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सीधे इस शिवलिंग पर गिरता है बारिश का पानी, आस्था का केंद्र मानेश्वर शिवमंदिर

Thu, 27 Jul 2017 04:50 PM IST
मुनीर खान, अमर उजाला, हमीरपुर
मुनीर खान, अमर उजाला, हमीरपुर Updated Thu, 27 Jul 2017 04:50 PM IST
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Center of faith Maneshwar Shiva Temple
आस्था का केंद्र मानेश्वर शिवमंदिर

यूपी के हमीरपुर में सूनसान जंगल के बीच बना मानेश्वर शिवमंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इसे करीब 200 साल पहले भरुआसमेरपुर कारीमाटी गांव के एक सेठ बनवाया था। बुजुर्ग बताते हैं कि निर्माण के दौरान सेठ को थोड़ा सा गुरूर आ गया तो वह लंबे प्रयास के बाद भी मंदिर की सुराही (मुनार) नहीं बनवा सका। मुनार बनाने के लिए उसके परिजनों ने तीन बार प्रयास किया। लेकिन हर बार विफल रहे। आज भी मंदिर में बरसात का पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है।

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भरुआसुमेरपुर सिमनौड़ी-कारीमाटी गांव के बुजुर्ग मुन्नीलाल अवस्थी बताते हैं कि नगर निवासी सेठ छाछे पंसारी की गायों का एक चरवाहा जंगल ले जाता था। लेकिन उसकी गायें चरते हुए जब जंगल स्थित शिव मंदिर वाले स्थान पर पहुंचती थी, तो उसका दूध अपने आप निकलने लगता था। कहते हैं कि जब गाय वापस सेठ के घर पहुंचती तो उनका दूध नहीं निकलता था। इस पर वह चरवाहे से काफी नाराज होता, लेकिन चरवाहा इस घटना से अंजान सिर्फ सेठ की बातें सुनता रहता था। आए दिन होने वाली इस घटना से चरवाहा के साथ सेठ को भी आश्चर्य होने लगा। इस पर सेठ ने चरवाहे के पीछे अपने आदमी लगा दिए। जंगल में जब गायें इस सिद्ध स्थान पर पहुंचीं तो उनका दूध निकलने लगा। इस घटना को देख सेठ के आदमियों ने उसे बताया। जिस पर सेठ ने उस स्थान की खुदाई शुरू करा दी।
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स्वप्न में भगवान शिव नजर आए

Center of faith Maneshwar Shiva Temple
आस्था का केंद्र मानेश्वर शिवमंदिर
बताते हैं कि करीब 20 फुट खुदाई करने के बाद भी जब कुछ नहीं निकला तो एक रात सेठ को स्वप्न में भगवान शिव नजर आए और उन्होंने खुदाई करने से मना किया और इसी स्थान पर मंदिर बनाए जाने की बात कही। इसी से प्रेरित होकर छाछे पंसारी ने मंदिर का निर्माण शुरू कराया, लेकिन जब सुराही बनने का समय आया। तो सेठ को ऐसा लगा कि वह मंदिर रोजाना न जाकर कस्बे से ही मंदिर के दर्शन कर लिया करेगा। यह गुरूर आते ही निर्माणाधीन सुराही अपने आप धराशाई हो गई। सेठ ने इस सुराही बनवाने के लिए दो बार और प्रयास किए। मगर वह असफल रहे।


मान्यताःमंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी होती
आज तक इस मानेश्वर शिव मंदिर की सुराही अभी भी नहीं बन सकी है। जिससे बरसात का पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है। क्षेत्रवासियों का मानना है कि इस शिव मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। अधूरी यज्ञवेदी का निर्माण कार्य तेज फोटो 25 एचएएमपी 3 पुजारी द्वारिका दास त्यागी सुप्रसिद्ध प्राचीन मानेश्वर शिवमंदिर में पूजा-अर्चना करीब दस वर्षो से स्वामी द्वारिकादास त्यागी जी कर रहे हैं। जबकि शिव मंदिर में भंडारे का आयोजन श्रीमानेश्वर बाबा मंदिर सेवा समिति के सदस्य कर रहे हैं।
 

प्रत्येक सोमवार को भंडारे का होता है आयोजन

Center of faith Maneshwar Shiva Temple
आस्था का केंद्र मानेश्वर शिवमंदिर
करीब पांच साल पूर्व गठित यह समिति मंदिर परिसर में कई निर्माण कार्य करा चुकी है। जिसमें लोगों के ठहरने के लिए टीन शेड, पौशाला, यज्ञवेदी आदि शामिल हैं। अधूरी पड़ी यज्ञवेदी का भी कार्य कराया है। समिति से जुड़े लोगों ने मंदिर के लिए दो बीघा चार डिसमिल जमीन खरीदी है। हर सोमवार को होता भंडारे का आयोजन महाशिवरात्रि व सावन के प्रत्येक सोमवार को भंडारे का मंदिर समिति द्वारा आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही कार्तिक पूर्णिमा में भी भंडारे का आयोजन होता है।
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