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प्रदेश सरकार कानपुर में लगाने जा रही वेस्ट टू एनर्जी प्लांट: कूड़े से सस्ती बिजली बनाना सबसे बड़ी चुनौती
Thu, 07 Oct 2021 10:59 AM IST
शिखा पांडेय
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 07 Oct 2021 10:59 AM IST
सार
नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने कहा कि कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए जल्द ही स्थानीय स्तर पर अनुबंध किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कूड़ा निस्तारण की समस्या का समाधान कराने के लिए प्रदेश सरकार कूड़े से बिजली (वेस्ट टू एनर्जी) बनाने का पहला प्लांट कानपुर में लगाने जा रही है। 10 साल पहले भी इस तरह का प्रयास हुआ था। मगर नेशनल ग्रिड की अपेक्षा यहां बिजली महंगी बन रही थी।
इस वजह से प्लांट को बंद करना पड़ा था। ऐसे में कूड़े से सस्ती बिजली बनाना किसी भी नई कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। एटूजेड कंपनी ने 12 साल पहले शहर के सभी वार्डों से कूड़ा उठाने और उसे पनकी के ग्राम भाऊसिंह में पांडु नदी के किनारे बने कूड़ा निस्तारण प्लांट में ले जाकर जैविक खाद बनाना शुरू किया था।
इसके बाद 46 एकड़ जमीन पर बने प्लांट के पीछे पांडु नदी की दूसरी तरफ 2011 में कूड़े से बिजली बनाने के लिए 15 मेगावाट का प्लांट लगाया। इसके लिए आईएल एंड एफएस (फाइनेंस कंपनी) से लोन भी लिया। प्लांट को चालू कर नेशनल ग्रिड में बिजली देनी शुरू की।
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कूड़े में प्लास्टिक वेस्ट कम आने से बिजली मानक से कम पैदा हो रही थी। इसके चलते नेशनल ग्रिड की बिजली से यह महंगी पड़ रही थी। कंपनी घाटे में बिजली बेचने को तैयार नहीं थी। इसलिए उसने प्लांट बंद कर दिया।
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इस वजह से प्लांट को बंद करना पड़ा था। ऐसे में कूड़े से सस्ती बिजली बनाना किसी भी नई कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। एटूजेड कंपनी ने 12 साल पहले शहर के सभी वार्डों से कूड़ा उठाने और उसे पनकी के ग्राम भाऊसिंह में पांडु नदी के किनारे बने कूड़ा निस्तारण प्लांट में ले जाकर जैविक खाद बनाना शुरू किया था।
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इसके बाद 46 एकड़ जमीन पर बने प्लांट के पीछे पांडु नदी की दूसरी तरफ 2011 में कूड़े से बिजली बनाने के लिए 15 मेगावाट का प्लांट लगाया। इसके लिए आईएल एंड एफएस (फाइनेंस कंपनी) से लोन भी लिया। प्लांट को चालू कर नेशनल ग्रिड में बिजली देनी शुरू की।
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कूड़े में प्लास्टिक वेस्ट कम आने से बिजली मानक से कम पैदा हो रही थी। इसके चलते नेशनल ग्रिड की बिजली से यह महंगी पड़ रही थी। कंपनी घाटे में बिजली बेचने को तैयार नहीं थी। इसलिए उसने प्लांट बंद कर दिया।
बाद में वह कंपनी अनुबंध तोड़कर चली गई। नई योजना के तहत प्लांट के लिए जगह नगर निगम उपलब्ध कराएगा। पिछले महीने सोलर एनर्जी कारपोरेशन ऑफ इंडिया के अधिकारियों ने यहां आकर कूड़ा निस्तारण प्लांट का निरीक्षण भी किया था।
- कूड़े से बिजली बनाने के लिए उसमें प्लास्टिक वेस्ट होना जरूरी है। यहां कूड़ा बीनने वाले कूड़ा घरों से प्लास्टिक निकालकर बेच देते हैं।
- घरों से कूड़ा ले जाने वाले सफाई कर्मी भी प्लास्टिक वेस्ट बेचने लगे।
- कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए उपकरणों से लेकर जमीन खरीदने के लिए कंपनी ने आईएलएंडएफएस से करोड़ों का लोन लिया, जिसकी ब्याज की रकम भी लगातार बढ़ती जा रही थी।
- पांडु नदी के किनारे प्लांट में बरसात के मौसम में पानी भरने के कारण प्लांट संचालन ठप रहता था।
मौजूदा चुनौतियां
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के पहाड़ों की वजह से जगह की कमी
- नेशनल ग्रिड के रेट से सस्ती बिजली बनाना
- प्लांट की लागत, खर्चे कम रखना
इस वजह से पहले बंद हो गया था प्लांटकूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए जल्द ही स्थानीय स्तर पर अनुबंध किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। - शिवशरणप्पा जीएन, नगर आयुक्त
- कूड़े से बिजली बनाने के लिए उसमें प्लास्टिक वेस्ट होना जरूरी है। यहां कूड़ा बीनने वाले कूड़ा घरों से प्लास्टिक निकालकर बेच देते हैं।
- घरों से कूड़ा ले जाने वाले सफाई कर्मी भी प्लास्टिक वेस्ट बेचने लगे।
- कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने के लिए उपकरणों से लेकर जमीन खरीदने के लिए कंपनी ने आईएलएंडएफएस से करोड़ों का लोन लिया, जिसकी ब्याज की रकम भी लगातार बढ़ती जा रही थी।
- पांडु नदी के किनारे प्लांट में बरसात के मौसम में पानी भरने के कारण प्लांट संचालन ठप रहता था।
मौजूदा चुनौतियां
- कूड़ा निस्तारण प्लांट में कूड़े के पहाड़ों की वजह से जगह की कमी
- नेशनल ग्रिड के रेट से सस्ती बिजली बनाना
- प्लांट की लागत, खर्चे कम रखना