'मुझे इंसाफ चाहिए नहीं तो...': किसान की जमीन पर कब्जा, बोला- मैं भी बाबू सिंह की तरह जान दे दूंगा, पढ़ें मामला
Kanpur News: राम प्रताप की शिकायत पर तत्कालीन एडीजी भानु भास्कर ने फिर के आदेश दिए थे, लेकिन उसके कुछ दिनों बाद कब मुस्लिम में विष्णु थाना शामिल कर लिया गया। इसके बाद यह कहते हुए एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई।
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कानपुर के चकेरी में जिस तरह से भाजपा नेता ने किसान से जमीन की रजिस्ट्री कराने के बाद उसको एक भी रुपया नहीं दिया था, उसी तरह का विधनू का भी एक मामला सामने आया है। भूमाफियों ने बिना पैसे दिए धोखे एक किसान की आधी जमीन रजिस्ट्री और आधी जमीन पर एग्रीमेंट कराकर कब्जा कर लिया है।
अब किसान न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। वह थाने से मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेज चुका है, लेकिन पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। इससे बुजुर्ग किसान इतना आहत हो चुका है कि उसने इंसाफ न मिलने पर खुदकुशी की धमकी दी है। बिधनू के जामू गांव निवासी राम प्रताप सिंह (70) के साथ धोखाधड़ी हुई है।
झांसा देकर चार बीघा जमीन की रजिस्ट्री करा ली
उनके परिवार में बीमार पत्नी और दो बेटे हैं। इसमें एक बेटा मंदबुद्धि है। राम प्रताप की आठ बीघा जमीन है। जमीन उनके पिता के नाम थी। पिता की मौत के बाद राम प्रताप अपने नाम जमीन चढ़ाने के लिए कचहरी पहुंचे थे। वहां पर जमीन चढ़वाने का झांसा देकर रामप्रताप की चार बीघा जमीन की रजिस्ट्री करा ली गई।
किसान के खाते में एक भी रुपया नहीं आया है
साथ ही चार बीघा जमीन का एग्रीमेंट कर लिया गया। रामप्रताप का आरोप है कि किरण पाल, सागर सिंह और महेंद्र सिंह ने उनके साथ धोखाधड़ी की है। जमीन का बैनामा और एग्रीमेंट करने के बाद भी किस को एक भी रुपया नहीं दिया गया है। जबकि दस्तावेजों में किसान को 25 लाख रुपया देना दिखाया गया है। बैंक खाता की डिटेल से पता चलता है कि किसान के खाते में एक भी रुपया नहीं आया है।
रिपोर्ट दर्ज हुई कमिश्नरी बनते ही लगी फाइनल रिपोर्ट
राम प्रताप की शिकायत पर तत्कालीन एडीजी भानु भास्कर ने फिर के आदेश दिए थे, लेकिन उसके कुछ दिनों बाद कब मुस्लिम में विष्णु थाना शामिल कर लिया गया। इसके बाद यह कहते हुए एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि किसान के खाते में पैसा नहीं गया, तो क्या हुआ उसके भाई के खाते में तो पैसा गया है।
अदालत में नहीं टिक पाया पुलिस का खेल
पुलिस का या खेल अदालत में टिक नहीं पाया। अदालत ने फिर को निरस्त कर मामले के जांच के आदेश दिए हैं। अदालत में अपने आदेश में रेखांकित करते हुए लिखा है कि किसान के खाते में एक भी रुपये का लेनदेन नहीं हुआ है। फिर पुलिस ने फिर किस आधार पर एफआर लगाई। अगर आरोपियों ने जमीन खरीदी है, तो उन्होंने किसान को पैसे क्यों नहीं दिए। अब इस मामले की जांच एसीपी अभिषेक कर रहे हैं।
संघ से भी जुड़े है पीड़ित किसान
पीड़ित किसान राम प्रताप सिंह संघ से जुड़े है। वह वर्ष 1983 से 1986 तक रात हमीरपुर और मौदहा में प्रचारक रहे हैं। वह 1982 में बिल्हौर में विस्तारक रहे हैं। उनकी पत्नी हृदय रोग से ग्रसित है। वह उठने व चलने में असमर्थ है। किसान का एक बेटा प्राइवेट नौकरी करता है और दूसरा बेटा मंदबुद्धि है। घर का खर्च चलाना किसान के ऊपर ही है। किसान इतना परेशान हो चुका है कि उसने हाल में ही हुए बाबू सिंह खुदकुशी प्रकरण को दोहराने की सोच ली है।