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Kanpur News: दूर स्थित मंडी समिति में खुले केंद्र, कम दाम पर अनाज बेच रहे किसान
Sat, 31 Oct 2026 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:39 AM IST
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सरवनखेड़ा। क्षेत्र में स्थित खाद्य एवं रसद विभाग के क्रय केंद्रों को हटाकर मंडी समिति परिसर में शिफ्ट करने से किसानों को मोटा अनाज खुले बाजारों में कम दाम पर बेचना पड़ रहा है। इससे सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मोटे अनाज (मक्का, बाजरा व ज्वार) उगाने के लिए सरकार लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। हालांकि नजदीक क्रय केंद्र खोलने की सहूलियत इस बार नहीं मिली।
पिछले वर्ष खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा जिठरौली, गजनेर में क्रय केंद्र खोले गए थे। तब किसानों ने यहां ज्वार, बाजरा व मक्का बेचकर मुनाफा कमाया था। फसल से अच्छा लाभ मिलने से इस बार क्षेत्र के किसानों ने मोटे अनाज का रकबा भी बढ़ा दिया था। इधर, अक्तूबर में सरकार ने क्षेत्र में खुले क्रय केंद्रों को अकबरपुर, रूरा, पुखरायां की मंडी समिति परिसर में सभी 43 क्रय केंद्र शिफ्ट कर दिए गए। केंद्र बनाने में किसानों की आसान पहुंच का ध्यान नहीं दिया गया। क्रय केंद्रों पर बाजरा 2900 रुपये, ज्वार 4023 रुपये व मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य निर्धारित है। वहीं, खुले बाजार में बाजरा 2300 रुपये, मक्का 2300 रुपये व ज्वार 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। मूल्य का सबसे ज्यादा अंतर ज्वार में है।
खुले बाजार में बिक्री करने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी तक ले जाने के चक्कर में समय व किराया की वजह से अधिकतर किसान खुले बाजार में मोटे अनाज की बिक्री कर रहे है। हिलौथी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने आठ बीघे खेत में मक्का बोया था। करीब 40 क्विंटल मक्का की पैदावार भी हुई, परंतु क्रय केंद्र नहीं होने से सस्ते दामों में खुले बाजार में बेचना पड़ा। सैंथा गांव के लक्ष्मी कांत मिश्रा ने बताया कि चार बीघे खेत में बाजरा बोया था। बेहतर पैदावार के बावजूद खुले बाजार में रेट कम होने से उचित लाभ नहीं मिल सका। सरकारी खरीद केंद्र पुखरायां मंडी में बना दिया गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के अनुमोदन पर क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
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पिछले वर्ष खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा जिठरौली, गजनेर में क्रय केंद्र खोले गए थे। तब किसानों ने यहां ज्वार, बाजरा व मक्का बेचकर मुनाफा कमाया था। फसल से अच्छा लाभ मिलने से इस बार क्षेत्र के किसानों ने मोटे अनाज का रकबा भी बढ़ा दिया था। इधर, अक्तूबर में सरकार ने क्षेत्र में खुले क्रय केंद्रों को अकबरपुर, रूरा, पुखरायां की मंडी समिति परिसर में सभी 43 क्रय केंद्र शिफ्ट कर दिए गए। केंद्र बनाने में किसानों की आसान पहुंच का ध्यान नहीं दिया गया। क्रय केंद्रों पर बाजरा 2900 रुपये, ज्वार 4023 रुपये व मक्का 2410 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य निर्धारित है। वहीं, खुले बाजार में बाजरा 2300 रुपये, मक्का 2300 रुपये व ज्वार 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है। मूल्य का सबसे ज्यादा अंतर ज्वार में है।
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खुले बाजार में बिक्री करने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंडी तक ले जाने के चक्कर में समय व किराया की वजह से अधिकतर किसान खुले बाजार में मोटे अनाज की बिक्री कर रहे है। हिलौथी निवासी संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने आठ बीघे खेत में मक्का बोया था। करीब 40 क्विंटल मक्का की पैदावार भी हुई, परंतु क्रय केंद्र नहीं होने से सस्ते दामों में खुले बाजार में बेचना पड़ा। सैंथा गांव के लक्ष्मी कांत मिश्रा ने बताया कि चार बीघे खेत में बाजरा बोया था। बेहतर पैदावार के बावजूद खुले बाजार में रेट कम होने से उचित लाभ नहीं मिल सका। सरकारी खरीद केंद्र पुखरायां मंडी में बना दिया गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी के अनुमोदन पर क्रय केंद्र बनाए गए हैं।
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