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तो ऐसे लड़ेंगे कोरोना से जंग: वेंटिलेटर हैं तो स्टाफ नहीं, वार्डों में ऑक्सीजन पाइप लाइन नहीं, पर आश्वासन भरपूर

Fri, 31 Dec 2021 11:06 AM IST
शिखा पांडेय अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 31 Dec 2021 11:06 AM IST
सार

कोरोना संक्रमितों की संख्या अचानक बढ़ने लगे तो जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की कोविड लैब में स्टाफ ही नहीं है। लैब में इस वक्त अधिकतम दो-ढाई हजार जांच ही हो सकती है जबकि क्षमता 10 हजार की है। 

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Corona and preparations to deal with incomplete preparations third wave is possible but oxygen pipeline has not yet reached
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर

विस्तार

जनवरी में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना है पर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां अधूरी हैं। कोरोना की दो लहरें झेलने के बावजूद कानपुर के अस्पतालों में रोगियों के इलाज में संपूर्ण व्यवस्था नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग पूरे साल कोरोना से निपटने की तैयारी करता रहा है। इसके बाद भी नतीजा ढाक के तीन पात है। हैलट के सभी वार्डों में अभी ऑक्सीजन पाइप लाइन नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में रोगियों को ऑक्सीजन सिलिंडर से काम चलाना पड़ेगा। वेंटिलेटर तो आ गए हैं लेकिन इन्हें संचालित करने वाला स्टाफ नहीं है। एनआरएचएम से दूसरी लहर में जो आउटसोर्सिंग स्टाफ मिला था, उसे भी हटा दिया गया है।

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उर्सला में भी जांच की क्षमता कम है। दूसरी लहर में एनआरएचएम की ओर से दिए गए डेढ़ सौ आउटसोर्सिंग स्टाफ को हटा दिया गया है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के पास जूनियर डॉक्टर-1 का पूरा बैच नहीं है। दो महीने में जेआर-2 का कोर्स पूरा हो जाएगा। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के अलावा इमरजेंसी, ओटी और वार्डों की जिम्मेदारी जेआर-1 पर ही रहती है। अगर इस बीच लहर आ गई तो स्थिति संभालनी मुश्किल पड़ जाएगी। सीनियर रेजीडेंट की संख्या बहुत कम है। वहीं, दो सीएचसी में ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट लगने थे जो नहीं लग पाए। सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हो पाए हैं।

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कोरोना की तीसरी लहर के मद्देनजर शासन से स्टाफ मांगा गया है। सामान्य स्टाफ के साथ ही टेक्निकल स्टाफ की भी जरूरत है। कोविड लैब में भी स्टाफ की कमी है। स्टाफ मिलेगा, उसके बाद ही दूसरे जिलों के सैंपल की जांच हो पाएगी। वार्डों में ऑक्सीजन लाइन बिछाई जा रही है। -डॉ. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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सारी तैयारी की जा रही है। सीएचसी पर ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट का काम भी पूरा हो जाएगा। शासन की गाइडलाइन के अनुरूप तैयारी की गई है। तीसरी लहर को ध्यान में रखकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है। -डॉ. नैपाल सिंह, सीएमओ 

 

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इस साल अधूरे रहे ये काम

  • उर्सला के आईसीयू को मान्यता नहीं मिली, संसाधनों का टोटा
  • उर्सला की कार्डिएक यूनिट चालू नहीं हो पाई, पीआईसीयू के वेंटिलेटर का भी इस्तेमाल नहीं
  • उर्सला में सीटी स्कैन मशीन नहीं हुई, एमआरआई रिपोर्ट पढ़ने वाला रेडियोलॉजिस्ट नहीं
  • केपीएम में एक फिजीशियन की नियुक्ति नहीं हो पाई
  • जेके कैंसर इंस्टीट्यूट में स्टाफ की कमी से जांचें प्रभावित
  • कैंसर इंस्टीट्यूट की पैथोलॉजी में भी नहीं हो पा रहीं जांचें 
  • आंको सर्जन, आंको फिजीशियन की नहीं हुई तैनाती
  • हैलट में सीटी स्कैन और एमआरआई जांच शुरू नहीं हो पाई
  • मेडिकल कॉलेज में इंडोक्रोनोलॉजिस्ट नहीं
  • हैलट में वार्ड-50 का काम पूरा नहीं हो पाया
  • पीएमएसएसवाई मल्टी सुपर स्पेशिएलटी हॉस्पिटल का काम अधूरा, शुरू नहीं हुआ
  • सीएचसी में कोरोना रोगियों के लिए वार्ड नहीं बन पाए
  • सीएचसी पर पैथोलॉजिकल जांचों की सुविधा नहीं
  • जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में ओमिक्रॉन की जांच शुरू नहीं हो पाई
  • कार्डियोलॉजी में लिवर ट्रांसप्लांट का प्रोजेक्ट शासन स्तर पर अटका है
  • हैलट में नए बर्न वार्ड नहीं बन पाए
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