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ब्रह्मावर्त बैंक मामला: छह साल से चल रही जांच, अब सात करोड़ की निकली बकायेदारी, 50 करोड़ की सरकारी सिक्योरिटी जमा

Thu, 22 Jul 2021 04:49 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 22 Jul 2021 04:49 PM IST
सार

आयकर विभाग ने नोटिस जारी करके रिटर्न दाखिल न किए जाने पर जानकारी मांगी है। बैंक के 50 करोड़ रुपये सरकारी सिक्योरिटी में जमा हैं। इसके बाद भी हजारों ग्राहकों की देनदारी नहीं चुकाई जा रही है।

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Brahmavart Bank case: Investigation going on for six years, now arrears of seven crores turned out
ब्रह्मावर्त बैंक मामला - फोटो : amar ujala

विस्तार

ब्रह्मावर्त बैंक के मामले में अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता की नई जांच रिपोर्ट में सात करोड़ की बकायेदारी बैंक प्रबंधकों पर बताई जा रही है। इस नई रिपोर्ट ने अफसरों की जांच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक में गड़बड़ी मामले की जांच छह साल से चल रही है। चार बार इसके लिक्विडेटर तक बदले जा चुके हैं। वहीं हैरत की बात यह है कि बैंक का लाइसेंस रद्द होने के बाद भी बैंक प्रॉफिट में चल रहा है।
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आयकर विभाग ने नोटिस जारी करके रिटर्न दाखिल न किए जाने पर जानकारी मांगी है। बैंक के 50 करोड़ रुपये सरकारी सिक्योरिटी में जमा हैं। इसके बाद भी हजारों ग्राहकों की देनदारी नहीं चुकाई जा रही है। इसके अलावा नगर निगम के सैकड़ों कर्मचारियों ने 35 करोड़ लोन ले रखा है। इसकी भी रिकवरी न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ब्रह्मावर्त बैंक में अनियमितताओं और खाते एनपीए होने की वजह से रिजर्व बैंक ने 2015 में बैंक के कामकाज पर रोक लगाकर लिक्विडेटर तैनात करने के निर्देश दिए थे। बाद में ऋणों की रिकवरी न होने पर तीन जुलाई 2018 को बैंक का लाइसेंस निरस्त कर दिया था।
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रिजर्व बैंक ने सहकारिता विभाग को निर्देशित किया था कि लिक्विडेटर की तैनाती कर खाताधारकों का जमा धन वापस कराने की प्रक्रिया शुरू कराएं। आठ जुलाई को सहकारिता विभाग ने लिक्विडेटर की तैनाती कर जांच शुरू कराई थी। जांच में पाया गया कि बैंक प्रबंधन से जुड़े लोगों ने 39 करोड़ का गबन किया है। इस पर लिक्विडेटर (ऋणशोधक) अंशल कुमार ने ब्रह्मावर्त बैंक के प्रबंधकों समेत 13 के खिलाफ गोविंद नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 
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इसके साथ ही सहकारिता विभाग में भी जांच चल रही थी। जांच अपर आयुक्त एवं अपर निबंधक सहकारिता विनय कुमार मिश्रा कर रहे थे। अब इन्होंने कुछ दिनों पहले जांच में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। करीब सौ पन्नों की जांच में सात करोड़ की बकायेदारी बैंक प्रबंधकों पर निकाली है। जबकि 32 करोड़ रुपये पर कुछ भी नहीं कहा गया है। इसके कयास यह लगाए जा रहे हैं कि गबन हुआ ही नहीं। वहीं सूत्रों का कहना है कि सात करोड़ के बकायेदारी निकलने पर बैंक प्रबंधन कोर्ट जा सकते हैं।

ग्राहकों की देनदारी क्यों नहीं
बैंक की नौ शाखाओं में करीब 35 हजार से अधिक खाताधारक हैं। अभी ऐसे खाताधारक जिनका एक लाख तक बकाया था। उन्हें रकम लौटाई गई है। जबकि बड़े ग्राहकों की रकम फंसी है। सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधन ने नगर निगम कर्मियों को एग्रीमेंट के तहत लोन दिए थे। यदि जांच अधिकारी नगर आयुक्त से भेंटकर करके रिकवरी कर लें तो पूरा डूबा धन मिल सकता है। देनदारी चुकाने के बाद भी बैंक के पास 10 करोड़ रुपये बचेंगे।

इन पर हुई थी एफआईआर
जांच अधिकारी ने गबन के आरोप में गोविंदनगर थाने में बैंक के मुख्य कार्यवाहक अधिकारी रतनलाल नगर निवासी आशुतोष कुमार मिश्रा, उनकी पत्नी बैंक की महाप्रबंधक किरण मिश्रा, सहायक महाप्रबंधक बेटे सौरभ मिश्रा, दिनेश कुमार दीक्षित, विनय प्रताप, केएस त्रिपाठी, संजय त्रिपाठी, संजीव वाजपेयी, विनोद कुमार गंगवार, गिरीश अवस्थी, चंद्र मोहन पांडेय, सत्यजीत अवस्थी, अतुल कुमार शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

ये लिक्विडेटर कर चुके हैं जांच
मामले की शुरुआती जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) राकेश कुमार ने की थी लेकिन दो माह बाद उनका ट्रांसफर हो गया था। इसके बाद मामले की जांच एडीसीओ उमेश कुमार राठौर, सुरेंद्र कुमार (सहकारी निरीक्षक वर्ग- दो), अरविंद कुमार सिंह ने की। मौजूदा समय में अंशल कुमार जांच कर रहे हैं।
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