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अधिक डीएपी खरीदने वालों की जांच के लिए समिति गठित, पांच अधिकारियों को 10 ब्लॉकों में जांच का जिम्मा
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कानपुर देहात। रबी के सीजन में डीएपी की सर्वाधिक खरीद करने वाले सौ किसानों की जांच के लिए समिति गठित कर दी गई है। इसमें पांच अधिकारियों को दस ब्लॉकों में स्थित खाद की दुकान व सहकारी समितियों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
गेहूं, लाही व आलू की बुआई में किसानों को डीएपी की किल्लत से जूझना पड़ा। समितियों में लाइन लगानी पड़ी, वहीं निजी दुकानदारों ने अधिक दाम में डीएपी बेची। शासन तक ये मुद्दा पहुंचा। इसके लिए डीएपी की कालाबाजारी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
इसकी जड़ तक जाने के लिए शासन ने प्रत्येक जिले में सर्वाधिक खरीद करने वाले सौ किसानों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी दस ब्लॉकों में जांच के लिए पांच जिला स्तरीय अधिकारियों को नामित कर दिया है।
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इसमें उप निदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी, जिला कृषि रक्षा इकाई अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हर अधिकारी दो ब्लॉकों की निजी दुकानों के साथ सहकारी समितियों में जांच करेंगे।
सबसे अधिक डीएपी लेने वाले किसानों को चिह्नित कर उनके नाम दर्ज भूमि, ली गई डीएपी, बुआई की गई फसल का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर किसी किसान ने निर्धारित जमीन से अधिक डीएपी प्राप्त की है तो विक्रेता और किसान के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डीएपी की सर्वाधिक खरीद करने वाले सौ किसानों की जांच के लिए अधिकारी नामित कर दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - जितेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
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गेहूं, लाही व आलू की बुआई में किसानों को डीएपी की किल्लत से जूझना पड़ा। समितियों में लाइन लगानी पड़ी, वहीं निजी दुकानदारों ने अधिक दाम में डीएपी बेची। शासन तक ये मुद्दा पहुंचा। इसके लिए डीएपी की कालाबाजारी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
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इसकी जड़ तक जाने के लिए शासन ने प्रत्येक जिले में सर्वाधिक खरीद करने वाले सौ किसानों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने सभी दस ब्लॉकों में जांच के लिए पांच जिला स्तरीय अधिकारियों को नामित कर दिया है।
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इसमें उप निदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी, जिला कृषि रक्षा इकाई अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी व भूमि संरक्षण अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हर अधिकारी दो ब्लॉकों की निजी दुकानों के साथ सहकारी समितियों में जांच करेंगे।
सबसे अधिक डीएपी लेने वाले किसानों को चिह्नित कर उनके नाम दर्ज भूमि, ली गई डीएपी, बुआई की गई फसल का सत्यापन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर किसी किसान ने निर्धारित जमीन से अधिक डीएपी प्राप्त की है तो विक्रेता और किसान के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डीएपी की सर्वाधिक खरीद करने वाले सौ किसानों की जांच के लिए अधिकारी नामित कर दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद सही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - जितेंद्र प्रताप सिंह, डीएम