अमेरिकी नागरिकों से ठगी का मामला: सीबीआई के जरिए इंटरपोल कसेगी एल थॉमस पर शिकंजा
क्राइम ब्रांच ने थॉमस से संबंधित सभी साक्ष्य भी मेल किए हैं। क्राइम ब्रांच ने 14 जुलाई को काकादेव में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर संचालक मुनेंद्र शर्मा समेत चार को जेल भेजा था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
क्राइम ब्रांच ने थॉमस से संबंधित सभी साक्ष्य भी मेल किए हैं। क्राइम ब्रांच ने 14 जुलाई को काकादेव में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर संचालक मुनेंद्र शर्मा समेत चार को जेल भेजा था। जांच में पता चला कि ठग गिरोह के पीछे दिल्ली जनकपुरी निवासी जसराज सिंह है। मंगलवार को क्राइम ब्रांच ने जसराज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूछताछ में उसने बताया कि अमेरिका निवासी टूड एल थॉमस उसका पार्टनर है। जो हर एक ट्रांजेक्शन पर 30 फीसदी हिस्सा लेता है। ग्राहकों का डाटा भी वही मुहैया कराता है।
प्रोटोकॉल के तहत कानपुर पुलिस सीधे अमेरिका पुलिस से संपर्क नहीं कर सकती है। इसलिए पुलिस कमिश्नर ने दिल्ली में सीबीआई के अफसरों से फोन पर बात की। उन्होंने थॉमस के बारे में जानकारी देते हुए पूरा प्रकरण बताया। क्राइम ब्रांच ने एक-एक डिटेल भेज दी है। अब सीबीआई अपने स्तर से ये जानकारी इंटरपोल को देगी। जिसके जरिये अमेरिका पुलिस को बताया जाएगा कि करोड़ों की साइबर ठगी में थॉमस की भूमिका है। जिसके साक्ष्य भी हैं। इसी आधार पर अमेरिकी पुलिस थॉमस पर कार्रवाई करेगी।
साइबर ठगी में जिस पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल किया जा रहा था वह टूड एल थॉमस का था। उसका गेटवे इस्तेमाल करने के लिए ही जसराज ने उसको पार्टनर बनाया था। जानकार बताते हैं कि अमेरिका या अन्य किसी देश में वहीं का रहने वाला शख्स गेटवे बनवा सकता है। जसराज ठगी अमेरिका के लोगों से कर रहा था। लिहाजा उसको अमेरिका का ही गेटवे चाहिए था। जो थॉमस ने उपलब्ध कराया। एक तरह से थॉमस की प्रत्येक ठगी में भूमिका है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पुलिस ने सीबीआई को दिए हैं। इसमें व्हाट्सएप चैट आदि शामिल है। इन तथ्यों का सत्यापन कर अमेरिका पुलिस कार्रवाई करेगी।
मीटिंग का खर्च जसराज ने उठाया था
जसराज और थॉमस दुबई में मिले थे। थॉमस की पत्नी भी मीटिंग में शामिल थी। तफ्तीश में पता चला कि जसराज ने ही थॉमस व उसकी पत्नी का टिकट यूएस से दुबई तक कराया था। वहां ठहरने का पूरा खर्च भी जसराज ने उठाया था। लोगों के कंप्यूटर के सर्वर पर वायरस डालकर उसको रिकवर कराने के नाम पर ठगी करते थे।
ये होता है इंटरपोल
इंटरपोल एक अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन है। संगठन में दुनिया भर के 192 देश सदस्य हैं। इसका मुख्यालय लियोन फ्रांस में है। इंटरपोल के जरिये अंतरराष्ट्रीय अपराध के मामलों में एक दूसरे देशों को मदद की जाती है। खासकर आतंकवाद, साइबर अपराध और संगठित अपराध के मामलों में। जिसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराध पर शिकंजा कसना होता है।
साइबर ठगी का गिरोह अंतरराष्ट्रीय है। अमेरिका के एक शख्स का नाम सामने आया है। उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। इसलिए मामले की जानकारी सीबीआई को दी गई है। सीबीआई इंटरपोल के जरिये इसकी जानकारी यूएस पुलिस को देगी। जिससे वहां के आरोपी पर कार्रवाई हो सके। मामले में कई बिंदुओं पर तफ्तीश चल रही है। गिरोह से जुड़े कई लोगों पर कार्रवाई भी की जाएगी।
असीम अरुण, पुलिस कमिश्नर