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Kanpur News: पोल खुलने के डर से शिक्षकों का आंकड़ा छिपा रहे कॉलेज

Wed, 22 Jul 2026 01:58 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 01:58 AM IST
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Colleges are hiding teacher data for fear of exposure.
कानपुर। स्ववित्तपोषित कॉलेजों के शिक्षकों और उनके आश्रितों को निशुल्क इलाज मुहैया कराने के लिए मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू हुई है, लेकिन कॉलेजों का प्रबंधन पोल खुलने के चक्कर में पोर्टल पर डाटा उपलब्ध नहीं करा रहा। आरोप है कि कॉलेज शिक्षकों की संख्या अधिक दर्शाते हैं जबकि बुलाते आधे ही शिक्षकों को हैं। इस वजह से आंकड़ा फीड करने में कतरा रहे हैं। शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराने के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुल सचिव राकेश कुमार मिश्रा ने कॉलेजों को पत्र लिखा है। स्ववित्तपोषित कॉलेज शिक्षक संघ ने शिक्षकों से डाटा फीड कराने की अपील की है।
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छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की संख्या लगभग 600 है, जिनमें से आधे से अधिक स्ववित्तपोषित कॉलेज हैं। इन स्ववित्तपोषित कॉलेजों में से 50 फीसदी अनुमोदित स्ववित्तपोषित शिक्षकों का ब्याेरा कुलसचिव को नहीं भेज रहे हैं। इस वजह से कैशलेस मेडिकल सुविधा का लाभ स्ववित्तपोषित शिक्षकों को नहीं मिल पा रहा है। कानपुर विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. अखंड प्रताप सिंह का कहना है कि अगर इस पर सख्ती नहीं हुई तो काफी बड़ी संख्या में मेडिकल सुविधा का लाभ स्ववित्तपोषित शिक्षकों को नहीं मिल पाएगा। संघ के समस्त पदाधिकारी विभिन्न महाविद्यालयों के प्रबंधक और प्राचायों से लगातार बात कर रहे हैं।
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पात्र शिक्षकों के आश्रितों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना के पात्रों को आयुष्मान योजना की तरह ही लाभ मिलेगा। उन्हें योजना का कार्ड दिया जाएगा। सीएसजेएमयू से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में दो हजार शिक्षक हैं। उनके आश्रितों को भी लाभ मिलेगा। संघ के महामंत्री अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक योजना में आयुष्मान की तरह पांच लाख की लिमिट होगी।
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स्ववित्तपोषित कॉलेजों को ब्योरा भेजने के लिए कई बार पत्र दिया जा चुका है। कैशलेस योजना के लिए शिक्षक आवेदन करते हैं। प्राचार्य के सत्यापन के बाद ब्योरा विश्वविद्यालय के पास भेजा जाता है। विश्वविद्यालय अपने पास उपलब्ध रिकार्ड से उसका मिलान करता है। योजना के लिए सत्यापित कर देता है। कॉलेजों से रिकार्ड आने पर ही सत्यापन कार्य होगा।
- राकेश कुमार मिश्रा, कुलसचिव, सीएसएजेएमयू
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