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रोटी-कपड़ा और मकान, सब जला
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:53 AM IST
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कल्लूपुरवा में लगी आग में जले तीन लाख रुपये व जेवर दिखाता देवी प्रसाद व बेटी लक्ष्मी।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। गंगा बैराज के पास कल्लूपुरवा गांव में अग्निकांड में ग्रामीणों की जीवनभर की कमाई राख हो गई। किसी ने बेटी की शादी के लिए रुपये और गहने बनवा कर रखे थे तो किसी की पत्नी और बहू के जेवरात घर में रखे थे। बच्चों की कॉपी-किताबें, स्कूली ड्रेस और मार्कशीट कुछ भी लपटों से नहीं बचा। एक दो नहीं बल्कि 70 परिवारों का यही हाल है। लपटों ने किसी की जिंदगी तो नहीं छीनी, लेकिन घरौंदों को इस तरह उजाड़ दिया कि दोबारा पैरों पर खड़े होने में सालों लग जाएगा। आग बुझने के बाद लोग सुबह से शाम तक राख में अपना कीमती सामान खोजते रहे। सिर ढकने के लिए छत, खाने के लिए दो जून की रोटी और पहनने के लिए कपड़े की जुगत में लगे रहे।
‘साहब अब बिटिया की शादी कइसन होई
अग्निकांड में सबसे बड़ा नुकसान कल्लूपुरवा के देवी प्रसाद का हुआ। देवी प्रसाद के घर में पत्नी फूल दुलारी, बच्चे शुभम, सोनम, पूजा और लक्ष्मी हैं। देवी प्रसाद ने बताया कि बेटी सोनम की शादी के लिए कई जगह रिश्ते की बात चल रही थी। हाल ही में बेटी की शादी के लिए खेत भी बेचा था। जिसके चार लाख रुपये मिले थे। एक लाख के जेवरात बनवा लिए और तीन लाख रुपये घर में रखे थे। आग के दौरान रुपये और जेवरात सबकुछ जलकर राख हो गए। जांच करने अधिकारी घर पहुंचे तो देवी प्रसाद और उसकी पत्नी हांथ जोड़कर बिलख पड़ी और कहा साहब... अब बिटिया की शादी कइसन होई। इस दौरान बच्चों ने भी हाईस्कूल, इंटर की अपनी जली हुई मार्कशीट दिखाईं।
कर्जा कैसे अदा होगा
गांव में रहने वाले दिलीप ने बताया कि सिविल ठेकेदार अभिषेक अग्रवाल के यहां मुंशी का काम करता है। एक दिन पहले ही ठेकेदार अभिषेक ने मजदूरों का भुगतान करने के लिए ढाई लाख रुपये दिए थे, जो घर के अंदर बैग में रखे हुए थे। आग में रुपये सहित पत्नी अंजू के एक लाख के जेवरात भी जल गए। दंपति यही सोच कर रोते रहे कि अब ठेकेदार का कर्जा कैसे अदा होगा। वहीं गांव में रहने वाले बुद्घीलाल का पक्का मकान भी आग से नहीं बच पाया। बुद्घिलाल की पूरी गृहस्थी, एक लाख रुपये और जेवरात जलकर राख हो गए।
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वहीं संतोष हलवाई की पूरी दुकान ही जल गई। दुकान के पीछे बने मकान में रखी अलमारी के भीतर रखे डेढ़ लाख रुपये, जेवरात सब जल गया। अग्निकांड के बाद अलमारी खोलकर देखी तो सिर्फ राख ही हांथ लगी। इसी तरह गांव के बनारसी लाल, संदीप, रामनाथ, राम किसन, लालू प्रसाद, दयाराम, कमल किशोर, बौली के घर में रखे हजारों रुपये और जेवरात जल गए।
अग्निकांड में पीड़ित परिवार
सुरेश, विनोद, बुद्घिलाल, गुड्डी, कमलेश, गोपाल, देवी प्रसाद, रामवती, चंदन, मनोज कुमार, लालू, रमेश, रामगोपाल, बृजमोहन, शिवरतन, मुन्नीलाल, मूलचंद, सुरेश, सियादुलारी, ममता, कांती, गुड्डी देवी, शिवप्रसाद, कौशल, पिंकी, रामचंद्र, प्रदीप, संतोष, रामप्रसाद उर्फ पप्पू, रामशंकर, दयाराम, बबली, दिलीप को जिला प्रशासन ने सूचीबद्घ किया है।
मुआवजे की चेक दिए
तहसीलदार अनिल कुमार ने बताया आग लगने से 36 परिवारों के 142 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं। सोमवार शाम को ही प्रति परिवार 3800 रुपये की चेकें बांट दी गई। मार्च माह में बजट सरेंडर करने के कारण अभी खाते में पैसा न होने पर पीड़ितों को 10-15 दिन बाद ही पैसा निकालने की सुविधा मिल सकेगी। सभी परिवारों को 30 किलो गेहूं और 20 किलो चावल दिया गया है।
बकरियां मरी, पेड़ जले
गांव में रहने वाले बौली उर्फ बबली की सात बकरियां हैं। घर के बाहर बंधी दो बकरियां जल कर मर गईं और पांच झुलस गईं। गांव के अंदर बस्ती के दर्जनों हरे पेड़ भी आग की चपेट में आने से जल गए।
वरीक्षा कैंसिल कर दो
गांव में रहने वाले कमल की 14 अप्रैल को वरीक्षा होनी थी। अग्निकांड के बाद कमल ने अपने बड़े भाई से कहा कि भइया अब ससुराल फोन करके वरीक्षा कैंसिल करा दो। घर ही जल गया है तो कार्यक्रम कहां होगा। वहीं आग की चपेट में आने से कमल की बाइक और ग्रामीणों की 13 साइकिलें भी जल गई।
आधे घंटे बाद पहुंची दमकल
कल्लू पुरवा में अग्निकांड के आधे घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। आधे घंटे में तो पूरा गांव जल गया। दमकल के जवानों ने सुलगती आग पर पानी डालकर ठंडा कर दिया। इतनी देरी से दमकल की गाड़ी आने पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। दमकल ने पानी कम पड़ने पर गंगा से ही सीधे पानी लेकर आग बुझाई।
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‘साहब अब बिटिया की शादी कइसन होई
अग्निकांड में सबसे बड़ा नुकसान कल्लूपुरवा के देवी प्रसाद का हुआ। देवी प्रसाद के घर में पत्नी फूल दुलारी, बच्चे शुभम, सोनम, पूजा और लक्ष्मी हैं। देवी प्रसाद ने बताया कि बेटी सोनम की शादी के लिए कई जगह रिश्ते की बात चल रही थी। हाल ही में बेटी की शादी के लिए खेत भी बेचा था। जिसके चार लाख रुपये मिले थे। एक लाख के जेवरात बनवा लिए और तीन लाख रुपये घर में रखे थे। आग के दौरान रुपये और जेवरात सबकुछ जलकर राख हो गए। जांच करने अधिकारी घर पहुंचे तो देवी प्रसाद और उसकी पत्नी हांथ जोड़कर बिलख पड़ी और कहा साहब... अब बिटिया की शादी कइसन होई। इस दौरान बच्चों ने भी हाईस्कूल, इंटर की अपनी जली हुई मार्कशीट दिखाईं।
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कर्जा कैसे अदा होगा
गांव में रहने वाले दिलीप ने बताया कि सिविल ठेकेदार अभिषेक अग्रवाल के यहां मुंशी का काम करता है। एक दिन पहले ही ठेकेदार अभिषेक ने मजदूरों का भुगतान करने के लिए ढाई लाख रुपये दिए थे, जो घर के अंदर बैग में रखे हुए थे। आग में रुपये सहित पत्नी अंजू के एक लाख के जेवरात भी जल गए। दंपति यही सोच कर रोते रहे कि अब ठेकेदार का कर्जा कैसे अदा होगा। वहीं गांव में रहने वाले बुद्घीलाल का पक्का मकान भी आग से नहीं बच पाया। बुद्घिलाल की पूरी गृहस्थी, एक लाख रुपये और जेवरात जलकर राख हो गए।
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वहीं संतोष हलवाई की पूरी दुकान ही जल गई। दुकान के पीछे बने मकान में रखी अलमारी के भीतर रखे डेढ़ लाख रुपये, जेवरात सब जल गया। अग्निकांड के बाद अलमारी खोलकर देखी तो सिर्फ राख ही हांथ लगी। इसी तरह गांव के बनारसी लाल, संदीप, रामनाथ, राम किसन, लालू प्रसाद, दयाराम, कमल किशोर, बौली के घर में रखे हजारों रुपये और जेवरात जल गए।
अग्निकांड में पीड़ित परिवार
सुरेश, विनोद, बुद्घिलाल, गुड्डी, कमलेश, गोपाल, देवी प्रसाद, रामवती, चंदन, मनोज कुमार, लालू, रमेश, रामगोपाल, बृजमोहन, शिवरतन, मुन्नीलाल, मूलचंद, सुरेश, सियादुलारी, ममता, कांती, गुड्डी देवी, शिवप्रसाद, कौशल, पिंकी, रामचंद्र, प्रदीप, संतोष, रामप्रसाद उर्फ पप्पू, रामशंकर, दयाराम, बबली, दिलीप को जिला प्रशासन ने सूचीबद्घ किया है।
मुआवजे की चेक दिए
तहसीलदार अनिल कुमार ने बताया आग लगने से 36 परिवारों के 142 व्यक्ति प्रभावित हुए हैं। सोमवार शाम को ही प्रति परिवार 3800 रुपये की चेकें बांट दी गई। मार्च माह में बजट सरेंडर करने के कारण अभी खाते में पैसा न होने पर पीड़ितों को 10-15 दिन बाद ही पैसा निकालने की सुविधा मिल सकेगी। सभी परिवारों को 30 किलो गेहूं और 20 किलो चावल दिया गया है।
बकरियां मरी, पेड़ जले
गांव में रहने वाले बौली उर्फ बबली की सात बकरियां हैं। घर के बाहर बंधी दो बकरियां जल कर मर गईं और पांच झुलस गईं। गांव के अंदर बस्ती के दर्जनों हरे पेड़ भी आग की चपेट में आने से जल गए।
वरीक्षा कैंसिल कर दो
गांव में रहने वाले कमल की 14 अप्रैल को वरीक्षा होनी थी। अग्निकांड के बाद कमल ने अपने बड़े भाई से कहा कि भइया अब ससुराल फोन करके वरीक्षा कैंसिल करा दो। घर ही जल गया है तो कार्यक्रम कहां होगा। वहीं आग की चपेट में आने से कमल की बाइक और ग्रामीणों की 13 साइकिलें भी जल गई।
आधे घंटे बाद पहुंची दमकल
कल्लू पुरवा में अग्निकांड के आधे घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। आधे घंटे में तो पूरा गांव जल गया। दमकल के जवानों ने सुलगती आग पर पानी डालकर ठंडा कर दिया। इतनी देरी से दमकल की गाड़ी आने पर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। दमकल ने पानी कम पड़ने पर गंगा से ही सीधे पानी लेकर आग बुझाई।