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तेंदुआ, रीछ व बंदर की मौत से वन विभाग में मचा हड़कंप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट से नहीं गई जान
Tue, 26 Mar 2019 12:02 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 26 Mar 2019 12:02 AM IST
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जांच के लिए टीम के साथ पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट के प्रस्तावित नेशनल पार्क में एक साथ तीन जानवर तेंदुआ, रीछ व बंदर की मौत की घटना से पूरे प्रदेश के वन विभाग में हड़कंप मचा है। सोमवार को लखनऊ, कानपुर, बांदा, बरेली, चित्रकूट, सतना व पन्ना के विभागीय अधिकारियों की टीम मानिकपुर के जंगल निही गांव के पास घटनास्थल पहुंची।
टीम पूरे दिन तीनाें जानवराें की मौत के कारण जानने को माथा पच्ची करती रही लेकिन किसी नतीजे में नहीं पहुंची। आखिर में प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय ने कहा कि जंगल में सिर्फ तीन जानवरों की मौत हुई है। फिलहाल मौत के कारण की सही जानकारी नहीं है। पांच डाक्टरों की टीम पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट देंगे। पूरी घटना की जांच के लिए टास्क टीम का गठन किया गया है।
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टीम पूरे दिन तीनाें जानवराें की मौत के कारण जानने को माथा पच्ची करती रही लेकिन किसी नतीजे में नहीं पहुंची। आखिर में प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय ने कहा कि जंगल में सिर्फ तीन जानवरों की मौत हुई है। फिलहाल मौत के कारण की सही जानकारी नहीं है। पांच डाक्टरों की टीम पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट देंगे। पूरी घटना की जांच के लिए टास्क टीम का गठन किया गया है।
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घटना स्थल पहुंचकर पूरे मामले का जायजा लिया
जो एक सप्ताह में पूरी रिपोर्ट देगी। सोमवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय समेत मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी, वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा उत्कर्ष शुक्ला, वन संरक्षक बांदा केके सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी कैलाश प्रकाश, एसडीओ संजय अग्रवाल व वन रेंजर नफीस खान ने घटना स्थल पहुंचकर पूरे मामले का जायजा लिया है।
घटना स्थल पर बारीकी से छानबीन की। सभी ने गहनता से पूरे मामले की जांच को टास्क फोर्स टीम बनाई है। कहा कि आईवीआरआई के तहत जांच कराकर एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजी जाए। पोस्टमार्टम के लिए बरेली संस्था व चित्रकूट की टीम के डाक्टर पैनल में रहेंगे। मामले की एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई है।
घटना स्थल पर बारीकी से छानबीन की। सभी ने गहनता से पूरे मामले की जांच को टास्क फोर्स टीम बनाई है। कहा कि आईवीआरआई के तहत जांच कराकर एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजी जाए। पोस्टमार्टम के लिए बरेली संस्था व चित्रकूट की टीम के डाक्टर पैनल में रहेंगे। मामले की एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई है।
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जानवरों की मौत करंट से नहीं हुई है लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं
जंगल मेें छह घंटे से ज्यादा का समय व्यतीत करने के बाद मुख्यालय लौटी टीम के पास रिजल्ट के नाम पर सिर्फ इतना था कि इन जानवरों की मौत करंट से नहीं हुई है लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं है। तीनों शव एक सप्ताह से ज्यादा समय के हैं। वन विभाग कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में लखनऊ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने दावा किया कि तेंदुआ, रीछ व बंदर की मौत का कारण अप्राकृतिक है।
किसी के घायल या मारने से मौत नहीं है। करंट भी लगने की संभावना नहीं है क्योंकि शव मिलने वाले स्थल से सवा किमी दूर खेत व दो किमी दूर बस्ती है। आसपास कहीं से भी बिजली की तार भी नहीं गई है। मृत जानवरों के शव में झुलसने के सबूत भी नहीं दिख रहे। फिलहाल पूरी जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी के नेतृत्व में टास्क टीम बनाई गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
पोस्टमार्टम देर शाम को कराया जाएगा जिसमेें पांच डाक्टर की टीम होगी। प्रथम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण सही नहीं आ सकता क्योंकि मृत जानवरों के शरीर के कई अंग की जांच बाहर की लैब में होगी। यह भी लगता है कि इनका शिकार नहीं किया गया है क्याेंकि शव में कीडे़ व जानवर गोश्त खा गए हैं बाकी शरीर पड़ा है। यदि शिकारी इन्हें मारते तो इनकी खाल, दांत व नाखून ले जाते।
किसी के घायल या मारने से मौत नहीं है। करंट भी लगने की संभावना नहीं है क्योंकि शव मिलने वाले स्थल से सवा किमी दूर खेत व दो किमी दूर बस्ती है। आसपास कहीं से भी बिजली की तार भी नहीं गई है। मृत जानवरों के शव में झुलसने के सबूत भी नहीं दिख रहे। फिलहाल पूरी जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी के नेतृत्व में टास्क टीम बनाई गई है जो एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी।
पोस्टमार्टम देर शाम को कराया जाएगा जिसमेें पांच डाक्टर की टीम होगी। प्रथम पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण सही नहीं आ सकता क्योंकि मृत जानवरों के शरीर के कई अंग की जांच बाहर की लैब में होगी। यह भी लगता है कि इनका शिकार नहीं किया गया है क्याेंकि शव में कीडे़ व जानवर गोश्त खा गए हैं बाकी शरीर पड़ा है। यदि शिकारी इन्हें मारते तो इनकी खाल, दांत व नाखून ले जाते।