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UP: एचएएल से 55 लाख की ठगी का मामला,  इंटरपोल-विदेश मंत्रालय और एफआरआई को भेजी मेल, आईटी एक्सपर्ट की लेंगे मदद

Tue, 18 Mar 2025 04:36 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Tue, 18 Mar 2025 04:36 PM IST
सार

Kanpur News: साइबर अपराधियों ने अमेरिकी कंपनी की ई-मेल आईडी में एस की जगह ई कर फर्जी ई-मेल आईडी बना डाली। इस ई-मेल से उन्होंने एचएएल से पार्ट्स का भुगतान करने के लिए न्यूयार्क स्थित अपने खाते की डिटेल भेजकर 55 लाख रुपये जमा कराने को कहा।

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Case of fraud of 55 lakhs from HAL mail sent to Interpol Ministry of External Affairs and FRI
एचएएल से ठगी का मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में लड़ाकू विमान के पार्ट्स खरीदने के नाम पर हिंदुस्तान एयरोनाटिकल्स लिमिटेड (एचएएल) से 55 लाख रुपये की ठगी के बाद क्राइम ब्रांच ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। डीसीपी क्राइम ने सोमवार को इंटरपोल, विदेश मंत्रालय और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व ऑफ इंडिया (एफआरआई) को मेल भेजा है।

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इसमें एचएएल अधिकारियों के साथ फर्जी मेल पर हुई बातचीत के स्क्रीन शॉट, न्यूयॉर्क स्थित बैंक की डिटेल, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) से फर्जी डोमेन नेम व फर्जी ई-मेल बनाने वाले की डिटेल और एचएएल व अमेरिका की कंपनी से ईमेल के जरिए बातचीत और रुपये भेजने संबंधी जानकारी साझा कर मदद का आग्रह किया गया है।

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मेल भेजकर तीन पार्ट्स के कोटेशन का आग्रह किया
एचएएल की ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट डिवीजन (टीएडी) के अपर महाप्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने शनिवार को साइबर थाने में 55 लाख रुपये की ठगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक उनकी कंपनी विभिन्न प्रकार के परिवहन वायुयान का उत्पादन, ओवरहॉलिंग और सर्विसिंग करती है। इसके लिए पार्ट्स का आयात किया जाता है। इसमें डोर्नियर समेत अन्य लड़ाकू विमान भी शामिल हैं। कंपनी ने तीन मई 2024 को मेसर्स पीएस इंजीनियरिंग इनकॉरपोरेटेड को मेल भेजकर तीन पार्ट्स के कोटेशन का आग्रह किया था।

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कंपनी के खाते में रकम ट्रांसफर ही नहीं हुई
इसके बाद में अमेरिकी कंपनी इन पार्ट्स को भेजने को कहा था। इस बीच साइबर अपराधियों ने अमेरिकी कंपनी की ई-मेल आईडी में एस की जगह ई कर फर्जी ई-मेल आईडी बना डाली। इस ई-मेल से उन्होंने एचएएल से पार्ट्स का भुगतान करने के लिए न्यूयार्क स्थित अपने खाते की डिटेल भेजकर 55 लाख रुपये जमा कराने को कहा। पैसा भेजने के बाद भी जब पार्ट्स की डिलीवरी नहीं हुई, तो अफसरों ने कंपनी से बातचीत की। तब पता चला कि अमेरिकी कंपनी के खाते में रकम ट्रांसफर ही नहीं हुई। तब उन्हें ठगी की जानकारी हुई।

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ठगी में इनसाइडर थ्रेट का किया गया प्रयोग
एडीसीपी क्राइम अंजली विश्वकर्मा ने बताया कि इस ठगी में इनसाइडर थ्रेट का प्रयोग हुआ है। अमेरिकी कंपनी के साथ ही एचएएल में भी इनसाइडर थ्रेट होने की संभावना से उन्होंने इंकार नहीं किया है। वह कहते हैं कि साइबर ठग भी कंपनी की सुरक्षा में सेंध लगाकर यह कारनामा कर सकते हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी से तय होगा कि इनसाइडर थ्रेट किस साइड से प्रयोग किया गया है।

इंटरपोल, विदेश मंत्रालय और एफआरआई को मेल भेजी गई है। मेल पर जो भी डाटा मिलेंगे, जरूरत पड़ने पर उनके परीक्षण के लिए आईआईटी के विशेषज्ञों की भी मदद ली जाएगी।  -आशीष श्रीवास्तव, डीसीपी क्राइम/साउथ

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