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रिटायर्ड सीओ का दावा, उनके हस्ताक्षर फर्जी
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कानपुर। बिकरू कांड की जांच में फंसे एक रिटायर्ड सीओ का दावा है कि दीपक दुबे के शस्त्र लाइसेंस की सत्यापन रिपोर्ट में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। ये बात उन्होंने अपने लिखित बयानों में जांच अधिकारी को बताई है। बयानों की सत्यतता जांची जा रही है।
एसआईटी ने बिल्हौर में तैनात रहे 11 सीओ को दोषी माना है जिनकी जांच एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार कर रहे हैं। इसमें से एक सीओ वर्तमान में आईपीएस हैं, इसलिए उनकी जांच डीआईजी कर रहे हैं।
1997 में तैनात रहे सीओ ब्रजन सिंह (अब रिटायर्ड) पर आरोप है कि एक सितंबर 1997 को दीपक दुबे का पहला शस्त्र लाइसेंस डबल बैरल बंदूक का बना था, जिसकी सत्यापन रिपोर्ट में उनके हस्ताक्षर हैं। जबकि तब दीपक पर सात आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। 82 वर्ष के सीओ ने उम्र का हवाला देते हुए कहा है कि उनको बहुत कुछ याद नहीं है। पर, दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं है।
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एसआईटी ने बिल्हौर में तैनात रहे 11 सीओ को दोषी माना है जिनकी जांच एसपी पश्चिम डॉ. अनिल कुमार कर रहे हैं। इसमें से एक सीओ वर्तमान में आईपीएस हैं, इसलिए उनकी जांच डीआईजी कर रहे हैं।
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1997 में तैनात रहे सीओ ब्रजन सिंह (अब रिटायर्ड) पर आरोप है कि एक सितंबर 1997 को दीपक दुबे का पहला शस्त्र लाइसेंस डबल बैरल बंदूक का बना था, जिसकी सत्यापन रिपोर्ट में उनके हस्ताक्षर हैं। जबकि तब दीपक पर सात आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। 82 वर्ष के सीओ ने उम्र का हवाला देते हुए कहा है कि उनको बहुत कुछ याद नहीं है। पर, दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर नहीं है।
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