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बकस्वाहा जंगल को बचाने के लिए बुंदेली समाज नेे अन्ना हजारे को खून से लिखा खत, पीएम से भी मांग चुके हैं मदद
Tue, 15 Jun 2021 12:40 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 15 Jun 2021 12:40 AM IST
सार
बुंदेली समाज नेे भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने वाले अन्ना हजारे को भी खून से लिखा खत भेजा है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने भेजे गए पत्र में कहा है कि आपको मजबूर होकर खत लिख रहे हैं।
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बकस्वाहा जंगल
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मध्यप्रदेश के बक्सवाहा जंगल को बचाने के लिए बुंदेले जुट गए हैं। बुंदेली समाज नेे भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने वाले अन्ना हजारे को भी खून से लिखा खत भेजा है। बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने भेजे गए पत्र में कहा है कि आपको मजबूर होकर खत लिख रहे हैं।
प्लीज बुंदेलखंड के बेशकीमती जंगल बक्सवाहा को बचाने में हमारी मदद कीजिए। जंगल में हीरा भंडार के कारण मध्य प्रदेश सरकार ने 2.15 लाख पेड़ों का काटने का फरमान जारी कर दिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री, यूपी व एमपी के मुख्यमंत्री और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं।
बता दें कि बांदा के बुंदेलखंड में हीरा खदान के लिए बकस्वाहा जंगल के दो लाख से ज्यादा हरे-भरे पेड़ बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों द्वारा पांच जून को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर की गई थी।
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प्लीज बुंदेलखंड के बेशकीमती जंगल बक्सवाहा को बचाने में हमारी मदद कीजिए। जंगल में हीरा भंडार के कारण मध्य प्रदेश सरकार ने 2.15 लाख पेड़ों का काटने का फरमान जारी कर दिया है। इससे पहले प्रधानमंत्री, यूपी व एमपी के मुख्यमंत्री और केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं।
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बता दें कि बांदा के बुंदेलखंड में हीरा खदान के लिए बकस्वाहा जंगल के दो लाख से ज्यादा हरे-भरे पेड़ बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों द्वारा पांच जून को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दायर की गई थी।
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जिस पर एनजीटी ने हीरा खनन योजना में शामिल बिड़ला ग्रुप की माइनिंग कंपनी को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। एनजीटी ने जंगल कटने से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव की आकलन की रिपोर्ट भी माइनिंग कंपनी से तलब की है। बुंदेलखंड के मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बकस्वाहा जंगल मेें हीरा परियोजना लागू की जा रही है।
मध्यप्रदेश की सरकार ने बकस्वाहा में लगभग 382 हेक्टेयर जंगली भूमि हीरा खनन के लिए देश की नामचीन कंपनी एक्सल माइनिंग इंडस्ट्रीज को 50 साल के पट्टे पर दी है। यह कंपनी बिड़ला ग्रुप की है। दिल्ली के पीजी नाथ पांडेय व रजत भार्गव ने अधिवक्ता प्रभात यादव के माध्यम से याचिका दाखिल की है।
सुप्रीम कोर्ट में पहले ही इस मुद्दे पर नेहा सिंह रिट दायर कर चुकी हैं। उनके अधिवक्ता प्रीत सिंह हैं। एनजीटी में दायर याचिका में कहा गया कि हीरा खनन परियोजना से बायलाजिकल पर्यावरण को क्षति पहुंचने की आशंका है।
मांग की गई कि बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस (अनापत्ति प्रमाणपत्र) न दिया जाए। हालांकि, माइनिंग कंपनी पहल से ही यह दावा कर रही कि हीरा खनन परियोजना से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि परियोजना में 2.15 लाख पेड़-पौधे काटने की तैयारी है।
मध्यप्रदेश की सरकार ने बकस्वाहा में लगभग 382 हेक्टेयर जंगली भूमि हीरा खनन के लिए देश की नामचीन कंपनी एक्सल माइनिंग इंडस्ट्रीज को 50 साल के पट्टे पर दी है। यह कंपनी बिड़ला ग्रुप की है। दिल्ली के पीजी नाथ पांडेय व रजत भार्गव ने अधिवक्ता प्रभात यादव के माध्यम से याचिका दाखिल की है।
सुप्रीम कोर्ट में पहले ही इस मुद्दे पर नेहा सिंह रिट दायर कर चुकी हैं। उनके अधिवक्ता प्रीत सिंह हैं। एनजीटी में दायर याचिका में कहा गया कि हीरा खनन परियोजना से बायलाजिकल पर्यावरण को क्षति पहुंचने की आशंका है।
मांग की गई कि बकस्वाहा जंगल में हीरा खनन के लिए पर्यावरण क्लीयरेंस (अनापत्ति प्रमाणपत्र) न दिया जाए। हालांकि, माइनिंग कंपनी पहल से ही यह दावा कर रही कि हीरा खनन परियोजना से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि परियोजना में 2.15 लाख पेड़-पौधे काटने की तैयारी है।