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लॉकर डकैती: पुलिस ने बरामद किए 20 लाख के गहने, ग्राहकों को मिलना मुश्किल, फंस सकता है मामला

Mon, 11 Apr 2022 07:26 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 11 Apr 2022 07:26 AM IST
सार

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के लॉकरों से चोरी हुए करोड़ों के गहनों में पुलिस ने 20 लाख के गहने बरामद कर लिए हैं। ग्राहकों को गहने प्राप्त करने के लिए कोर्ट में आवेदन करना होगा, तब पुलिस पहचान करवाएगी। वहीं, यदि  एक गहने पर दो ने दावा किया, तो मामला फंस जाएगा। 

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Central bank of india Locker robbery, Police seized 20 lakh ornaments
सेंट्रल बैंक - फोटो : Central Bank

विस्तार

कानपुर के कराची खाना सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के नौ लॉकरों से करोड़ों के गहने चोरी होने के मामले में पुलिस भले ही 20 लाख के गहनों की बरामदगी दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन ये गहने ग्राहकों को मिल पाएंगे या नहीं इस पर संशय बरकरार है। क्योंकि यदि किसी गहने पर एक से अधिक लोगों ने दावा कर दिया तो इसके निस्तारण के लिए न तो बैंक के पास कोई स्पष्ट नीति है और न ही पुलिस के पास समाधान।

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इसके अलावा अपने ही गहनों को पाने के लिए ग्राहकों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सबसे पहले कोर्ट में अपील करनी होगी, इसके बाद कोर्ट पुलिस से रिपोर्ट मांगेगी। तब कहीं जाकर प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। ऐसा ही मामला फरवरी 2018 में सामने आया था। बदमाशों ने यशोदानगर स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के 32 लॉकर काटकर नकदी व गहने मिलाकर करीब 30 करोड़ का माल पार कर दिया था।

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फाइल फोटा - फोटो : अमर उजाला

हालांकि चार लॉकर खाली थे। 28 ग्राहकों को आर्थिक चोट पहुंची थी। क्षेत्र में ही रहने वाले सिंचाई विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर सुशील कुमार शुक्ला के भी 27 लाख के गहने चले गए थे। राजनीतिक दबाव पड़ा तो पुलिस ने पांच मार्च को 11 बदमाशों को गिरफ्तार कर चार किलो 170 ग्राम गहने व 270 ग्राम गले सोने की बरामदगी दिखाई। जब ग्राहकों ने पुलिस अधिकारियों से गहने लेने की प्रक्रिया पूछी तो कोर्ट जाने की सलाह दी गई।

महीनों कोर्ट और थाने के चक्कर लगवाए गए। चार साल बाद भी बरामद गहनों में आधे ही ग्राहकों को मिल सके। विवादित बताकर दो करोड़ से अधिक के गहने मालखाने भेज दिए गए, जो अभी भी वहीं जमा हैं। 

थाने से कोर्ट को हर बार दिया गया गुमराह करने वाला जवाब
सुशील के अनुसार सभी पीड़ित ग्राहक  कोर्ट गए। कोर्ट ने नौबस्ता थाना पुलिस से बरामद गहनों की रिपोर्ट मांगी, लेकिन थाने से हर बार गले सोने के विषय में गुमराह करने वाला जवाब (गला हुआ सोना होने के कारण गहने किसके हैं, स्पष्ट करना मुश्किल) दिया गया।

करीब आठ महीने बाद कोर्ट ने एक कमेटी का गठन कर गहनों की पहचान कराकर वापस कराने के आदेश दिए। इसके बाद ग्राहकों के पांच से 25 प्रतिशत तक गहनों की रिकवरी हो सकी। सुशील कुमार के 848 ग्राम सोने के एवज में महज 150 की रिकवरी हो सकी थी।
 
20 हजार के गहनों के लिए चार लाख की सिक्योरिटी
थाने से गहनों को लेने के लिए सभी ग्राहकों से सिक्योरिटी भी मांगी गई थी। पीड़ित ग्राहक प्रशांत कुमार वर्मा के अनुसार उनके करीब 240 ग्राम सोने के गहने चोरी हुए थे। रिकवरी महज 20 हजार के गहनों की दिखाई गई। जब गहने लेने पहुंचे तो उनसे चार लाख की सिक्योरिटी मांगी गई। इस पर उन्होंने गहने मालखाने में ही रखवा दिए।
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लापरवाही के बाद भी बैंक ने झाड़ लिया था पल्ला
प्रशांत ने कहा कि बैंक  की सुरक्षा में भारी चूक (सिक्योरिटी ऑडिट रिपोर्ट में भी पुष्टि) के बाद भी बैंक को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया, जबकि पीड़ित ग्राहकों ने सबसे पहले बैंक प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस ने बैंक  प्रबंधन की तरफ से सिर्फ डकैती का मुकदमा दर्ज किया था। ऐसे में रिकवरी होने के बाद सुशील कुमार समेत नौ ग्राहकों ने बैंक के खिलाफ राज्य आयोग में वाद दायर किया, जो मामला आज भी लंबित है। 

सीबीआई जांच होती, तो पीड़ितों को मिलता हक
पीड़ित ग्राहक सुशील कुमार, अखिलेश शिवहरे, उमाकांत बाजपेई, मंजू कुशवाहा, अर्चना अवस्थी आदि ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उस वक्त पांच करोड़ से अधिक के गहने बदमाशों के पास से बरामद किए थे, लेकिन दिखाए सिर्फ 1.25 करोड़ के। उस वक्त प्रकरण की सीबीआई जांच होती, तो पुलिस का पूरा खेल खुल जाता।

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