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यूपी: नकली ब्लैक फंगस इंजेक्शन की कालाबाजारी करने वाला निकला भाजपा नेता, पीएम भी दे चुके हैं बधाई
Fri, 28 May 2021 02:48 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 28 May 2021 02:48 PM IST
सार
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव व मंत्री सतीश महाना सहित कई बड़े भाजपा नेताओं के साथ उसके फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। बता दें कि प्रकाश भारतीय जनता युवा मोर्चा कार्यसमिति का सदस्य है।
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प्रकाश के साथ स्वतंत्र देव और सतीश महाना का फोटो
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कानपुर में ब्लैक फंगस के नकली एमफोनेक्स इंजेक्शन (एम्फोटेरेसिन बी साल्ट) इंजेक्शनों की सप्लाई करने वाला प्रकाश मिश्रा भाजपा नेता निकला। वह भारतीय जनता युवा मोर्चा में कार्यसमिति का सदस्य भी रह चुका है। उसके गिरफ्तार होने के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेता, मंत्रियों के साथ फोटो वायरल हो रही है।
2018 में प्रधानमंत्री ने प्रकाश को जन्मदिन पर शुभकामनाओं का संदेश भी भेजा था। वो पत्र भी वायरल हुआ है। यही वजह है कि जब पुलिस ने उसको पकड़ा था तो वो नेता, मंत्री की धमकी दे रहा था लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी थी और कार्रवाई की। ग्वालटोली से गिरफ्तार किया गया प्रकाश मिश्रा भाजपा में काफी सक्रिय रहा है।
एक पुलिस अफसर ने बताया कि जब इसको गुरुवार रात पकड़ा गया था तो उसने रौब जमाने का प्रयास किया था। उसने कहा था कि शहर से लेकर प्रदेश के बड़े नेता मंत्री व कुछ पुलिस अफसर बेहद करीबी हैं। सोच समझ कर कार्रवाई करना। जब ये बात नीचे के अफसरों ने उच्चाधिकारियों को बताई तो उस पर सीधे कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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नतीजा उन पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने प्रकाश व उसके साथी ज्ञानेश पर धोखाधड़ी, औषधि प्रसाधन सामग्री अधिनियम, नकली दवाई बेचने समेत अन्य धाराएं लगाई हैं। मगर पुलिस ने महामारी अधिनियम नहीं लगाया है। एसीपी का कहना है कि विवेचना के दौरान संबंधित धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
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2018 में प्रधानमंत्री ने प्रकाश को जन्मदिन पर शुभकामनाओं का संदेश भी भेजा था। वो पत्र भी वायरल हुआ है। यही वजह है कि जब पुलिस ने उसको पकड़ा था तो वो नेता, मंत्री की धमकी दे रहा था लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी थी और कार्रवाई की। ग्वालटोली से गिरफ्तार किया गया प्रकाश मिश्रा भाजपा में काफी सक्रिय रहा है।
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एक पुलिस अफसर ने बताया कि जब इसको गुरुवार रात पकड़ा गया था तो उसने रौब जमाने का प्रयास किया था। उसने कहा था कि शहर से लेकर प्रदेश के बड़े नेता मंत्री व कुछ पुलिस अफसर बेहद करीबी हैं। सोच समझ कर कार्रवाई करना। जब ये बात नीचे के अफसरों ने उच्चाधिकारियों को बताई तो उस पर सीधे कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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नतीजा उन पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया। पुलिस ने प्रकाश व उसके साथी ज्ञानेश पर धोखाधड़ी, औषधि प्रसाधन सामग्री अधिनियम, नकली दवाई बेचने समेत अन्य धाराएं लगाई हैं। मगर पुलिस ने महामारी अधिनियम नहीं लगाया है। एसीपी का कहना है कि विवेचना के दौरान संबंधित धाराएं बढ़ा दी जाएंगी।
एमएलसी अरुण पाठक और मंत्री बृजेश पाठक के साथ प्रशांत
- फोटो : amar ujala
वकील की गाड़ी का इस्तेमाल, वकालत की धौंस
बरामद एसयूवी पर हाईकोर्ट लिखा हुआ था। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि प्रयागराज निवासी एक वकील की कार है। अब तक ये नहीं मालूम चल सका है कि वकील की जानकारी में कालाबाजारी हो रही है या नहीं। पुलिस इस बिंदु की तफ्तीश कर रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी जब भी पकड़े जाते थे तो वो खुद को वकील बताते थे। वहीं गाड़ी पर भी हाईकोर्ट लिखा हुआ था, जिससे पुलिस की नजर से बच सकें। इसी तरह वो रौब गांठते थे।
ऐसे पकड़ा गया गिरोह
एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि सूचना मिली थी कि कानपुर में नकली इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। प्रयागराज से एक मोबाइल नंबर दिया गया। डीसीपी पश्चिम की सर्विलांस टीम ने इस नंबर को ट्रेस किया और ग्वालटोली के पास पकड़ा। तलाशी के दौरान इंजेक्शन बरामद हुए। दरअसल जहां पहले इस गिरोह ने नकली इंजेक्शन बेचे थे उसने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस अफसरों ने कानपुर पुलिस से वो जानकारी साझा की। जिसकी मदद से ये दबोचे गए।
बरामद एसयूवी पर हाईकोर्ट लिखा हुआ था। पुलिस ने जब जांच की तो पता चला कि प्रयागराज निवासी एक वकील की कार है। अब तक ये नहीं मालूम चल सका है कि वकील की जानकारी में कालाबाजारी हो रही है या नहीं। पुलिस इस बिंदु की तफ्तीश कर रही है। पुलिस के मुताबिक आरोपी जब भी पकड़े जाते थे तो वो खुद को वकील बताते थे। वहीं गाड़ी पर भी हाईकोर्ट लिखा हुआ था, जिससे पुलिस की नजर से बच सकें। इसी तरह वो रौब गांठते थे।
ऐसे पकड़ा गया गिरोह
एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि सूचना मिली थी कि कानपुर में नकली इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं। प्रयागराज से एक मोबाइल नंबर दिया गया। डीसीपी पश्चिम की सर्विलांस टीम ने इस नंबर को ट्रेस किया और ग्वालटोली के पास पकड़ा। तलाशी के दौरान इंजेक्शन बरामद हुए। दरअसल जहां पहले इस गिरोह ने नकली इंजेक्शन बेचे थे उसने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस अफसरों ने कानपुर पुलिस से वो जानकारी साझा की। जिसकी मदद से ये दबोचे गए।