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आवाज बदले और बार-बार एसिडिटी हो तो कैंसर का खतरा : डॉ. राकेश
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यशाला में सर्जरी की तकनीक सीखते डॉक्टर।
- फोटो : विभाग
कानपुर। बार-बार होने वाली एसिडिटी को मामूली समझकर नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी को न्योता देना हो सकता है। आवाज बदलने और बार-बार एसिडिटी होने से मुख और गले के कैंसर होने की संभावना होती है। ये जानकारी जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग और एसोसिएशन ऑफ ओटोलैरिंजोलॉजिस्ट्स ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन लखनऊ से आए ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने दी।
उन्होंने कहा कि इसमें शुरुआती लक्षण आवाज का बदलना होता है, जैसे ही आवाज बदले तो तुरंत जांच कराएं। समय रहते इलाज मिलता है तो रिजल्ट काफी अच्छे रहते हैं। इसके अलावा, सिगरेट पीना, शराब का सेवन और गुटखा/पान मसाला चबाना भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन हानिकारक आदतों के कारण मुख और गले के कैंसर की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक बनी रहती है। अन्य मुख्य कारणों में लगभग 20-30 प्रतिशत योगदान प्रदूषण या अन्य कारकों का होता है।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे वॉइस डिस्ऑर्डर का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या से लड़कों की आवाज लड़कियों जैसी लगती है। ऐसा उन बच्चों में अधिक होता है जिनके मां-पिता ओवर प्रोटेक्टेड होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को बोलने, खेलने दीजिए। जयपुर से आए ईएनटी सर्जन डॉ. सतीश जैन ने नाक, कान एवं थायरॉइड से संबंधित जटिल ऑपरेशनों का सजीव प्रदर्शन किया गया। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार, डॉ. एसके कनौजिया, डॉ. अमृता श्रीवास्तव, डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी, डॉ. आसिम देसाई, डॉ. सतीश जैन, डॉ. एच. विजेंद्र, डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, डॉ. अनुपम मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि इसमें शुरुआती लक्षण आवाज का बदलना होता है, जैसे ही आवाज बदले तो तुरंत जांच कराएं। समय रहते इलाज मिलता है तो रिजल्ट काफी अच्छे रहते हैं। इसके अलावा, सिगरेट पीना, शराब का सेवन और गुटखा/पान मसाला चबाना भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन हानिकारक आदतों के कारण मुख और गले के कैंसर की संभावना लगभग 50 प्रतिशत तक बनी रहती है। अन्य मुख्य कारणों में लगभग 20-30 प्रतिशत योगदान प्रदूषण या अन्य कारकों का होता है।
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डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चे वॉइस डिस्ऑर्डर का शिकार हो रहे हैं। इस समस्या से लड़कों की आवाज लड़कियों जैसी लगती है। ऐसा उन बच्चों में अधिक होता है जिनके मां-पिता ओवर प्रोटेक्टेड होते हैं। इसलिए अपने बच्चों को बोलने, खेलने दीजिए। जयपुर से आए ईएनटी सर्जन डॉ. सतीश जैन ने नाक, कान एवं थायरॉइड से संबंधित जटिल ऑपरेशनों का सजीव प्रदर्शन किया गया। यहां विभागाध्यक्ष डॉ. हरेंद्र कुमार, डॉ. एसके कनौजिया, डॉ. अमृता श्रीवास्तव, डॉ. देवेंद्र लाल चंदानी, डॉ. आसिम देसाई, डॉ. सतीश जैन, डॉ. एच. विजेंद्र, डॉ. सौरभ वार्ष्णेय, डॉ. अनुपम मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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