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मेरी मौत के जिम्मेदार...घनश्याम, जितेंद्र और पुलिस, प्लाट के विवाद में अधेड़ ने पेट्रोल डाल लगाई थी आग
Mon, 18 Oct 2021 01:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 18 Oct 2021 01:28 PM IST
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प्लाट के विवाद में अधेड़ ने पेट्रोल डाल लगाई थी आग
- फोटो : amar ujala
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कानपुर में प्लाट के विवाद में बिधनू पुलिस की ओर से कार्रवाई न करने पर खुद को आग लगाने वाले ईश्वर चंद दीक्षित ने घनश्याम, जितेंद्र और पुलिस को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। अस्पताल में आखिरी सांसें ले रहे ईश्वर चंद ने मजिस्ट्रेटी बयान में कहा है कि घनश्याम व जितेंद्र ने मेरी जमीन पर कब्जा किया। इसमें पुलिस की मिलीभगत रही। इसी से परेशान होकर आग लगा ली।
ईश्वर चंद का यह बयान बेहद अहम है। पुलिस जब रिपोर्ट दर्ज करेगी तो बयान को मजबूत साक्ष्य के तौर पर जांच में शामिल करेगी। इसीलिए पुलिस ने बयानों की रिकॉर्डिंग कराई है। बयानों से साफ है कि प्लाट पर हुए कब्जे और पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने से ईश्वर चंद आहत थे। उनको लग रहा था कि कब्जा करने वालों के साथ पुलिस मिली हुई है, ऐसे में उनकी सुनवाई अब नहीं होगी। मेहनत की कमाई से जो जमीन खरीदी है, वह भी चली गई।
‘मरने के बाद ही पुलिस-प्रशासन क्यों जागता है’
ईश्वर चंद का परिवार रामपुरम श्यामनगर में किराये पर रह रहा है। परिवार में उनकी पत्नी रानी, तीन बेटियां, वेदिका, भूमिका व अदिति हैं। वेदिका एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। अदिति नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करती है। बेटियों का कहना है कि जब उनके पापा ने जान दे दी, तब पुलिस प्रशासन के अफसर आए हैं। दावा कर रहे कि जल्द से जल्द कार्रवाई होगी। इससे पहले कोई ध्यान देने को तैयार नहीं था। पहले ही कार्रवाई हो जाती तो उनके पिता आज जिंदा होते। मरने के बाद ही पुलिस प्रशासन क्यों जागता है।
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ईश्वर चंद का यह बयान बेहद अहम है। पुलिस जब रिपोर्ट दर्ज करेगी तो बयान को मजबूत साक्ष्य के तौर पर जांच में शामिल करेगी। इसीलिए पुलिस ने बयानों की रिकॉर्डिंग कराई है। बयानों से साफ है कि प्लाट पर हुए कब्जे और पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने से ईश्वर चंद आहत थे। उनको लग रहा था कि कब्जा करने वालों के साथ पुलिस मिली हुई है, ऐसे में उनकी सुनवाई अब नहीं होगी। मेहनत की कमाई से जो जमीन खरीदी है, वह भी चली गई।
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‘मरने के बाद ही पुलिस-प्रशासन क्यों जागता है’
ईश्वर चंद का परिवार रामपुरम श्यामनगर में किराये पर रह रहा है। परिवार में उनकी पत्नी रानी, तीन बेटियां, वेदिका, भूमिका व अदिति हैं। वेदिका एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। अदिति नोएडा की एक कंपनी में नौकरी करती है। बेटियों का कहना है कि जब उनके पापा ने जान दे दी, तब पुलिस प्रशासन के अफसर आए हैं। दावा कर रहे कि जल्द से जल्द कार्रवाई होगी। इससे पहले कोई ध्यान देने को तैयार नहीं था। पहले ही कार्रवाई हो जाती तो उनके पिता आज जिंदा होते। मरने के बाद ही पुलिस प्रशासन क्यों जागता है।
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कुछ ने आग बुझाई तो कुछ ने वीडियो बनाया
आग लगाते ही ईश्वर चंद जोर जोर से चीखने लगे। कुछ लोगों ने उन पर मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया तो कुछ बोरे से आग बुझाने लगे। हालांकि इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी रहे जो वीडियो बनाते रहे। आग जब तक बुझ पाती, ईश्वर चंद 90 फीसदी झुलस चुके थे।
जमीन के नाम पर चल रहा बड़ा खेल, पुलिस की मिलीभगत
आउटर में जमीनों का बड़ा खेल चल रहा है। भू माफिया जमीनों पर कब्जा करते हैं। पीड़ित की कहीं सुनवाई नहीं होती। पुलिस की भी मिलभीगत रहती है। बिधनू, सचेंडी, चौबेपुर, घाटमपुर समेत अन्य थाना क्षेत्रों में बड़े भू माफिया सक्रिय हैं। कमिश्नरी में भी चकेरी, नौबस्ता व कल्याणपुर थाना क्षेत्रों का भी यही हाल है। एक-एक प्लाट कई लोगों को बेच दिया जाता है। पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी है लेकिन कार्रवाई नहीं होती।
आग लगाते ही ईश्वर चंद जोर जोर से चीखने लगे। कुछ लोगों ने उन पर मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया तो कुछ बोरे से आग बुझाने लगे। हालांकि इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी रहे जो वीडियो बनाते रहे। आग जब तक बुझ पाती, ईश्वर चंद 90 फीसदी झुलस चुके थे।
जमीन के नाम पर चल रहा बड़ा खेल, पुलिस की मिलीभगत
आउटर में जमीनों का बड़ा खेल चल रहा है। भू माफिया जमीनों पर कब्जा करते हैं। पीड़ित की कहीं सुनवाई नहीं होती। पुलिस की भी मिलभीगत रहती है। बिधनू, सचेंडी, चौबेपुर, घाटमपुर समेत अन्य थाना क्षेत्रों में बड़े भू माफिया सक्रिय हैं। कमिश्नरी में भी चकेरी, नौबस्ता व कल्याणपुर थाना क्षेत्रों का भी यही हाल है। एक-एक प्लाट कई लोगों को बेच दिया जाता है। पुलिस के उच्चाधिकारियों को भी इसकी जानकारी है लेकिन कार्रवाई नहीं होती।