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कोऑपरेटिव बैंक भी टीडीएस की जद में
अमर उजाला कानपुर
Updated Fri, 06 Mar 2015 02:24 AM IST
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कानपुर। काले धन का बेतहाशा इस्तेमाल और मनमाने तरीके से बैंकिंग
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गतिविधियों के संचालन को देखते हुए इस बार आम बजट में कोऑपरेटिव (सहकारी)
बैंकों को भी टीडीएस विभाग की जद में लाया गया है। आयकर अधिनियम में संशोधन
करके कोऑपरेटिव बैंकों में होने वाले फिक्स डिपॉजिट (एफडी) और रिकरिंग
डिपॉजिट (आरडी) के ब्याज पर टीडीएस अदा करना होगा। साथ ही सामान्य करदाता
की तरह इनकम टैक्स रिटर्न भी दाखिल करना होगा। इससे इन बैंकों में जमा होने
वाली रकम विभाग की जानकारी में रहेगी।
हाल ही में यूसीसी बैंक में हुई वित्तीय अनियमितताओं के चलते उसका लाइसेंस खारिज होने से हजारों ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। कुछ यही हाल अन्य सहकारी बैंकों का भी है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक आयकर विभाग के तमाम प्रावधानों से छूट मिलने के चलते एफडी और आरडी पर दिए जाने वाले ब्याज में टीडीएस की कटौती नहीं की जाती थी। इसके चलते तमाम लोग अपना काला धन यहां निवेश कर देते थे। ऐसी तमाम जानकारियां आयकर विभाग तक न पहुंचने के चलते बैंक मनमानी करते थे। इसी को देखते हुए इस बार के बजट में आयकर अधिनियम की धारा 194-ए में एक महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि कोऑपरेटिव बैंक अपने ग्राहकों द्वारा जमा की गई एफडी और आरडी के ब्याज पर टीडीएस काटेंगे। यह भी व्यवस्था की गई है कि विभिन्न शाखाओं में अलग-अलग एफडी कराकर ब्याज लेने की दशा में पूरे ब्याज का आकलन करके टीडीएस काटा जाएगा। सभी कोऑपरेटिव बैंक अब नियमित रूप से अपना टीडीएस रिटर्न भी आयकर विभाग में दाखिल करेंगे। इससे आयकर विभाग ऐसी जमा धनराशियों पर नजर रखेगा, जो बेनामी हैं या विभाग से छिपाकर अर्जित की गई हैं। वहीं कोऑपरेटिव मूवमेंट पर विपरीत असर न पड़े इसे देखते हुए यह इंतजाम भी किया गया है कि यदि कोऑपरेटिव बैंक किसी सोसाइटी को लोन देगी तो टीडीएस कटौती नहीं होगी।
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एमवी एक्ट के क्लेम पर भी टीडीएस
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत विभिन्न मामलों में मिलने वाले क्लेम के ब्याज की राशि पर भी टीडीएस कटौती की जाएगी। ताजा व्यवस्था के तहत ऐसे मामले आएंगे, जिनमें केस देरी से निपटने के चलते बीमा कंपनी ब्याज समेत रकम अदा करती है। अब ब्याज की राशि पर टीडीएस कटौती की जाएगी। हालांकि इसमें न्यूनतम धनराशि की सीमा पचास हजार रखी गई है।
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कोऑपरेटिव बैंकों की बुरी दशा और ग्राहकों के साथ हो रही धोखाधड़ी के तमाम मामले लगातार पेश हो रहे हैं। ऐसे में इन्हें टीडीएस की जद में लाने से कालेधन का प्रवाह रुकेगा। बजट में किए गए इस प्रावधान से आम ग्राहकों का ही हित होगा।
एडवोकेट मो. सुहैल अहमद, आयकर सलाहकार
हाल ही में यूसीसी बैंक में हुई वित्तीय अनियमितताओं के चलते उसका लाइसेंस खारिज होने से हजारों ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। कुछ यही हाल अन्य सहकारी बैंकों का भी है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक आयकर विभाग के तमाम प्रावधानों से छूट मिलने के चलते एफडी और आरडी पर दिए जाने वाले ब्याज में टीडीएस की कटौती नहीं की जाती थी। इसके चलते तमाम लोग अपना काला धन यहां निवेश कर देते थे। ऐसी तमाम जानकारियां आयकर विभाग तक न पहुंचने के चलते बैंक मनमानी करते थे। इसी को देखते हुए इस बार के बजट में आयकर अधिनियम की धारा 194-ए में एक महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि कोऑपरेटिव बैंक अपने ग्राहकों द्वारा जमा की गई एफडी और आरडी के ब्याज पर टीडीएस काटेंगे। यह भी व्यवस्था की गई है कि विभिन्न शाखाओं में अलग-अलग एफडी कराकर ब्याज लेने की दशा में पूरे ब्याज का आकलन करके टीडीएस काटा जाएगा। सभी कोऑपरेटिव बैंक अब नियमित रूप से अपना टीडीएस रिटर्न भी आयकर विभाग में दाखिल करेंगे। इससे आयकर विभाग ऐसी जमा धनराशियों पर नजर रखेगा, जो बेनामी हैं या विभाग से छिपाकर अर्जित की गई हैं। वहीं कोऑपरेटिव मूवमेंट पर विपरीत असर न पड़े इसे देखते हुए यह इंतजाम भी किया गया है कि यदि कोऑपरेटिव बैंक किसी सोसाइटी को लोन देगी तो टीडीएस कटौती नहीं होगी।
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एमवी एक्ट के क्लेम पर भी टीडीएस
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत विभिन्न मामलों में मिलने वाले क्लेम के ब्याज की राशि पर भी टीडीएस कटौती की जाएगी। ताजा व्यवस्था के तहत ऐसे मामले आएंगे, जिनमें केस देरी से निपटने के चलते बीमा कंपनी ब्याज समेत रकम अदा करती है। अब ब्याज की राशि पर टीडीएस कटौती की जाएगी। हालांकि इसमें न्यूनतम धनराशि की सीमा पचास हजार रखी गई है।
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कोऑपरेटिव बैंकों की बुरी दशा और ग्राहकों के साथ हो रही धोखाधड़ी के तमाम मामले लगातार पेश हो रहे हैं। ऐसे में इन्हें टीडीएस की जद में लाने से कालेधन का प्रवाह रुकेगा। बजट में किए गए इस प्रावधान से आम ग्राहकों का ही हित होगा।
एडवोकेट मो. सुहैल अहमद, आयकर सलाहकार