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अनुप्रिया के बहाने पिछड़ों के वोट बैंक पर निशाना: यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी का मास्टर स्ट्रोक
Wed, 07 Jul 2021 10:32 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 07 Jul 2021 10:32 PM IST
सार
अनुप्रिया पटेल ने राजनीति में 12 वर्ष पूर्व उस समय कदम रखा, जब उनके पिता और पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल का निधन हो गया। उन्होंने विधायक के रूप में पहली बार वाराणसी की रोहनिया सीट से चुनाव लड़ा और जीत गईं।
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अनुप्रिया पटेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कानपुर से अपना सियासी सफर शुरू करने वाली अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को दूसरी बार मोदी की टीम में जगह मिली है। भाजपा के समर्थन के साथ दूसरी बार लोकसभा का चुनाव जीतने वाली अनुप्रिया को यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री बनाकर भाजपा ने पिछड़ों के वोट बैंक पर निशाना साधा है।
नवाबगंज में एक अपार्टमेंट में रहकर अपने पिता सोनेलाल पटेल के बताए रास्ते पर चलकर अनुप्रिया ने राजनीति को गहराई से समझा। यही वजह है कि उन्होंने पिछले सात वर्ष से भाजपा के साथ केंद्र की राजनीति में अपना सिक्का जमा रखा है। इतना ही नहीं भाजपा के साथ समझौते के चलते प्रदेश में भी उनकी पार्टी को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
12 वर्ष पूर्व रखा राजनीति में कदम
अनुप्रिया पटेल ने राजनीति में 12 वर्ष पूर्व उस समय कदम रखा, जब उनके पिता और पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल का निधन हो गया। उन्होंने विधायक के रूप में पहली बार वाराणसी की रोहनिया सीट से चुनाव लड़ा और जीत गईं।
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2014 में जब भाजपा के साथ गठबंधन हुआ तो मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बन गईं। उस समय मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बनाई गईं थीं। 2019 में वह फिर से जीतीं और दो साल के इंतजार के बाद दोबारा केंद्र में मंत्री बनने का मौका मिला है।
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नवाबगंज में एक अपार्टमेंट में रहकर अपने पिता सोनेलाल पटेल के बताए रास्ते पर चलकर अनुप्रिया ने राजनीति को गहराई से समझा। यही वजह है कि उन्होंने पिछले सात वर्ष से भाजपा के साथ केंद्र की राजनीति में अपना सिक्का जमा रखा है। इतना ही नहीं भाजपा के साथ समझौते के चलते प्रदेश में भी उनकी पार्टी को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
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12 वर्ष पूर्व रखा राजनीति में कदम
अनुप्रिया पटेल ने राजनीति में 12 वर्ष पूर्व उस समय कदम रखा, जब उनके पिता और पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनेलाल पटेल का निधन हो गया। उन्होंने विधायक के रूप में पहली बार वाराणसी की रोहनिया सीट से चुनाव लड़ा और जीत गईं।
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2014 में जब भाजपा के साथ गठबंधन हुआ तो मिर्जापुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और सांसद बन गईं। उस समय मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बनाई गईं थीं। 2019 में वह फिर से जीतीं और दो साल के इंतजार के बाद दोबारा केंद्र में मंत्री बनने का मौका मिला है।
कार्यकर्ताओं ने खुशी मनाई
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के केंद्रीय मंत्री बनने पर अपना दल एस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किदवई नगर में रतनलाल शर्मा स्टेडियम के पास पटाखे फोड़े व मिठाई बांटकर खुशी मनाई। जिलाध्यक्ष नवीन श्रीवास्तव, शाहिद खान, अमित तिवारी, राहुल पोरवाल, पीयूष तिवारी, सुशील गुप्ता, हेमंत सचान, अलका गुप्ता, इंद्र अवस्थी मौजूद रहीं।
पचौरी, भोले को नहीं मिली जगह
सांसद सत्यदेव पचौरी और देवेंद्र सिंह भोले को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा थी, लेकिन निराशा हाथ लगी। बताया जा रहा है कि इस बार मोदी कैबिनेट में ज्यादा उम्र वालों को नहीं लिया गया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल के केंद्रीय मंत्री बनने पर अपना दल एस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने किदवई नगर में रतनलाल शर्मा स्टेडियम के पास पटाखे फोड़े व मिठाई बांटकर खुशी मनाई। जिलाध्यक्ष नवीन श्रीवास्तव, शाहिद खान, अमित तिवारी, राहुल पोरवाल, पीयूष तिवारी, सुशील गुप्ता, हेमंत सचान, अलका गुप्ता, इंद्र अवस्थी मौजूद रहीं।
पचौरी, भोले को नहीं मिली जगह
सांसद सत्यदेव पचौरी और देवेंद्र सिंह भोले को भी मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की चर्चा थी, लेकिन निराशा हाथ लगी। बताया जा रहा है कि इस बार मोदी कैबिनेट में ज्यादा उम्र वालों को नहीं लिया गया है।