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झूठी गवाही देने पर तीन को एक माह की सजा
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कानपुर देहात। घाटमपुर क्षेत्र के भदरस में 12 वर्ष पूर्व खेत में बकरी जाने पर हुई मारपीट के मामले में कोर्ट ने झूठी गवाही देने पर तीन लोगों को एक माह की सजा सुनाई है। जबकि, पांच-पांच सौ रुपये के अर्थ दंड भी लगाया है।
भदरस में 30 जनवरी 2009 को मारपीट की घटना हुई थी। वादी मुस्ताक ने लाला व फुरसत नियाजी आदि पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रकरण की सुनवाई सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार पांडेय की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। गवाही व जिरह में जमील, कमरुद्दीन और खलील के बयानों में विरोधाभास रहा। जमील ने घटना में बकरी की जानकारी से इनकार कर दिया। कहा कि उसके पास कोई बकरी नहीं है। कोई मारपीट नहीं हुई। कमरुद्दीन ने मारपीट की स्वीकरोक्ति की, लेकिन खुद की बकरियां खेत में जाने से मना किया। जबकि तीसरे गवाह खलील ने जिरह में कहा कि किसकी बकरी थी और किसका खेत था उसे नहीं पता। जबकि मुख्य परीक्षा में कहा कि मेरी बकरी मुस्ताक का खेत चर गई थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने बताया कि कोर्ट ने झूठी गवाही पाकर तीनों को सजा सुनाई है। अर्थ दंड जमा नहीं करने पर तीनों को पांच दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। संवाद
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भदरस में 30 जनवरी 2009 को मारपीट की घटना हुई थी। वादी मुस्ताक ने लाला व फुरसत नियाजी आदि पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रकरण की सुनवाई सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार पांडेय की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। गवाही व जिरह में जमील, कमरुद्दीन और खलील के बयानों में विरोधाभास रहा। जमील ने घटना में बकरी की जानकारी से इनकार कर दिया। कहा कि उसके पास कोई बकरी नहीं है। कोई मारपीट नहीं हुई। कमरुद्दीन ने मारपीट की स्वीकरोक्ति की, लेकिन खुद की बकरियां खेत में जाने से मना किया। जबकि तीसरे गवाह खलील ने जिरह में कहा कि किसकी बकरी थी और किसका खेत था उसे नहीं पता। जबकि मुख्य परीक्षा में कहा कि मेरी बकरी मुस्ताक का खेत चर गई थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने बताया कि कोर्ट ने झूठी गवाही पाकर तीनों को सजा सुनाई है। अर्थ दंड जमा नहीं करने पर तीनों को पांच दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। संवाद
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