डुबोते थे फिर मुंह में कपड़ा ठूंसकर करंट लगाते थे। पानी में मुंह डूबने पर हम लोग छटपटाते थे तो सिपाही पीछे से डंडा मारते थे। ये यातना घंटों चली और लाख मांगने पर भी पानी की एक बूंद नहीं दी गई। पुलिस उनसे टीवी एक्ट्रेस के घर चोरी कबूलने को कह रही थी। निर्मल के मुताबिक अगली रात उसे और कमल को लाल बंगला चौकी में रखा गया।

वहां भी घंटों टार्चर चलता रहा। टार्चर से टूटकर कमल चोरी कबूलने को तैयार हो गया था लेकिन पुलिस उससे माल बरामदगी के लिए गहने और पैसे का इंतजाम करने को कह रही थी। कमल ने कहा कि जब चोरी की ही नहीं तो गहने और नगदी कहां से लाऊं। घर बेचकर भी इतनी रकम नहीं जुटा सकता। इसके बाद बुधवार रात पुलिस कमल को कहीं और ले गई। गुरुवार सुबह 11 बजे पुलिस ने निर्मल को छोड़ दिया। निर्मल बदहवास हालत में घर पहुंचा और करीब ढाई बजे उसे कमल की मौत की जानकारी मिली।

इसके बाद वह सदमे में चला गया। निर्मल के अनुसार कमल की मौत के बाद ही घबराकर पुलिस ने उसे छोड़ा वर्ना उसे भी फर्जी मामले में फंसा देती। भाई मर गया तो मैं बच गया, यह कहकर निर्मल सुबकने लगा।

पोस्टमार्टम हाउस में भड़के परिजन
कानपुर (ब्यूरो)। अहिरवां पुलिस चौकी में कमल की मौत के बाद उपजा आक्रोश शुक्रवार सुबह से ही पोस्टमार्टम हाउस में दिखाई दे रहा था। कमल के रिश्तेदारों ने आरोपी सिपाही जनार्दन, पुलिस मुखबिरों और अन्य की गिरफ्तारी के लिए  हंगामा शुरू कर दिया। नेताओं के आने से माहौल तनावपूर्ण हो गया।

परिजन मुआवजा, सरकारी नौकरी, आवास और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।  कमल का पोस्टमार्टम तो गुरुवार देर रात हो चुका था लेकिन परिजन उसका शव नहीं उठा रहे थे। अफसरों के लाख समझाने पर परिजन शव ले जाने को राजी हुए।

पोस्टमार्टम हाउस में एसपी कंट्रोल रूम, एसपी ग्रामीण, सीओ कल्याणपुर, स्वरूपनगर, कर्नलगंज, सीसामऊ थाना पुलिस, कई सीओ-थानेदार मौजूद थे। मोर्चरी से कमल का शव बाहर आते ही उसकी मां रोते-रोते बेहोश हो गई। एडीएम सिटी अविनाश सिंह और एसपी पश्चिम सचींद्र पटेल ने पीड़ित परिवार से बात शुरू की। एडीएम सिटी ने कमल के पिता किशनलाल को 3.90 लाख रुपये का चेक दिया।

कांशीराम आवास योजना का मकान, प्रदेश सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन भी दिया। परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी दिलाने का भी भरोसा दिलाया। मांगें पूरी होने के बाद कमल का शव पोस्टमार्टम हाउस से ले जाया गया। शाम को जाजमऊ पुरानी चुंगी के पास डबका नाले के पास दफनाया गया। 

मजिस्ट्रेटी जांच, शासन को रिपोर्ट भेजी
अहिरवां चौकी में आत्महत्या करने वाले दलित कमल बाल्मीकि के मामले की मजिस्ट्रेटी जांच होगी। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने शुक्रवार को अपर नगर मजिस्ट्रेट (एसीएम)-2 को जांच देकर रिपोर्ट मांगी है। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी। जिलाधिकारी ने बताया कि मृतक के परिजनों को कांशीराम आवास दिलाया जाएगा।

संविदा पर नौकरी दिलाने की कोशिश होगी। मृतक के परिजनों को 8.25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। इसकी 50 फीसदी धनराशि सोमवार (8 अगस्त) तक मृतक के परिजनों के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। यह धनराशि आकस्मिक फंड से दी जा रही है। बकाया 50 फीसदी धनराशि मामले में अदालती फैसला आने के बाद दी जाती है।

राजू लौटा, पुलिस का तोता बना
कानपुर। अहिरवां चौकी में कमल के साथ जिस राजू मिस्त्री की मौत की अफवाह उड़ी थी, वो शुक्रवार दोपहर आ गया। 
सूत्रों के अनुसार एक विधायक के कहने पर अहिरवां चौकी से उसे गुरुवार सुबह छोड़ दिया गया था तो उसने पहले संजीव नगर स्थित ठेके पर दारू पी, इसके बाद फतेहपुर में रिक्शा चालक दोस्त के घर गया और वहीं सो गया। गुरुवार शाम वह पटेल नगर स्थित अपने घर पहुंचा तो मां ने पुलिस का डर दिखाकर भगा दिया।

इसके बाद वह घाटमपुर के निवादा स्थित उजागर गांव ससुराल पहुंचा और रात वहीं बिताई। राजू दोपहर 12 बजे पुलिस के पास आ गया था लेकिन मीडिया से उसे शाम 7 बजे मिलवाया गया। माना जा रहा है 5-6 घंटे में राजू को बयान रटाया गया। शाम को जब राजू मीडिया के सामने लाया गया तो महसूस हुआ कि वह रटाया बयान ही दे रहा है।



सरसौल प्रतिनिधि के मुताबिक बवाल से डरी पुलिस ने राजू के ससुराल में घुसने की हिम्मत नहीं जुटाई। पुलिस ने राजू के मामा विजय पाल का सहारा लिया, वह राजू को गांव से बाइक पर बैठाकर कुछ दूर तक ले आए, तब पुलिस ने उसे दबोचा। राजू की चोट के सवाल पर पुलिस चुप्पी साध गई।
 

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