Boiler Blast: इत्र कारखाने हादसे में झुलसे एक और श्रमिक की मौत, 10 दिन बाद दिल्ली के अस्पताल में तोड़ा दम
24 जनवरी की रात पूर्व चेयरमैन के इत्र कारखाने में बॉयलर फटा था, जिसमें इत्र कारखाने के मालिक के बेटे समेत कई कर्मचारी झुलस गए। इन्हीं में से एक श्रमिक ने 10 दिन बाद दिल्ली के अस्पताल में दम तोड़ दिया है।
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कन्नौज जिले में नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन के इत्र कारखाने में बॉयलर फटने से झुलसे एक और कर्मचारी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हादसे के दौरान भी एक कर्मचारी की मौत हो चुकी है। इस हादसे में छह लोग जख्मी हुए थे। उनमें कारखाना मालिक के बेटे समेत चार का अब भी इलाज चल रहा है।
उनकी हालत भी नाजुक बताई जा रही है। कन्नौज नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन हाजी रईस अहमद का हाजीगंज में इत्र का बड़ा कारखाना है। उन्होंने 22 जनवरी को नगरकोट मोहल्ले में मंदिर के पास नए इत्र कारखाने का संचालन शुरू कराया था।
दो दिन बाद 24 जनवरी की रात करीब एक बजे पूर्व चेयरमैन का बेटा अब्दुल रहमान उसी नए कारखाने में बॉयलर पर इत्र तैयार करा रहा था। उसके साथ इस काम में मोहल्ला हाजीगंज निवासी कर्मचारी इस्माइल, वसीम अहमद, रफीक, बुरहान और चुरैया सढिय़ापुर बांगर निवासी सुनील राजपूत मदद कर रहे थे।
बॉयलर चलाने के लिए लकड़ी और कोयला जलाया जा रहा था। इसी दौरान प्रेशर ज्यादा होने से तेज धमाके के साथ बॉयलर फट गया था। इसकी चपेट में आकर सभी लोग झुलस गए थे। गंभीर रूप से घायल इस्माइल ने मौके पर दम तोड़ दिया था। अन्य लोगों को दिल्ली के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
बुधवार की रात एक बजे करीब 80 फीसदी झुलसे श्रमिक सुनील राजपूत ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, गंभीर रूप से झुलसे अब्दुल रहमान, वसीम अहमद, रफीक और बुरहान का दिल्ली में इलाज चल रहा है। श्रमिक सुनील की मौत से पत्नी कलावती, मां शकुंतला देवी और भाई सुशील का हाल बेहाल है।
पूर्व चेयरमैन के बेटे को हो चुकी है जेल
बता दें कि जान जोखिम में डालकर कारखाना संचालित करने के आरोप में पुलिस ने पूर्व चेयरमैन हाजी रईस अहमद और बेटे नसीम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बेटे नसीम को पुलिस जेल भेज चुकी है। हाजी रईस अहमद अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
बगैर एनओसी वाले इत्र कारखाना संचालकों पर होगी कार्रवाई
मुख्य अग्निशमन अधिकारी मुकीमुलहक ने बताया कि शहर के संचालित अधिकांश इत्र कारखाना संचालकों के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं है। कारखानों में अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे हैं। ऐसे संचालकों को चिन्हित करके उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।