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धांधलेबाजों पर कार्रवाई से पीछे हटा बीओएम

Sat, 05 Nov 2016 12:14 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 05 Nov 2016 12:14 AM IST
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bom say no to action against rigged
डेमो
कानपुर की चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बीओएम) ने 77 शिक्षकों की सीधी भर्ती में धांधली का मामला शुक्रवार को दबा दिया है। लखनऊ के मंडी भवन स्थित सातवें फ्लोर के सभागार में शुक्रवार को हुई मीटिंग में प्रमुख सचिव कृषि शिक्षा रजनीश गुप्ता की अध्यक्षता वाली बीओएम ने विज्ञापन और इंटरव्यू को निरस्त करने का फैसला नहीं लिया। पूरा मामला अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया। 
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हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों (दो) ने शिक्षकों की सीधी भर्ती मामले में धांधली की जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी थी। इस पर राज्यपाल राम नाईक ने पहले कुलपति प्रो. मुन्ना सिंह को निलंबित किया। बाद में उन्हें  बर्खास्त कर दिया। साथ ही कार्यवाहक कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह को आदेश दिया कि बीओएम की मीटिंग करके विज्ञापन, इंटरव्यू पर फैसला लें। भर्ती प्रक्रिया में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (आईसीएआर) की नियमावली का अनुपालन नहीं किया गया है।
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इंटरव्यू की एक्सपर्ट कमेटी का आधिकारिक अनुमोदन भी राजभवन से नहीं है। इसके बावजूद बीओएम ने धांधली पर कड़ा रुख नहीं अपनाया। आपसी चर्चा के बाद ही मामला टाल दिया। सूत्रों के मुताबिक लखनऊ में हुई 15 सदस्यीय बीओएम की मीटिंग हंगामेदार रही है। पांच सदस्यों ने इंटरव्यू का लिफाफा खोलने की मांग की। इसको सिरे से खारिज कर दिया गया। अन्य सदस्यों ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। पहले कानूनी सलाह ली जाएगी, फिर आगे की कार्रवाई होगी। बताते चलें कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली के साथ ही लेनदेन के आरोप भी लगे थे। आरोप था कि सेलेक्शन पाने वालों के नाम पहले से फिक्स हैं। कुछ अभ्यर्थियों के नाम भी गिनाए गए। बहरहाल, भ्रष्टाचार संबंधित राज्यपाल की जांच को बीओएम ने दरकिनार कर दिए हैं। 
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ये था मामला
शिक्षकों के 77 पदों पर सीधी भर्ती का विज्ञापन मार्च और अप्रैल 2014 को निकाला गया था। आवेदन फार्म जमा कराके 12 से 30 दिसंबर 2014 के बीच लखनऊ में इंटरव्यू कराए गए। इससे पहले ही वॉयस रिकार्डिंग की सीडी बाजार में आ गई। संविदा शिक्षक रहे डॉ. प्रभाकांत मिश्रा ने आरोप लगाया कि कुलपति के घर पर लगे बेसिक टेलीफोन से भर्ती के एवज में पैसे की मांग की गई। मामला राज्यपाल राम नाईक तक पहुंचा। राज्यपाल ने पूरे मामले की जांच कराई और कुलपति को बर्खास्त कर दिया। 
 
 
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