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Kanpur News: स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी से सीएचसी में नहीं हो पा रहा सिजेरियन
Wed, 29 Nov 2023 01:28 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 29 Nov 2023 01:28 AM IST
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कानपुर देहात। विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी से जिला जूझ रहा है। इस वजह से लगभग सभी सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो पा रहे और गर्भवतियों को गांवों से जिला महिला अस्पताल आना पड़ रहा है। इसके बाद उनको इलाज मिल पा रहा।
जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन अस्पतालों में फिजिशियन के साथ विशेषज्ञाें की कमी है। कई जगह तो एक दो ही डॉक्टर पूरी व्यवस्था को संभाल रहे हैं। इसके अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ व बेहोशी के डाॅक्टरों की बात की जाए तो इनकी तैनात स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं है। रसूलाबाद सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभा वाष्र्णेय की तैनाती है, लेकिन वह पिछले एक साल से आई ही नहीं। इसी तरह रसूलाबाद में एक बेहोशी के डॉक्टर को जिला महिला अस्पताल से संबद्ध किया गया है, लेकिन वह भी अस्पताल नहीं आते । विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी की वजह से सीएचसी में सिर्फ सामान्य प्रसव कराने की व्यवस्था है। गर्भवती गंभीर स्थिति में हुई तो उसे जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। ऐसी स्थिति में उसकी हालत और भी खराब हो जाती है। इसके अलावा महिला अस्पताल में मरीजों का लोड भी बढ़ जाता है।
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पुखरायां सीएचसी में हुए सिर्फ पांच प्रसव
जिले में सभी सीएचसी में से पुखरायां सीएचसी में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। यहां पर एक महिला डॉक्टर ने सिजर करने के लिए छह माह का कोर्स किया है। इस वजह से अक्तूबर माह में पांच प्रसव हुए हैं।
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40 से 50 किलो मीटर का तय करना पड़ता सफर
जिला मुख्यालय से कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 40 से 50 किलो मीटर की दूरी पर हैं। इनमें रसूलाबाद की दूरी करीब 50 किलो मीटर, सिकंदरा, राजपुर की दूसीर करीब 35 से 40 किलो मीटर है। यहां से रेफर होने वाली गर्भवतियों की हालत रास्ते में ही खराब हो जाती है। कई बार तो रास्ते में ही प्रसव हुए हैं। वहीं डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए रेफर किया तो हालत भी बिगड़ी आैर कई की जान पर भी बन आई हैं।
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इन स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं हैं महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ
अकबरपुर, सिकंदरा, देवीपुर, पुखरायां, गजनेर, झींझक, रसूलाबाद, सलेमपुर, रूरा, संदलपुर, शिवली
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जिले में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी है। कई बार शासन को पत्राचार किया गया है। अभी तक डाॅक्टर नहीं मिले। इस वजह से सीएचसी में सिजर नहीं हो पा रहा है। जबकि सामान्य प्रसव कराए जा रहे हैं।
-डॉ. एके सिंह, सीएमओ।
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जिले में 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन अस्पतालों में फिजिशियन के साथ विशेषज्ञाें की कमी है। कई जगह तो एक दो ही डॉक्टर पूरी व्यवस्था को संभाल रहे हैं। इसके अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ व बेहोशी के डाॅक्टरों की बात की जाए तो इनकी तैनात स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं है। रसूलाबाद सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुभा वाष्र्णेय की तैनाती है, लेकिन वह पिछले एक साल से आई ही नहीं। इसी तरह रसूलाबाद में एक बेहोशी के डॉक्टर को जिला महिला अस्पताल से संबद्ध किया गया है, लेकिन वह भी अस्पताल नहीं आते । विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी की वजह से सीएचसी में सिर्फ सामान्य प्रसव कराने की व्यवस्था है। गर्भवती गंभीर स्थिति में हुई तो उसे जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर किया जाता है। ऐसी स्थिति में उसकी हालत और भी खराब हो जाती है। इसके अलावा महिला अस्पताल में मरीजों का लोड भी बढ़ जाता है।
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पुखरायां सीएचसी में हुए सिर्फ पांच प्रसव
जिले में सभी सीएचसी में से पुखरायां सीएचसी में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। यहां पर एक महिला डॉक्टर ने सिजर करने के लिए छह माह का कोर्स किया है। इस वजह से अक्तूबर माह में पांच प्रसव हुए हैं।
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40 से 50 किलो मीटर का तय करना पड़ता सफर
जिला मुख्यालय से कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 40 से 50 किलो मीटर की दूरी पर हैं। इनमें रसूलाबाद की दूरी करीब 50 किलो मीटर, सिकंदरा, राजपुर की दूसीर करीब 35 से 40 किलो मीटर है। यहां से रेफर होने वाली गर्भवतियों की हालत रास्ते में ही खराब हो जाती है। कई बार तो रास्ते में ही प्रसव हुए हैं। वहीं डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह देते हुए रेफर किया तो हालत भी बिगड़ी आैर कई की जान पर भी बन आई हैं।
इन स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं हैं महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ
अकबरपुर, सिकंदरा, देवीपुर, पुखरायां, गजनेर, झींझक, रसूलाबाद, सलेमपुर, रूरा, संदलपुर, शिवली
जिले में विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी है। कई बार शासन को पत्राचार किया गया है। अभी तक डाॅक्टर नहीं मिले। इस वजह से सीएचसी में सिजर नहीं हो पा रहा है। जबकि सामान्य प्रसव कराए जा रहे हैं।
-डॉ. एके सिंह, सीएमओ।