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इस आईएस की सादगी के सभी कायल
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मत्रों व परिजनों के साथ आईएएस योगेंद्र सिंह। संवाद
- फोटो : UNNAO
गंजमुरादाबाद। बिहार के समस्तीपुर में जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह की सादगी व ईमानदारी सोशल मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रही है। 35 महीनों तक नालंदा के डीएम रहे योगेंद्र का चार दिन पहले समस्तीपुर स्थानांतरण हुआ था। योेगेंद्र ने अपना बैग उठाया और स्टेशन पहुंचे। खुद ही लाइन में लगकर समस्तीपुर का टिकट लिया और ट्रेन में बैठकर नए कार्यस्थल पर पहुंच गए। योगेंद्र सिंह गंजमुरादाबाद विकासखंड के छोटे से गांव हरईपुर के मूल निवासी हैं। उन्होंने प्राइमरी पाठशाला में पढ़ाई की थी। अपने बेटे की सादगी की पूरे क्षेत्र में चर्चा है।
तीन हजार आबादी वाले गांव में साधारण किसान परिवार में वर्ष 1990 में जन्मे योगेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी पाठशाला में हुई। हाईस्कूल की शिक्षा अटवा वैक स्थित विवेकानंद इंटर कॉलेज और इंटर मल्लावां के बीएन इंटर कॉलेज से किया। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली के जेएनयू से एमए की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2002 में पिता जय सिंह का कैंसर से निधन हो गया था। इसके बाद बेटे को पढ़ाने की जिम्मेदारी मां श्यामा देवी ने उठाई। मात्र तीन बीघा खेती से वह परिवार के साथ बेटे की पढ़ाई का खर्च भी उठाती रहीं। इसके बाद भी आर्थिक संकट गहराया तो योगेंद्र ने लखनऊ में रहकर पढ़ाई के साथ बच्चों को कोचिंग पढ़ाना शुरू कर दिया। फिर सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2012 में आईएएस चुने गए और उन्हें बिहार कैडर मिला।
योगेंद्र सिंह का विवाह 2018 में पुरवावां जिला हरदोई निवासी नेहा के साथ हुआ। नेहा गृहणी हैं। पत्नी व मां योगेंद्र के साथ रहती हैं। एक पुत्र नेयस है। हरईपुर गांव में उनका पैतृक घर है। इसी 15 दिसंबर को योगेंद्र अपने चचेरे भाई आशू की शादी में गांव आए थे। ग्रामीणों में हमेशा उनकी ईमानदारी, शालीनता, सहजता और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा होती रहती है। गांव के युवाओं के लिए वह एक प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं।
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तीन हजार आबादी वाले गांव में साधारण किसान परिवार में वर्ष 1990 में जन्मे योगेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी पाठशाला में हुई। हाईस्कूल की शिक्षा अटवा वैक स्थित विवेकानंद इंटर कॉलेज और इंटर मल्लावां के बीएन इंटर कॉलेज से किया। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली के जेएनयू से एमए की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2002 में पिता जय सिंह का कैंसर से निधन हो गया था। इसके बाद बेटे को पढ़ाने की जिम्मेदारी मां श्यामा देवी ने उठाई। मात्र तीन बीघा खेती से वह परिवार के साथ बेटे की पढ़ाई का खर्च भी उठाती रहीं। इसके बाद भी आर्थिक संकट गहराया तो योगेंद्र ने लखनऊ में रहकर पढ़ाई के साथ बच्चों को कोचिंग पढ़ाना शुरू कर दिया। फिर सिविल परीक्षा की तैयारी शुरू की। वर्ष 2012 में आईएएस चुने गए और उन्हें बिहार कैडर मिला।
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योगेंद्र सिंह का विवाह 2018 में पुरवावां जिला हरदोई निवासी नेहा के साथ हुआ। नेहा गृहणी हैं। पत्नी व मां योगेंद्र के साथ रहती हैं। एक पुत्र नेयस है। हरईपुर गांव में उनका पैतृक घर है। इसी 15 दिसंबर को योगेंद्र अपने चचेरे भाई आशू की शादी में गांव आए थे। ग्रामीणों में हमेशा उनकी ईमानदारी, शालीनता, सहजता और कर्तव्यनिष्ठा की चर्चा होती रहती है। गांव के युवाओं के लिए वह एक प्रेरणाश्रोत बने हुए हैं।
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