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इस दलित बस्ती पर टूटा 'नहर का कहर'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 13 Nov 2016 09:52 PM IST
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मौदहा के मकरांव गांव की दलित बस्ती में घुसा नहर का ओवरफ्लो पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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हमीरपुर के एक गांव में एक दलित बस्ती पर जो कहर बरपा वह स्तब्ध कर देने वाला है। पाटनपुर नहर का पानी जिले के कमरांव गांव की दलित बस्ती में पानी भर गया। इससे चारों ओर त्राही-त्राही मच गई। लोगों ने घरों के नाबदान बंद कर लिए। जैसे-तैसे अपने सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में लग गए।
अमर उजाला ने दो नवंबर को मौदहा बांध की पाटनपुर माइनर की मरम्मत व सफाई के अभाव में पानी छोड़ते ही ओवरफ्लो होने से सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न होने की खबर प्रकाशित की थी। तब बांध के अधिकारियों ने नहर का पानी रोक दिया था। बीती देर शाम जब पुन: नहर में पानी तेजी से आया। खेतों में भरने के साथ ही हाईवे पर बनी पुलिया को पार कर सड़क के किनारे बसी दलित बस्ती के मकानों में घुसने लगा। इस पर रविवार को ग्रामीणों की इस समस्या पर खबर प्रकाशित की।
बीती रात नौ बजे तक इस गांव के दलित श्रोतम, प्रताप, रज्जन, बृजमोहन, बड़े व तुलाराम के घरों के अंदर से निकले नाबदानों से होकर आंगन व कमरों में पानी पहुंचने लगा। इन लोगों ने नालियां बंद कर दीं और दरवाजों पर दो-दो फीट मिट्टी चढ़ा ली। कच्चे मकान होने से दीवाराें में सीलन हो गई है और मकान गिरने की आशंका होने लगी है। लोगों को पूरी रात परेशानी का सामना करना पड़ा।
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इस बस्ती के पीड़ित बलवीर ने बताया कि बाल्टी लेकर घर के अंदर का पानी निकालता रहा। बताया कि इस बस्ती का हैंडपंप पानी से डूबा है। जानवर बांधने वाली जगह भी जलमग्न है। कहा कि पूरी रात उन्होंने जागकर निकाल दी। अब नहर बंद होने से पानी कुछ कम हुआ है। उधर, नहर के पानी से विद्या पत्नी बृजेंद्र सिंह एड. का बीस बीघा खेत जलमग्न है। उसकी बोई फसल डूबी है। बरातीलाल की दो बीघे की मसूर की फसल सहित अन्य दर्जनों किसानों की फसलें नहर के पानी से जलमग्न हो गईं हैं। उपजिलाधिकारी एसपी अग्रवाल ने कहा कि नहर में पानी कम करा दिया है।
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अमर उजाला ने दो नवंबर को मौदहा बांध की पाटनपुर माइनर की मरम्मत व सफाई के अभाव में पानी छोड़ते ही ओवरफ्लो होने से सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न होने की खबर प्रकाशित की थी। तब बांध के अधिकारियों ने नहर का पानी रोक दिया था। बीती देर शाम जब पुन: नहर में पानी तेजी से आया। खेतों में भरने के साथ ही हाईवे पर बनी पुलिया को पार कर सड़क के किनारे बसी दलित बस्ती के मकानों में घुसने लगा। इस पर रविवार को ग्रामीणों की इस समस्या पर खबर प्रकाशित की।
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बीती रात नौ बजे तक इस गांव के दलित श्रोतम, प्रताप, रज्जन, बृजमोहन, बड़े व तुलाराम के घरों के अंदर से निकले नाबदानों से होकर आंगन व कमरों में पानी पहुंचने लगा। इन लोगों ने नालियां बंद कर दीं और दरवाजों पर दो-दो फीट मिट्टी चढ़ा ली। कच्चे मकान होने से दीवाराें में सीलन हो गई है और मकान गिरने की आशंका होने लगी है। लोगों को पूरी रात परेशानी का सामना करना पड़ा।
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इस बस्ती के पीड़ित बलवीर ने बताया कि बाल्टी लेकर घर के अंदर का पानी निकालता रहा। बताया कि इस बस्ती का हैंडपंप पानी से डूबा है। जानवर बांधने वाली जगह भी जलमग्न है। कहा कि पूरी रात उन्होंने जागकर निकाल दी। अब नहर बंद होने से पानी कुछ कम हुआ है। उधर, नहर के पानी से विद्या पत्नी बृजेंद्र सिंह एड. का बीस बीघा खेत जलमग्न है। उसकी बोई फसल डूबी है। बरातीलाल की दो बीघे की मसूर की फसल सहित अन्य दर्जनों किसानों की फसलें नहर के पानी से जलमग्न हो गईं हैं। उपजिलाधिकारी एसपी अग्रवाल ने कहा कि नहर में पानी कम करा दिया है।