{"_id":"6612f8b3b573682f03008299","slug":"correct-information-about-basic-life-support-is-necessary-to-save-life-vice-chancellor-etawa-news-c-216-1-etw1002-110574-2024-04-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवन रक्षा के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट की सही जानकारी जरूरी : कुलपति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवन रक्षा के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट की सही जानकारी जरूरी : कुलपति
विज्ञापन
सैफई। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार सिंह ने बेसिक लाइफ सपोर्ट जन जागरूकता अभियान का शुभारंभ रैली को हरी झंडी दिखाकर किया। उन्होंने कहा कि जीवन रक्षा के लिए बेसिक लाइफ सपोर्ट की जानकारी होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यह जानकारी होने पर जब हमारे पास कोई मेडिकल उपकरण नहीं होता और किसी को अचानक हार्ट अटैक आ गया तो आप बिना उपकरणों के मरीज की जान बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कार्डियोपल्मोनरी रेसेसेटेशन (सीपीआर) आपको सही जानकारी है तो आप किसी की जान बचा सकते हैं। सीपीआर की जानकारी बताते हुए कहा कि यह एक तरह की छाती की मसाज प्रक्रिया है। मरीज को आर्टिफिशियल तरीके से ऑक्सीजन दी जाती है। ताकि ब्रेन को ऑक्सीजन मिलता रहे। डॉक्टरों ने बताया कि कार्डिएक अरेस्ट के समय सीपीआर से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। क्योंकि तीन मिनट तक ब्रेन को ऑक्सीजन नहीं मिला, तो ब्रेन काम करना बंद कर देता है। कार्डिक अरेस्ट के दौरान दिल की गति अचानक से एकदम थम जाती है।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के अनुसार, अस्पताल के बाहर कार्डियक अरेस्ट के लिए कुल मिलाकर मरीजों की बचने की दर लगभग 10 प्रतिशत हैं। हालांकि, अगर तुरंत सीपीआर शुरू कर दिया जाए तो बचने की दर में सुधार किया जा सकता है। इसीलिए जन-जागरुकता जरूरी है। कार्यक्रम का आयोजन एनेस्थीसिया विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. ऊषा शुक्ला के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान प्रतिकुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत, डीन प्रो .डाॅ. आदेश कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि यह जानकारी होने पर जब हमारे पास कोई मेडिकल उपकरण नहीं होता और किसी को अचानक हार्ट अटैक आ गया तो आप बिना उपकरणों के मरीज की जान बचा सकते हैं। उन्होंने बताया कि यदि कार्डियोपल्मोनरी रेसेसेटेशन (सीपीआर) आपको सही जानकारी है तो आप किसी की जान बचा सकते हैं। सीपीआर की जानकारी बताते हुए कहा कि यह एक तरह की छाती की मसाज प्रक्रिया है। मरीज को आर्टिफिशियल तरीके से ऑक्सीजन दी जाती है। ताकि ब्रेन को ऑक्सीजन मिलता रहे। डॉक्टरों ने बताया कि कार्डिएक अरेस्ट के समय सीपीआर से मरीज के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। क्योंकि तीन मिनट तक ब्रेन को ऑक्सीजन नहीं मिला, तो ब्रेन काम करना बंद कर देता है। कार्डिक अरेस्ट के दौरान दिल की गति अचानक से एकदम थम जाती है।
विज्ञापन
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के अनुसार, अस्पताल के बाहर कार्डियक अरेस्ट के लिए कुल मिलाकर मरीजों की बचने की दर लगभग 10 प्रतिशत हैं। हालांकि, अगर तुरंत सीपीआर शुरू कर दिया जाए तो बचने की दर में सुधार किया जा सकता है। इसीलिए जन-जागरुकता जरूरी है। कार्यक्रम का आयोजन एनेस्थीसिया विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. ऊषा शुक्ला के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान प्रतिकुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत, डीन प्रो .डाॅ. आदेश कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन