चाइनीज मांझे से कटी भाजपा नेता की गर्दन
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ऐसे तैयार होता है चाइनीज मांझा
मांझा बनाने का एक्सपर्ट आतिफ ने बताया कि नायलोन के धागे को केमिकल में डुबाया जाता है। इसके बाद मांझे को ज्यादा धारदार बनाने के लिए पिसी कांच से उसकी कोडिंग की जाती है। धारदार होने की वजह से किसी के भी शरीर को जख्मी कर देता है और धागा नायलोन का होने से वह टूटता नहीं है। बरेली का मांझा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। सद्दी का मांझा 800 रुपये प्रति रील मिलता है। जबकि चाइनीज मांझा 200 रुपये रील मिलता है। जाफरी मांझा, रोहित मांझा, शाहिद, वाहिद मांझा, जिलानी का मांझा इस वक्त सबसे ज्यादा बिक रहा है।
पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
-चार साल पहले फूलबाग एलआईसी रोड पर चाइनीज मांझे से बच्ची की गर्दन कट गई थी। वह पिता के साथ बाइक से जा रही थी। मांझे से गर्दन कटने से बाइक अनियंत्रित होकर स्लिप हो गई। इस हादसे में बच्ची की मौत हो गई।
-डेढ़ साल पहले चुन्नीगंज में बाइक सवार बाबूपुरवा निवासी मो. आसिफ का मांझे से गाल कट गया था।
-करीब आठ महीने पहले कोयला नगर रोड में साइकिल सवार सुमित शर्मा का मांझे से गर्दन कट गई।
यहां बिकता है चाइनीज मांझा
कानपुर शहर की ज्यादातर पतंग दुकानदार चाइनीज चाइनीज मांझा बेचते है। जब प्रशासन अभियान चलाता है तो ये लोग दुकान के बजाय घर से चाइनीज मांझा बेचने लगे है। मुख्य रूप से मेस्टन रोड में रोटी वाली गली, चमनगंज, बेकनगंज, मसवानपुर, रावतपुर, मछरिया, कर्नलगंज आदि इलाकों में खुलेआम मांझा बिकता है।