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बिल्डर सही कर लें जानकारी, वरना पड़ेगा भारी
आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Mon, 25 Jun 2018 02:53 PM IST
सार
- रेरा ने बिल्डरों को दिया आखिरी मौका, पंजीकरण शुल्क की 20 फीसदी धनराशि देकर कर सकेंगे बदलाव
- रेरा की वेबसाइट पर बिल्डरों ने दी थी आधी-अधूरी जानकारी, तय समयसीमा में न किया सुधार तो भरनी होगी पेनाल्टी
- छह जुलाई तक सुधार लें प्रोजेक्ट जानकारी
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विस्तार
यूपी के कानपुर शहर में प्रोजेक्ट में फ्लैट-दुकान खरीदने वालों को बिल्डर झूठे वादों-दावों से धोखा नहीं दे सकेंगे। रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट (रेरा) के अंतर्गत बनी वेबसाइट पर पूर्व में दी गई प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारियों के सुधार के लिए बिल्डरों को 6 जुलाई तक का समय दिया गया है।
इस तारीख के बाद भी यदि वेबसाइट पर प्रोजेक्ट से जुड़ी आधी-अधूरी या गलत मिली तो बिल्डर पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी। रेरा की वेबसाइट पर बिल्डरों समेत केडीए, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी आदि सरकारी विभागों को अपने सभी जारी व नए प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराने के साथ उसकी पूरी जानकारी देना अनिवार्य है।
बीते साल वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का पंजीकरण शुरू हुआ था। इस दौरान बिल्डरों ने मनमर्जी से वेबसाइट पर आधी-अधूरी जानकारियां दे दीं। वेबसाइट पर एक बार अपलोड की गईं जानकारियों को बिल्डर या सरकारी विभाग खुद नहीं सुधार सकते हैं।
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इस तारीख के बाद भी यदि वेबसाइट पर प्रोजेक्ट से जुड़ी आधी-अधूरी या गलत मिली तो बिल्डर पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी। रेरा की वेबसाइट पर बिल्डरों समेत केडीए, आवास विकास परिषद, यूपीएसआईडीसी आदि सरकारी विभागों को अपने सभी जारी व नए प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराने के साथ उसकी पूरी जानकारी देना अनिवार्य है।
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बीते साल वेबसाइट पर प्रोजेक्ट का पंजीकरण शुरू हुआ था। इस दौरान बिल्डरों ने मनमर्जी से वेबसाइट पर आधी-अधूरी जानकारियां दे दीं। वेबसाइट पर एक बार अपलोड की गईं जानकारियों को बिल्डर या सरकारी विभाग खुद नहीं सुधार सकते हैं।
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रेरा लागू कराने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाली संस्था फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) ने इस पर एतराज जताया था। एओए ने शासन को पत्र लिखकर सही जानकारियां दिलाने की मांग की थी। बीते दिनों प्रमुख सचिव (आवास) व रेरा के अध्यक्ष नितिन रमेश गोकर्ण ने इससे संबंधित आदेश जारी किया।
इसके मुताबिक 7 मई 2018 तक प्रदेश में जारी सभी प्रोजेक्ट के लिए पंजीकरण की 20 फीसदी धनराशि के बराबर एडिटिंग फीस देकर दी गई जानकारियों को 6 जुलाई 2018 तक बदला जा सकता है। इसके बाद कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। 6 जुलाई के बाद पंजीकृत हुई प्रोजेक्ट की जानकारियों को पंजीकरण की पांच फीसदी धनराशि के बाहर फीस देकर एक सप्ताह के भीतर बदला जा सकेगा।
एओए के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि फ्लैट बुक कराते समय बिल्डर ग्राहकों को केडीए अप्रूव्ड होने, 24 घंटे बिजली मिलने, सुरक्षा, ग्रीन एरिया, बेसमेंट में पार्किंग, क्लब, पूल आदि सुविधाओं का सब्जबाग दिखाते हैं। पजेशन के समय फ्लैट खरीदार को ग्रीनबेल्ट की जगह फ्लैट बने मिलते हैं। बिल्डरों की वादाखिलाफी से बचाने के लिए रेरा और इसकी वेबसाइट बनाई गई। इसमें भी बिल्डरों ने आधी-अधूरी जानकारी दी। अब बिल्डरों को प्रोजेक्ट की जमीन से लेकर उससे जुड़ी सभी और सही जानकारियां देनी पड़ेंगी। इससे ग्राहकों को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी मिलेगी और वह सही फैसला ले सकेंगे।
इसके मुताबिक 7 मई 2018 तक प्रदेश में जारी सभी प्रोजेक्ट के लिए पंजीकरण की 20 फीसदी धनराशि के बराबर एडिटिंग फीस देकर दी गई जानकारियों को 6 जुलाई 2018 तक बदला जा सकता है। इसके बाद कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। 6 जुलाई के बाद पंजीकृत हुई प्रोजेक्ट की जानकारियों को पंजीकरण की पांच फीसदी धनराशि के बाहर फीस देकर एक सप्ताह के भीतर बदला जा सकेगा।
एओए के अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि फ्लैट बुक कराते समय बिल्डर ग्राहकों को केडीए अप्रूव्ड होने, 24 घंटे बिजली मिलने, सुरक्षा, ग्रीन एरिया, बेसमेंट में पार्किंग, क्लब, पूल आदि सुविधाओं का सब्जबाग दिखाते हैं। पजेशन के समय फ्लैट खरीदार को ग्रीनबेल्ट की जगह फ्लैट बने मिलते हैं। बिल्डरों की वादाखिलाफी से बचाने के लिए रेरा और इसकी वेबसाइट बनाई गई। इसमें भी बिल्डरों ने आधी-अधूरी जानकारी दी। अब बिल्डरों को प्रोजेक्ट की जमीन से लेकर उससे जुड़ी सभी और सही जानकारियां देनी पड़ेंगी। इससे ग्राहकों को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी मिलेगी और वह सही फैसला ले सकेंगे।
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क्रेडाई कानपुर चैप्टर के सचिव अनूप अस्थाना ने कहा कि शुरुआती दौर में रेरा की वेबसाइट पर सूचनाएं अपलोड करने में दिक्कतें आ रही थीं। इस पर डेवलपर्स ने शासन से सुधार करने और अतिरिक्त समय देने की मांग भी की थी। नई प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी।
यह होगी एडिटिंग फीस
रेरा में जारी परियोजनाओं का 31 अक्तूबर 2017 तक एक हजार रुपये, एक नवंबर से 30 नवंबर 2017 तक परियोजना लागत की पांच फीसदी और एक दिसंबर से 31 दिसंबर 2017 तक प्रोजेक्ट की कुल लागत की 10 फीसदी फीसद देकर पंजीकरण कराया जा सकता था। इसी लिहाज से एडिटिंग फीस तय होगी।
शहर में कुल 87 प्रोजेक्ट पंजीकृत
रेरा की वेबसाइट पर शहर में जारी प्रोजेक्ट के पंजीकरण थम गए हैं। अब तक कुल 87 प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराया गया है। 31 अक्तूबर 2017 को वेबसाइट पर शहर की 81 प्रोजेक्ट दिख रहे थे। बीते आठ माह में सिर्फ छह प्रोजेक्ट का पंजीकरण हुआ है। प्रदेश भर में 2398 प्रोजेक्ट का पंजीकरण हुआ है।
यह होगी एडिटिंग फीस
रेरा में जारी परियोजनाओं का 31 अक्तूबर 2017 तक एक हजार रुपये, एक नवंबर से 30 नवंबर 2017 तक परियोजना लागत की पांच फीसदी और एक दिसंबर से 31 दिसंबर 2017 तक प्रोजेक्ट की कुल लागत की 10 फीसदी फीसद देकर पंजीकरण कराया जा सकता था। इसी लिहाज से एडिटिंग फीस तय होगी।
शहर में कुल 87 प्रोजेक्ट पंजीकृत
रेरा की वेबसाइट पर शहर में जारी प्रोजेक्ट के पंजीकरण थम गए हैं। अब तक कुल 87 प्रोजेक्ट का पंजीकरण कराया गया है। 31 अक्तूबर 2017 को वेबसाइट पर शहर की 81 प्रोजेक्ट दिख रहे थे। बीते आठ माह में सिर्फ छह प्रोजेक्ट का पंजीकरण हुआ है। प्रदेश भर में 2398 प्रोजेक्ट का पंजीकरण हुआ है।