कानपुर में पटरी काटने की साजिश, सीबीआई ने इकट्ठा किए सबूत
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स्टेशन मास्टर से पूछताछ
दोपहर करीब 12:10 बजे पांच सदस्यीय सीबीआई टीम मंधना रेलवे स्टेशन से कल्याणपुर की ओर दो किलोमीटर दूरी पर स्थित घटनास्थल खंभा नंबर 16/1 पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे ट्रैकमैन संजीव कुमार, रामराज, सीनियर सेक्शन इंजीनियर जहीर खान और मंधना स्टेशन मास्टर दर्शन सिंह से वारदात की पड़ताल की। टीम ने घटना के सीन को रीक्रिएट कराया। आसपास के गांवों, स्कूल-कॉलेज, यहां रहने वालों, पटरी तक पहुंचने के रास्तों, उस दिन के मौसम, पैंड्रॉल क्लिप, जॉगल फिश प्लेट (दो पटरियों को जोड़ने के लिए लगाई गई क्लिप) आदि की डिटेल जुटाई। आरपीएफ और स्थानीय बिठूर थाने के जांच अधिकारियों के बयान दर्ज किए। आरपीएफ और बिठूर थाने में दर्ज एफआईआर की कॉपी भी ली। टीम ने बगदौधी बांगर गांव के ग्राम प्रधान से भी पूछताछ की। सीबीआई टीम की पड़ताल एक घंटा 45 मिनट तक चली। 1 बजकर 55 मिनट पर टीम वापस लखनऊ लौट गई।
इन सवालों पर रहा फोकस
- दो चार से व्यक्तियों ने दिया घटना को अंजाम। ट्रैक मैनों को आते देखकर भागे लोगों को किसी ने क्यों नहीं देखा, जबकि उस दिन नए वर्ष की धूमधाम थी। झाड़ियों से उनके भागने पर क्रसिंग (झाड़ियों के टूटने से बना रास्ता) निशानों की पड़ताल क्यों नहीं हुई।
- जॉगल फिश प्लेट को खोलने के लिए विशेष रूप से बनाया गया रिंच साजिशकर्ताओं को कहां से मिला हो सकता है।
- पटरी काटने के लिए ज्वाइंट के बगल की जगह चुनी गई। यानी घटना को अंजाम देने वालों को मालूम था कि यहां से पटरी जल्दी कटेगी। थोड़ी पटरी और कट जाती तो ठंड के कारण यह चिटक जाती और बड़ा हादसा होता।
- इससे पहले और इसके बाद कौन सी ट्रेन गुजारी गई। स्थानीय पुलिस को एक पैंसेजर गुजारने के बाद सूचना दी गई। इससे पहले यहां कब कोई घटना हुई।
- कितने पैंड्रॉल क्लिप खोले गए। ट्रैक मैन से फोनकर पहले 21 पैंड्रॉल क्लिप खोले जाने की जानकारी दी। बाद में इनकी संख्या करीब 50 बताई। ट्रैक मैन के फोन की रिकार्डिंग सीबीआई ने मांगी है।
आरपीएफ और स्थानीय पुलिस की जुदा राय
अब बदलेगी जांच की दिशा
केंद्र को भेजी जाएगी रिपोर्ट