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Kannauj: लाख बहोसी पक्षी विहार में सुरक्षा के अभाव में पक्षियों का शिकार
Wed, 22 Jan 2025 11:22 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 22 Jan 2025 11:22 PM IST
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लाख बहोसी पक्षी विहार
- फोटो : अमर उजाला
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तहसील क्षेत्र के लाख बहोसी गांव में स्थित पक्षी विहार को अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इस महत्वपूर्ण पर्यावरणीय स्थल पर हजारों प्रवासी और स्थानीय पक्षी हर साल शरण लेते हैं पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण उनकी जान खतरे में है। आए दिन विदेशी पक्षियों के शिकार होते रहते हैं। पक्षी विहार में शिकारियों की गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
पक्षी विहार में आने वाले विदेशी मेहमानों शिकारियों का शिकार बन रहे हैं। खास बात तो यह है कि पक्षियों की सुरक्षा के लिए पक्षी विहार में मचान बनाए गए हैं। इसके बावजूद निगरानी के लिए मचान पर कर्मी मौजूद नहीं रहता है। इसका फायदा शिकारी उठाते हैं और बेधड़क पक्षियों का शिकार करते हैं। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि कई बार पक्षियों के शिकार की जानकारी वन विभाग और प्रशासन को दी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पक्षी बिहार के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षाकर्मी नहीं है। न ही निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं। इसका फायदा उठाकर शिकारी आसानी से पक्षियों को मारते या फंसाते हैं। कई जगहों पर जाल और अन्य उपकरण खुलेआम देखे जा सकते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही से पक्षी विहार का महत्व कम होता जा रहा है। लाख बहोसी पक्षी विहार प्रभारी विकास सक्सेना का कहना है कि देखरेख के लिए सात संविदा कर्मचारी और छह सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति है। वन दारोगा ओपी वर्मा ने बताया कि पिछले दो साल से एक भी मुकदमा नहीं लिखा गया है और न ही किसी शिकारी को शिकार करते हुए पकड़ा गया है।
पक्षी विहार को मिली है अंतरराष्ट्रीय पहचान
लाख बहोसी पक्षी विहार को ‘रामसर साइट’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त है। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता के चलते शिकारी पक्षियों व मछलियों का शिकार करते रहते है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अविलंब सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। पक्षियों के संरक्षण के लिए गश्त दलों की तैनाती, निगरानी कैमरों की स्थापना और शिकारी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसा नहीं हुआ तो यह पक्षी विहार अपनी समृद्ध जैव विविधता और सुंदरता को खो देगा।
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साल दर साल घट रही पक्षियों की संख्या
लाख-बहोसी पक्षी विहार में साल दर साल पक्षियाें की संख्या घट रही है। झील के पास ही एक बोर्ड लगा है, जिसको देखकर इसका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। इसमें सबसे कम प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण झील में पानी कम होना, लगातार पक्षियों का शिकार होना और मोबाइल टॉवरों से होने वाला रेडिएशन भी शामिल है। इसके अलावा झील में पक्षियों के भोजन तथा प्रजनन की सुविधाओं का भी अभाव है, जिसके कारण मेहमान परिंदों की संख्या में काफी हद तक कमी आई है।
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पक्षी विहार में आने वाले विदेशी मेहमानों शिकारियों का शिकार बन रहे हैं। खास बात तो यह है कि पक्षियों की सुरक्षा के लिए पक्षी विहार में मचान बनाए गए हैं। इसके बावजूद निगरानी के लिए मचान पर कर्मी मौजूद नहीं रहता है। इसका फायदा शिकारी उठाते हैं और बेधड़क पक्षियों का शिकार करते हैं। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि कई बार पक्षियों के शिकार की जानकारी वन विभाग और प्रशासन को दी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पक्षी बिहार के आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षाकर्मी नहीं है। न ही निगरानी के लिए कैमरे लगाए गए हैं। इसका फायदा उठाकर शिकारी आसानी से पक्षियों को मारते या फंसाते हैं। कई जगहों पर जाल और अन्य उपकरण खुलेआम देखे जा सकते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही से पक्षी विहार का महत्व कम होता जा रहा है। लाख बहोसी पक्षी विहार प्रभारी विकास सक्सेना का कहना है कि देखरेख के लिए सात संविदा कर्मचारी और छह सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति है। वन दारोगा ओपी वर्मा ने बताया कि पिछले दो साल से एक भी मुकदमा नहीं लिखा गया है और न ही किसी शिकारी को शिकार करते हुए पकड़ा गया है।
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पक्षी विहार को मिली है अंतरराष्ट्रीय पहचान
लाख बहोसी पक्षी विहार को ‘रामसर साइट’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान प्राप्त है। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता के चलते शिकारी पक्षियों व मछलियों का शिकार करते रहते है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि अविलंब सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। पक्षियों के संरक्षण के लिए गश्त दलों की तैनाती, निगरानी कैमरों की स्थापना और शिकारी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसा नहीं हुआ तो यह पक्षी विहार अपनी समृद्ध जैव विविधता और सुंदरता को खो देगा।
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साल दर साल घट रही पक्षियों की संख्या
लाख-बहोसी पक्षी विहार में साल दर साल पक्षियाें की संख्या घट रही है। झील के पास ही एक बोर्ड लगा है, जिसको देखकर इसका तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है। इसमें सबसे कम प्रवासी पक्षी आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण झील में पानी कम होना, लगातार पक्षियों का शिकार होना और मोबाइल टॉवरों से होने वाला रेडिएशन भी शामिल है। इसके अलावा झील में पक्षियों के भोजन तथा प्रजनन की सुविधाओं का भी अभाव है, जिसके कारण मेहमान परिंदों की संख्या में काफी हद तक कमी आई है।