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कोरोना संकट से चमकेगा रियल एस्टेट सेक्टर
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आदर्श त्रिपाठी कानपुर। जिस कोरोना संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है, बिल्डरों के मुताबिक वह रियल एस्टेट सेक्टर के लिए संजीवनी साबित होने वाला है। शहर के बिल्डरों ने इसकी खास वजह भी बताई है। उनके मुताबिक कोरोना महामारी के कारण लोगों के बीच सामाजिक दूरी रखने की चाहत बढ़ी है। इसके चलते लोग शहर के पुराने, घने बसे क्षेत्रों और गलियों से निकलकर अपार्टमेंट या बाहरी क्षेत्रों में स्थित सुरक्षात्मक रिहाइश का विकल्प अमल में लाना चाहते हैं। जिसके चलते बीते दो-तीन वर्षों से मंदी की चपेट में चल रहा रियल इस्टेट सेक्टर नए सिरे से उठ खड़ा होगा। बिल्डरों के मुताबिक सरकारी प्रोत्साहन पैकेज और बैंकों की ओर से कम दरों पर सहज आवासीय लोन दिए जाने के कारण लोग फ्लैट या प्लॉट खरीदेंगे। हालांकि बिल्डरों का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर को सुधरने में 6 माह से 1 साल का समय लग सकता है। बिल्डरों की बात कंफरडेशन ऑफ रीयल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) कानपुर चैप्टर के अध्यक्ष कमल चांडक ने कहा कि कोरोना महामारी ने दुनिया भर के लोगों की जीवन शैली और सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाने की भूमिका तैयार कर दी है। लॉक डाउन के कारण शहर के घनी इलाकों और गलियों में रहने वाले लोगों ने तमाम तरह की परेशानियां उठाई हैं। बड़ी संख्या में ऐसे लोग अपार्टमेंट या खुली जगह पर बने आवासीय क्षेत्रों में जाने की इच्छा रखते हैं। यही बात रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लाभकारी साबित होगी। घने बसे क्षेत्रों में भी निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है। 2020 के अंत तक रियल इस्टेट सेक्टर के सुधार की राह पर बढ़ने की उम्मीद है। कानपुर प्रमोटर्स एंड बिल्डर्स एसोसिएशन के सचिव अनूप अस्थाना ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर में निर्माण पूरा करने और पजेशन में 6 माह का अतिरिक्त समय रेरा की ओर से दिया गया है। सरकार की ओर से जारी आर्थिक पैकेज का भी लाभ सेक्टर को मिलेगा। कोरोना संकट से प्रॉपर्टी के लिहाज से तमाम विकल्प लोगों को मिलेंगे। आने वाले दौर में संपत्ति बेचने और खरीदने दोनों ही श्रेणी के लोगों की संख्या काफी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में इस सेक्टर में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। शहर में हर वर्ग की आर्थिक क्षमता और जरूरत के लिहाज से संपत्तियों की उपलब्धता आज भी है, भविष्य में और बढ़ेगी। हालांकि कीमतों में कमी आने की संभावना निराधार है। डॉल्फिन डेवलपर्स के निदेशक विश्वनाथ गुप्ता ने बताया कि रियल स्टेट सबसे बाद की चीज है। जब लोगों की आम जरूरतें पूरी होती हैं, तब वह संपत्ति की ओर ध्यान देते हैं। सरकार की ओर से जारी भारी भरकम आर्थिक पैकेज का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखेगा। सरकार ने परोक्ष रूप से तो इस पैकेज में रियल एस्टेट सेक्टर को कुछ नहीं दिया है। जिस भी सेक्टर को इस पैकेज का लाभ मिलेगा, उसकी तरक्की होगी। आर्थिक संपन्नता और व्यवसायिक गतिविधियां बढ़ेंगी तो इसका असर इस सेक्टर में खुद-ब-खुद दिखने लगेगा। शहर में खाली पड़े हैं करीब 10 हजार फ्लैट बीते 3 वर्षों की मंदी के कारण शहर में बनकर तैयार हुए करीब 10 हजार से अधिक फ्लैट खाली पड़े हुए हैं। इनमें से 5 हजार से अधिक फ्लैट अकेले केडीए के हैं। इसके अलावा आवास विकास परिषद के करीब 280 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध है। शहर के बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट में भी फ्लैट खाली पड़े हैं हालांकि मंदी के कारण निर्माण की संख्या में खासी कमी आई है।
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