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Kanpur News: मशीन में छेड़छाड़ कर 33 दिन में बैंक को लगाया 1.39 करोड़ का चूना

Thu, 19 Jun 2025 01:55 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:55 AM IST
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By tampering with the machine, the bank was duped of Rs. 1.39 crore in 33 days
कानपुर। कैश डिपॉजिट मशीन में रुपये जमा करने वाली कंपनी के कर्मचारी ने साथियों के साथ मिलकर बैंक को 1.39 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। आरोपियों ने किदवईनगर और सीसामऊ स्थित बैंक के एटीएम में सेंधमारी कर अपने बैंक खातों में जमा करने के नाम पर मशीन में सैकड़ों बार रुपये डाले। फिर खातों में रुपये अपडेट होने का मैसेज आते ही कर्मचारी से मिली चाभी की मदद से मशीन खोलकर जमा किए रुपये पार कर देते। 33 दिन तक लगातार चले खेल के बाद जब लेनदेन का हिसाब-किताब नहीं मिला तो बैंक ने किदवईनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने एटीएम की फुटेज खंगालने के बाद बुधवार को तीन आरोपियों को पकड़कर इस मामले का खुलासा कर दिया।
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डीसीपी दक्षिण दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बैंक के एटीएम में नकदी जमा करने वाली कंपनी हिटाची पेमेंट सर्विसेज के असिस्टेंट मैनेजर घनश्याम ओमर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके अनुसार किदवईनगगर जी-ब्लॉक स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम से 21 मार्च से 24 अप्रैल के बीच 33 दिन में कुल 1 करोड़ 38 लाख 91 हजार 500 रुपये गायब हो गए। पुलिस ने जांच कर हिटाची कंपनी में कस्टोडियन का काम करने वाले बिठूर के मकसूदाबाद निवासी दीपक जायसवाल, कोयलानगर की सीओडी कालोनी से सुधांशू जैसवार और नौबस्ता के देवकीनगर स्थित घर से विपिन दीक्षित को पकड़ लिया। तीनों के पास से पुलिस ने 19.15 लाख रुपये, चाभी और घटना में इस्तेमाल कार बरामद की है। हालांकि इस पूरे खेल का कोयलानगर निवासी मास्टरमाइंड अंकित त्रिपाठी और उसके भाई मनीष व आशीष को पुलिस अबतक नहीं पकड़ पाई है।
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अलग-अलग खातों में जमा करते थे रकम
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता चला कि कुछ युवक मशीन की ट्रे में रुपये डालने आते। कैश डिपॉजिटर मशीन के जरिये अपने बैंक खाते में रुपये जमा करते और बैंक से खाता अपडेट होने का मैसेज आने का इंतजार करते।
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चाभी के जरिये खोलते थे मशीन
पैसे जमा करने के बाद दीपक पुराने साथी अंकित को मशीन की ट्रे तक पहुंचने के लिए चाभी देता। चाभी से मशीन खोलकर आरोपी जमा की गई पूरी रकम निकाल लेते। कई बार उनसे पहले जमा किए गए पैसों को भी पार कर देते। फिर दोबारा वही रकम जमा कर पैसे निकालते।

15 बैंक खातों का किया इस्तेमाल
आरोपी जानते थे कि एक ही बैंक खाते में रुपये जाने पर बैंक को शक हो सकता है। इससे बचने के लिए वह 15 अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे। इन खातों में रुपये जमा करते-करते कई बार में उन्होंने 1.38 करोड़ रुपये का हेरफेर कर दिया।


अंकित ने बनाया प्लान, दीपक बना मददगार
पूरे खेल का मास्टरमाइंड पूर्व सैन्यकर्मी का बेटा अंकिता था। उसने अपने भाई मनीष और आशीष संग मिलकर प्लान तैयार किया। फिर साथ काम कर चुके दीपक की मदद से चाभी का इंतजाम किया। चाभी मिलने पर उन्होंने मशीन की कैश ट्रे तक पहुंच बनाई और अपना खेल शुरू कर दिया। इस दौरान सुधांशू जैसवार और विपिन दीक्षित भी खातों में रकम जमा करने में मदद करते थे।

डीसीपी के अनुसार शातिर भाइयों ने बैंक से हड़पी रकम से आलीशन मकान बनवाया है। उन्होंने अपनी-अपनी पत्नियों और अन्य परिजनों के बैंक खातों का इस्तेमाल इस जालसाजी के लिए किया है। ऐसे में उन सभी को भी आरोपी बनाकर सभी पर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी। जमा रकम वसूलने के लिए कुर्की की जाएगी। साथ ही जिन बैंक खातों में रुपये जमा करने के बाद निकाले गए हैं, उनकी जानकारी मुंबई स्थित बैंक के मुख्यालय से जुटाई जा रही है।
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