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Kanpur News: गैस और दर्द की दवा लगातार से खाने से गुर्दे होते खराब
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कानपुर। गैस, एसिडिटी, दर्द की दवा खाने से गुर्दे खराब होते हैं। एसजीपीजीआई के पूर्व गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि आठ सप्ताह लगातार दवा खाने से गुर्दों खराब होने लगते हैं। अगर जरूरी हो तो बीच में गैप करके ये दवाएं लें। उन्होंने बताया कि कुपोषित गर्भवतियों के कम वजन के पैदा होने वाले बच्चों के गुर्दे खराब होने का खतरा होता है। मां के कुपोषण से बच्चे के गुर्दे छोटे हो जाते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित यूपी एपीकॉन-2025 के दूसरे और अंतिम दिन वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता ने क्रॉनिक किडनी डिजीज और नवीनतम उपचार विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 20 फीसदी रोगियों के गुर्दे दर्द की दवा खाने से खराब होते हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि 10 में एक व्यक्ति को गुर्दे की बीमारी है। यह संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही खानपान में गड़बड़ी से कुपोषण बढ़ रहा है। गुर्दे की बीमारी में तकलीफ नहीं होती, इससे रोगी देर में अस्पताल पहुंचते हैं।
उन्होंने बताया कि रोगियों के लिए डायलिसिस कराने से बेहतर है कि गुर्दा प्रत्यारोपण कराएं। डॉ. गुप्ता का कहना है कि दक्षिण भारत में ब्रेन डेड रोगियों का गुर्दा दान बढ़ा है। एक ब्रेन डेड रोगी के गुर्दा दान से दो रोगियों की जान बच सकती है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित यूपी एपीकॉन-2025 के दूसरे और अंतिम दिन वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता ने क्रॉनिक किडनी डिजीज और नवीनतम उपचार विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 20 फीसदी रोगियों के गुर्दे दर्द की दवा खाने से खराब होते हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि 10 में एक व्यक्ति को गुर्दे की बीमारी है। यह संख्या बढ़ रही है। इसके साथ ही खानपान में गड़बड़ी से कुपोषण बढ़ रहा है। गुर्दे की बीमारी में तकलीफ नहीं होती, इससे रोगी देर में अस्पताल पहुंचते हैं।
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उन्होंने बताया कि रोगियों के लिए डायलिसिस कराने से बेहतर है कि गुर्दा प्रत्यारोपण कराएं। डॉ. गुप्ता का कहना है कि दक्षिण भारत में ब्रेन डेड रोगियों का गुर्दा दान बढ़ा है। एक ब्रेन डेड रोगी के गुर्दा दान से दो रोगियों की जान बच सकती है।
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