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कंपू में कैंप करेंगे मंत्री, अफसर डूबेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Apr 2016 01:20 AM IST
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हंसपुरम क्षेत्र में लगे हैंडपंप पर पानी भरने के लिए लगी लोगों की भीड़।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। शहर में गंभीर जल संकट को देखते हुए जिले के प्रभारी मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने यहीं डेरा डालने का फैसला किया है। मंत्री ने कहा है कि जल्द ही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की जाएगी। जो काम चल रहे हैं, उनका भौतिक सत्यापन होगा। कानपुर में रहकर कामकाज देखेंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होगी।
कानपुर नगर की समस्याओं पर प्रभारी मंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और जल संकट पर पूरी जानकारी दी। इसके बाद फोन पर अमर उजाला को बताया कि शहर में पेयजल से संबंधित योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। जल कल की भूमिका बेहद खराब है। पेयजल की आपूर्ति जल कल विभाग को सुनिश्चित करनी चाहिए। इसमें वह नाकाम साबित हुआ है। सवाल पूछे गए लेकिन जलकल की तरफ से सही जवाब नहीं दिया जा सका। इस रिपोर्ट के बाद जलकल के महाप्रबंधक सहित तमाम अफसरों पर गाज गिरने की आशंका है।
नाकारा अफसरों ने जल संकट बढ़ाया
कानपुर। जिले के प्रभारी मंत्री की इस टिप्पणी कि जलकल विभाग फेल हो चुका है, पर ‘अमर उजाला’ ने तत्काल पड़ताल की तो पाया कि जलकल विभाग के अफसरों के नाकारापन से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था लगभग ध्वस्त होती जा रही है। हालत यह है कि 40 लाख आबादी वाले शहर में जलकल विभाग लगभग 25 लाख लोगों को ही पानी दे पा रहा है, वह भी अपर्याप्त। चमनगंज घुसियाना, पटकापुर सहित कई मोहल्लों में नल सूख गए हैं, जबकि लीकेजों और टंकियों की समय - समय पर सफाई न होने से पेचबाग, फहीमाबाद, प्रेम नगर, नवाबगंज सहित 25 से ज्यादा मोहल्लों में नलों से आए दिन गंदा एवं बदबूदार पानी आता है। कम गहराई में बोरिंग के कारण एक तिहाई हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।
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पेयजल परियोजना शर्म से पानी-पानी
कानपुर। जेएनएनयूआरएम के तहत यदि पेयजल परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती तो शहर को इतना जबरदस्त पेयजल संकट नहीं झेलना पड़ता। अब टेस्टिंग की नौबत आई तो लीकेजों ने पानी का काम तमाम कर दिया। इस परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। गड़बड़ियों की न जाने कितनी जांचें हुईं, पर किसी पर आंच नहीं आई।
जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति परियोजना 2008 में शुरू हुई। पूरे शहर को भरपूर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुई यह परियोजना 2013 में पूरी होनी थी, पर अभी भी कार्य चल रहा है।
छावनी क्षेत्र में पाइप लाइन ही नहीं बिछ पाई हैं। जहां बिछी हैं वहां टेस्टिंग में लीकेज हो रहे हैं। जल निगम की लापरवाही से 647 करोड़ की इस परियोजना की लागत बढ़कर 868.93 करोड़ रुपये हो गई है। 221.93 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के बावजूद 31 मार्च 2016 तक कार्य पूरा नहीं हो पाया। कोई अफसर यह बताने को तैयार नहीं है कि काम कब खत्म होगा।
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कानपुर नगर की समस्याओं पर प्रभारी मंत्री ने गुरुवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की और जल संकट पर पूरी जानकारी दी। इसके बाद फोन पर अमर उजाला को बताया कि शहर में पेयजल से संबंधित योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है। जल कल की भूमिका बेहद खराब है। पेयजल की आपूर्ति जल कल विभाग को सुनिश्चित करनी चाहिए। इसमें वह नाकाम साबित हुआ है। सवाल पूछे गए लेकिन जलकल की तरफ से सही जवाब नहीं दिया जा सका। इस रिपोर्ट के बाद जलकल के महाप्रबंधक सहित तमाम अफसरों पर गाज गिरने की आशंका है।
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नाकारा अफसरों ने जल संकट बढ़ाया
कानपुर। जिले के प्रभारी मंत्री की इस टिप्पणी कि जलकल विभाग फेल हो चुका है, पर ‘अमर उजाला’ ने तत्काल पड़ताल की तो पाया कि जलकल विभाग के अफसरों के नाकारापन से शहर की जलापूर्ति व्यवस्था लगभग ध्वस्त होती जा रही है। हालत यह है कि 40 लाख आबादी वाले शहर में जलकल विभाग लगभग 25 लाख लोगों को ही पानी दे पा रहा है, वह भी अपर्याप्त। चमनगंज घुसियाना, पटकापुर सहित कई मोहल्लों में नल सूख गए हैं, जबकि लीकेजों और टंकियों की समय - समय पर सफाई न होने से पेचबाग, फहीमाबाद, प्रेम नगर, नवाबगंज सहित 25 से ज्यादा मोहल्लों में नलों से आए दिन गंदा एवं बदबूदार पानी आता है। कम गहराई में बोरिंग के कारण एक तिहाई हैंडपंप भी जवाब दे चुके हैं।
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पेयजल परियोजना शर्म से पानी-पानी
कानपुर। जेएनएनयूआरएम के तहत यदि पेयजल परियोजना तय समय पर पूरी हो जाती तो शहर को इतना जबरदस्त पेयजल संकट नहीं झेलना पड़ता। अब टेस्टिंग की नौबत आई तो लीकेजों ने पानी का काम तमाम कर दिया। इस परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। गड़बड़ियों की न जाने कितनी जांचें हुईं, पर किसी पर आंच नहीं आई।
जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति परियोजना 2008 में शुरू हुई। पूरे शहर को भरपूर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू हुई यह परियोजना 2013 में पूरी होनी थी, पर अभी भी कार्य चल रहा है।
छावनी क्षेत्र में पाइप लाइन ही नहीं बिछ पाई हैं। जहां बिछी हैं वहां टेस्टिंग में लीकेज हो रहे हैं। जल निगम की लापरवाही से 647 करोड़ की इस परियोजना की लागत बढ़कर 868.93 करोड़ रुपये हो गई है। 221.93 करोड़ रुपये लागत बढ़ने के बावजूद 31 मार्च 2016 तक कार्य पूरा नहीं हो पाया। कोई अफसर यह बताने को तैयार नहीं है कि काम कब खत्म होगा।