कैब कंपनी का गड़बड़झाला: इंश्योरेंस, फिटनेस के बिना ही कैब कंपनियां ढो रहीं सवारियां
कानपुर में संचालित प्रतिष्ठित कैब कंपनियां अपनी सवारियों के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। इन कंपनियों में अनुबंधित वाहन मानकों पर खरे नहीं हैं। इससे सवारियां कई तरह के जोखिम में पड़ सकती हैं। इनके वाहन बिना फिटनेस, इंश्योरेंस और कॉमर्शियल टैक्स चुकाए सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर वाहन में बैठी सवारी की सुरक्षा से खिलवाड़ है। गड़बड़ियां इस हद तक हैं कि दुर्घटना के बाद दो साल से खड़़े वाहन को एप में बुक दिखाया गया गया और भेजी गई दूसरी गाड़ी। मामला सामने आने पर गुजैनी थाने में पुलिस एप से कई वाहन बुक कराए और मानक चेक किए, जो आधे-अधूरे मिले। पुलिस ने भी माना कि कैब कंपनियों का इस तरह से लापरवाही बरतना सवारियों को तो जोखिम डालता है। साथ ही इससे आपराधिक वारदातों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
इस तरह हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
गुजैनी के वरुण विहार निवासी श्याम सिंह पंवार बीते 19 अप्रैल को चकेरी एयरपोर्ट पर उतरे। वहां से उन्होंने वरुण विहार तक के लिए 310 रुपये (दो रुपये इंश्योरेंस प्रीमीयम व आठ रुपये इमरजेंसी हेल्थ पैक के शुल्क समेत) में एसेंट कार नंबर यूपी 78 एफएन 5980 बुक की। आरोप है कि तीन मिनट में सफेद रंग की एसेंट कार आ गई। चालक को ओटीपी बताने के बाद कैब में बैठे श्याम सिंह को चालक के लहजे से कुछ आशंका हुई तो उन्होंने अपने मोबाइल से उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। घर पर उतर कर उन्होंने नंबर प्लेट चेक की तो उस पर यूपी 74 टी 5446 लिखा था। चालक को रोकने पर उसने गाड़ी भगा दी। लेकिन आसपास के लोगों की मदद से चालक को पकड़ कर वे गुजैनी थाने ले गए। पुलिस ने बुकिंग वाले नंबर की डिटेल खंगाली तो पता चला कि वह एसेंट कार कार क्षतिग्रस्त हालत में अरमापुर में बीते दो सालों से खड़ी है, जिसकी फिटनेस 16 जनवरी 2021 को, टैक्स की वैधता 31 दिसंबर 2019 व इंश्योरेंस 15 जनवरी 2020 को ही खत्म हो गए थे। जाहिर है कंपनियां अनुबंधित गाड़ियों के कोई जानकारी नहीं रखती हैं। सवाल यह भी है कि सवारी के साथ अप्रिय घटना होने पर किसको जिम्मेदार ठहराया जाता? हालांकि शिकायत मिलने के बाद कंपनी ने दोनों वाहनों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। इस मामले में थाना प्रभारी राजेश सिंह ने कहा कि कैब कंपनी की लापरवाही सामने आई है। तहरीर मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
शिकायत पर थाने बुलाए गए कंपनी प्रतिनिधि के सामने ही शिकायतकर्ता श्याम सिंह ने शुक्रवार थाने में ही चार कैब बुक किए। जब वाहन मौके पर पहुंचे तो पाया गया कि किसी भी कैब में मानक पूरे नहीं थे। इस पर प्रतिनिधि ने लिखित रूप से कंपनी की चूक मानते हुए ऐसे वाहनों को खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया।
दो साल में कंपनी ने नहीं दिया ध्यान
कैब कंपनी में रजिस्टर्ड वाहन यूपी 78 एफएन 5980 दो साल से क्षतिग्रस्त हालत में अरमापुर में खड़ा था। इसके बाद भी कैब कंपनी ने इस वाहन का रजिस्ट्रेशन एप से समाप्त नहीं किया। जबकि, कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधि ने खुद माना कि प्रत्येक तीन से छह माह में रजिस्टर्ड वाहनों का सत्यापन उसकी वर्तमान भौतिक स्थिति जानने के लिए ही किया जाता है।
देखें फिटनेस और इंश्योरेंस या नहीं-कैब का समय से फिटनेस होना चाहिए। इसका लाभ कई बार मार्ग दुर्घटना चालक के साथ ही यात्रियों को भी मिलता है। वाहन का कॉमर्शियल इंश्योरेंस जरूरी होता है। इससे दुर्घटना में कैब सवार यात्री की जान जाने पर आश्रितों को आर्थिक लाभ मिलता है। इसी सुविधा का शुल्क कैब कंपनी यात्री से लेती भी है।
एसओएस बटन चेक करें-कैब में एसओएस (इमरजेंसी सूचना के लिए) बटन होना चाहिए। किसी आपातकालीन स्थिति में इस बटन को दबाते ही एक मैसेज कंपनी को, एक मैसेज पुलिस के पास व एक मैसेज यात्री द्वारा मुहैया कराए गए नंबर पर पहुंच जाता है। बटन में लाइट जलने से उसके ठीक होने की पुष्टि की जा सकती है।
- कैब के आगे, पीछे व दाएं और बाएं गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होना चाहिए।
- कैब के अंदर ड्राइवर, वाहन मालिक का नाम व नंबर अंकित होना चाहिए। इमरजेंसी नंबर भी अंकित होने चाहिए।
- बीमा, फिटनेस संबंधी वैधता भी अंकित होनी चाहिए।
- कैब में फर्स्टएड की सुविधा होना अनिवार्य है।
- मोबाइल चार्जिंग के लिए अलग से पोर्ट की सुविधा होनी चाहिए।
कैब कंपनियां अगर यातायात नियमों का पालन नहीं करेंगी तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- रवीना त्यागी, डीसीपी ट्रैफिक