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'बकरीद' का त्यौहार और बकरा बाजार में महंगाई की मार
डिजिटल/अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 10 Sep 2016 10:22 PM IST
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- फोटो : google
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बकरीद 13 को है। नई सड़क पर बकरा बाजार सज चुका है। आस-पास के जिलों के लोग अपने बकरों को बेचने बाजारों में आ चुके हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बकरीद में मोटे-ताजे बकरों की कमी है। कमजोर और महंगे बकरों की भरमार है। इसलिए लोग शहर से बकरा खरीदने के बजाय ग्रामीण इलाकों का रुख कर रहे हैं।
छह से 50 हजार रुपये तक बकरे
शहर की बकरा मार्केट में इस बार कम से कम छह हजार और अधिकतम 50 हजार रुपये कीमत के बकरे हैं। इनके दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब डेढ़ गुना ज्यादा हैं। भौंती, घाटमपुर, छिबरामऊ, गुरसहायगंज, सफीपुर, सरसौल, मंधना और शिवली समेत आसपास के जनपदों के ग्रामीण इलाकों के बकरा व्यवसायी शहर में खरीददारी कर रहे हैं।
मार्केट डाउन, कम हो रही खरीददारी
बकरा मार्केट का बाजार इन दिनों काफी डाउन है। इन दिनों रोजाना औसतन 700 से 800 बकरों की खरीद हो रही है। गुरसहायगंज के बकरा व्यसवायी मोहम्मद नफीस ने बताया कि दो दिन पहले 70 बकरे बेचने को लाए थे लेकिन अब तक आठ बकरे की बिके हैं। रविवार और सोमवार को मार्केट चढ़ने की उम्मीद है। इस बार लोग स्वयं से बकरों की कुर्बानी कराने के बजाय मदरसों से हिस्सा ले रहे हैं। हिस्से का मतलब मदरसों में रुपये देकर कुर्बानी कराने का जिम्मा उन्हें दे दिया जाता है।
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लग रहा जाम
बकरा मार्केट सड़क पर लगने की वजह से परेड से घंटाघर जाने वाले राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जाम के चलते दूसरा कोई रूट डायवर्जन भी ट्रैफिक विभाग ने नहीं किया है।
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छह से 50 हजार रुपये तक बकरे
शहर की बकरा मार्केट में इस बार कम से कम छह हजार और अधिकतम 50 हजार रुपये कीमत के बकरे हैं। इनके दाम पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब डेढ़ गुना ज्यादा हैं। भौंती, घाटमपुर, छिबरामऊ, गुरसहायगंज, सफीपुर, सरसौल, मंधना और शिवली समेत आसपास के जनपदों के ग्रामीण इलाकों के बकरा व्यवसायी शहर में खरीददारी कर रहे हैं।
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मार्केट डाउन, कम हो रही खरीददारी
बकरा मार्केट का बाजार इन दिनों काफी डाउन है। इन दिनों रोजाना औसतन 700 से 800 बकरों की खरीद हो रही है। गुरसहायगंज के बकरा व्यसवायी मोहम्मद नफीस ने बताया कि दो दिन पहले 70 बकरे बेचने को लाए थे लेकिन अब तक आठ बकरे की बिके हैं। रविवार और सोमवार को मार्केट चढ़ने की उम्मीद है। इस बार लोग स्वयं से बकरों की कुर्बानी कराने के बजाय मदरसों से हिस्सा ले रहे हैं। हिस्से का मतलब मदरसों में रुपये देकर कुर्बानी कराने का जिम्मा उन्हें दे दिया जाता है।
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लग रहा जाम
बकरा मार्केट सड़क पर लगने की वजह से परेड से घंटाघर जाने वाले राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जाम के चलते दूसरा कोई रूट डायवर्जन भी ट्रैफिक विभाग ने नहीं किया है।