{"_id":"597a0c7d4f1c1bd9208b46a9","slug":"children-helpless-and-hungry-after-father-suicide","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मजदूरी न मिलती तो बच्चों को रखना पड़ता था भूखा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मजदूरी न मिलती तो बच्चों को रखना पड़ता था भूखा
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 27 Jul 2017 10:13 PM IST
विज्ञापन
पति की मौत के बाद अपने मासूम बच्चों के साथ बैठी चुन्नी देवी।
- फोटो : अमर उजाला
हमीरपुर के राठ कोतवाली में बुधवार को सूदखोर मलखान से तंग आकर एक रिक्शा चालक मजदूर ने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। संतोष की पत्नी चुन्नी देवी ने बताया कि पति ने पुत्रियों के विवाह के लिए पिछले वर्ष मुगलपुरा मोहल्ला निवासी मलखान यादव से 60 हजार रुपये कर्ज लिया था। पति ने मेहनत कर थोड़ा-थोड़ा कर ब्याज समेत एक लाख रुपये उसे लौटा दिए थे। इसके बावजूद सूदखोर तकादा करता रहता था। आरोप लगाया कि 24 जुलाई को मलखान यादव ने कब्जा करने की नीयत से कुछ घरेलू सामान उसके मकान में रख दिया और पति को मकान खाली करने की धमकी दी।
विज्ञापन
यह भी आरोप लगाया कि कि दबंग ने 25 जुलाई को उसके घर में घुसकर पति से मारपीट भी की। बताया कि जब पति बच्चों सहित सूदखोर के पैरों पर गिरकर गिड़गिड़ाया तब वह मकान खाली करने की बात कहते हुए वहां से चला गया। महिला का कहना है कि सूदखोर द्वारा पूरे परिवार का अपमान पति बर्दाश्त नहीं कर सका। इसी कारण उसने फांसी लगा ली। पत्नी ने यह भी बताया कि सूदखोर ने कर्ज के चलते उसका मकान एक साल पहले जबरन लिखवा लिया था। इसकी जानकारी उसे चार दिन पहले हुई थी।
विज्ञापन
संतोष के आत्महत्या करने के बाद मलखान फरार हो गया था। पत्नी चुन्नी देवी ने मलखान के खिलाफ धारा 306 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बुधवार की रात पुलिस ने मलखान की गिरफ्तारी के लिए घर में छापा मारा था। परंतु वह फरार हो गया था।
विज्ञापन
Trending Videos
गरीबी के कारण चार बच्चों ने नहीं देखा स्कूल का मुंह
डेमो
सूदखोर से तंग होकर आत्महत्या करने वाले दलित मजदूर के चार बच्चों ने गरीबी के चलते स्कूल का मुंह तक नहीं देखा। रिक्शा चला और मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले संतोष अनुरागी (45) की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी उसे मुश्किल हो रहा था। ऐसे हालातों में बच्चों की पढ़ाई कराना मुश्किल था। संतोष की पत्नी चुन्नी देवी ने बताया कि उसके दो पुत्र कल्लू (8) और लल्लू (6) हैं। कल्लू मानसिक रूप से विक्षिप्त है। उसकी दो पुत्रियां गीता (12) और सीता (9) हैं। दो पुत्रियों की शादी हो चुकी है। कच्चे घर में टीनशेड के नीचे जीवन यापन करने वाला संतोष इतना गरीब था कि मजदूरी न मिलने पर उसके बच्चों को भूखा रहना पड़ता था।
कस्बे में सूदखोरों का मकड़जाल
डेमो
कस्बे में सूदखोरों का मकड़जाल फैला है। अब तक न जाने कितने परिवार सूदखोरों के मकड़जाल में फंसकर घर मकान बेच चुके हैं। देखा जाए तो सूदखोरों के पास किसी भी प्रकार का लाइसेंस नहीं हैं। पांच रुपये से लेकर दस रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से सूदखोर ब्याज वसूलते हैं। यहां तक कि कई दबंग सूदखोर तो एक साल में दोगुनी रकम तक कर देते हैं। सूदखोर बिना लाइसेंस के धंधा चमका रहे हैं। बताया जाता है कि नगर पालिका में कार्य करने वाले ज्यादातर सफाईकर्मी सूदखोरों के चुंगल में फंसे हैं। बताया जाता है कि सूदखोर कर्ज देने वालों की बैंक पासबुक तक अपने पास रखे रहते हैं। जब वेतन आता है तो सूदखोर बैंक के दरवाजे के बाहर खडे़ होकर उनसे सूद वसूलते हैं।