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सुहाना नहीं रहा सफर: रेल टिकटों की बुकिंग 75 फीसदी घटी, निरस्तीकरण चार गुना बढ़ा
Mon, 26 Apr 2021 12:27 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 26 Apr 2021 12:27 PM IST
सार
एक सप्ताह से कानपुर सेंट्रल के मुख्य आरक्षण केंद्र में रोजाना 50 हजार रुपये के टिकट बुक हो रहे हैं और दो से ढाई लाख रुपये के टिकट निरस्त कराकर लोग रिफंड ले रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरेाना काल में महाराष्ट्र, दिल्ली और गुजरात के शहरों से आने वालों की संख्या इतनी है कि ट्रेनों में खड़े होने की भी जगह भी बड़ी मुश्किल से मिल रही है। लेकिन, इन राज्यों को जाने वाली ट्रेनों में बुकिंग में भारी गिरावट आई है। बिगड़ते हालात और लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए कन्फर्म टिकट वाले भी आरक्षण निरस्त करा रहे हैं।
एक सप्ताह से कानपुर सेंट्रल के मुख्य आरक्षण केंद्र में रोजाना 50 हजार रुपये के टिकट बुक हो रहे हैं और दो से ढाई लाख रुपये के टिकट निरस्त कराकर लोग रिफंड ले रहे हैं। सेंट्रल स्टेशन के आरक्षण केंद्र पर टिकटों की बुकिंग में 75 फीसदी गिरावट और निरस्तीकरण में चार गुना की वृद्धि होने से नकदी का संकट खड़ा हो गया है।
ऐसे में आरक्षण केंद्र के काउंटरों पर बैठे सुपरवाइजरों को रोजाना रेलवे के कोषागार से नकदी लानी पड़ रही है, जिससे टिकट निरस्त कराने वालों को रिफंड किया जा सके। शुक्रवार को 53 हजार रुपये के टिकट दिनभर में बुक हुए और सवा दो लाख रुपये का रिफंड किया गया। इसी तरह शनिवार को 60 हजार रुपये के टिकटों की बुकिंग हुई और दो लाख दो लाख 28 हजार रुपये का रिफंड किया गया। करीब एक सप्ताह से यहां टिकट बुकिंग और निरस्तीकरण का यही अनुपात चल रहा है।
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एक सप्ताह से कानपुर सेंट्रल के मुख्य आरक्षण केंद्र में रोजाना 50 हजार रुपये के टिकट बुक हो रहे हैं और दो से ढाई लाख रुपये के टिकट निरस्त कराकर लोग रिफंड ले रहे हैं। सेंट्रल स्टेशन के आरक्षण केंद्र पर टिकटों की बुकिंग में 75 फीसदी गिरावट और निरस्तीकरण में चार गुना की वृद्धि होने से नकदी का संकट खड़ा हो गया है।
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ऐसे में आरक्षण केंद्र के काउंटरों पर बैठे सुपरवाइजरों को रोजाना रेलवे के कोषागार से नकदी लानी पड़ रही है, जिससे टिकट निरस्त कराने वालों को रिफंड किया जा सके। शुक्रवार को 53 हजार रुपये के टिकट दिनभर में बुक हुए और सवा दो लाख रुपये का रिफंड किया गया। इसी तरह शनिवार को 60 हजार रुपये के टिकटों की बुकिंग हुई और दो लाख दो लाख 28 हजार रुपये का रिफंड किया गया। करीब एक सप्ताह से यहां टिकट बुकिंग और निरस्तीकरण का यही अनुपात चल रहा है।
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टिकटों की बुकिंग सिर्फ उन शहरों की हो रही है, जो लोग वहां काम कर रहे हैं और पलायन कर घर जाना चाहते हैं। घूमने जाने वाले, नौकरी या मांगलिक कार्यक्रमों के लिए पहले से बुक टिकटों का रिफंड लिया जा रहा है। रेलवे के कोषागार में जमा धन वापस किया जा रहा है। काउंटरों पर नकदी की किल्लत हो जाती है।- बनवारी लाल, मुख्य टिकट पर्यवेक्षक, कानपुर सेंट्रल